भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैंं माता वैष्णो देवी

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उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में माता वैष्णो देवी का दरबार शीर्ष पर है। दुुनियाभर से श्रद्धालु यहां आकर शीश नवाते हैं और माता उनकी झोली को भर देती हैं। मान्यता हैै कि यहां से माता का कोई भक्त निराश नहीं लौटताा है। यही कारण है कि यहां सालों भर भक्तों की भीड़ उमड़ी रहती है। इस मंदिर की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यहां एक साथ तीनों महाशक्ति पिंडी रूप में -महाकाली (बायीं तरफ), महालक्ष्मी (बीच में) और महासरस्वती (दायीं तरफ) का वास है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र है।


कैसे पहुचें : देश के विभिन्न इलाकों से मांं वैष्णोदेवी के दरबार में पहुंचने के क्रम में आमतौर पर यात्रा का पहला पड़ाव जम्मू होता है। जम्मू तक यात्री ट्रेन हवाई जहाज या टैक्सी से भी जा सकते हैं। हालांकि रेल व सड़क मार्ग से जम्मू से आगे कटरा तक पहुंचा जा सकता है लेकिन वहां के लिए यातायात का माध्यम सीमित है। गमिर्यों में प्रतिवर्ष रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए दिल्ली से कटरा के लिए विशेष ट्रेनें चलाता है। उत्तर भारत के कई प्रमुख शहरों से वहां के लिए आसानी से बस व टैक्सी मिल सकती है। हवाई मार्ग से जाने से दिल्ली से लगभग 80 मिनट का समय लगता है। जम्मू से कटरा के लिए कई बस टैक्सी ट्रेन मिलती है जिससे आसानी से पहुंचा जा सकता है।
कटरा के बेस कैंप से लगभग 12 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर समुद्र तल से 5200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। अधिकतर श्रद्धालु पैदल ही माता का दर्शन करने जाते हैं। चलने में असमर्थ भक्त या जिनके पास समय की कमी होती है, वे किराये पर उपलब्ध घोड़े का भी सहारा लेते हैं। इसके साथ ही आटो तथा हेलीकाप्टर की सेवा भी उपलब्ध है। कटरा से चलते ही करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बाणगंगा पोस्ट है जहां से श्रद्धालुओं को यात्रा पर्ची लेनी पड़ती है। इसी पर्ची के आधार पर ऊपर मंदिर दर्शन के लिए लाइन लगती है। ऊपर पहुंच कर यात्रा पर्ची के आधार पर मंदिर कमेटी के कर्मचारी आपको दर्शन के लिए लाइन लगने का समय बता देते हैं। उसके बाद निर्धारित समय पर लाइन में लगकर आप पवित्र गुफा में स्थित माता का दर्शन कर सकते हैं। माता की आरती दिन में दो बार होती है। एक सूर्योदय से पहले और दूसरी सूर्यास्त के बाद। आरती दो घंटे तक चलती है। 


निजी पूजा : निर्धारित शुल्क देकर मंदिर में निजी पूजा व आरती में शामिल होने का भी प्रावधान है। यात्री चाहे तो यज्ञ में भी भाग ले सकते हैं तथा साथ ही साथ नाम और गोत्र देकर अपने नाम पर पूजा भी करवा सकते हैं। पूजा की एक विधि यह भी है कि भक्त बिना पूजा में शामिल हुए अपना नाम व गोत्र दे सकते हैं उनके नाम पर पूजा कर प्रसाद उन्हें भेज दिया जाएगा। यह सुविधा पूरे वर्ष रहती है। लोग इसके लिए ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यम से बुकिंग करवा सकते हैं। ऑनलाइन बुकिंग कैंसिल नहीं हो सकती है। परिवार के नाम पर पूजा करवाने तथा फोन से बुकिंग करवाने पर पांच सदस्यों के नाम दिए जा सकते हैं और इसके लिए 5100 देने पड़ते हैंं।


निजी पूजा के लिए विशेष पैकेज (सामान्य दिनों में) :

कैटेगरी (ए) पूजा में एक ही आदमी भाग ले सकते हैं। इसके तहत यात्री को आरती दर्शन, निहारिका भवन में एसी रूम, तीनों वक्त का खाना एवं प्रसाद दिया जाता है। इसका शुल्क 16000 रुपये है।

कैटेगरी (बी) इसके तहत दो यात्री आरती दर्शन में भाग ले सकते हैं। इसमें आरती दर्शन, निहारिका भवन में एसी रूम में तीन वक्त का खाना एवं प्रसाद दिया जाता है। इसका शुल्क 31000 रुपये है।

कैटेगरी (सी) इसके तहत तीन यात्री भाग ले सकते हैं। इस पैकेज में आरती दर्शन, निहारिका भवन में एसी रूम, तान वक्त का खाना एवं प्रसाद दिया जाता है। इसका कुल शुल्क 46000 रुपये है।

कैटेगरी (डी) इसके तहत पांच यात्री भाग ले सकते हैं।  इस पैकेज में यात्री को आरती दर्शन, निहारिका भवन में एसी रूम, तीन वक्त का खाना एवं प्रसाद दिया जाता है। इसमें कुल खर्च 75000 रुपये का है। चेेक इन व चेेक आऊट का समय सुबह दस बजे का है।


आसपास के दर्शनीय स्थल

रघुनाथ मंदिर : जम्मू शहर के बीच बसा भगवान राम का यह मंदिर बहुत ही भव्य है। इसके साथ ही यहां के गलियारों में भी शालिग्राम का प्रयोग किया गया है। इस मंदिर को अन्य छोटे छोटे मंदिरों ने घेरा हुआ है। सभी देवताओं तो मिलाकर रामायण का सजीव चित्रण प्रस्तुत हो जाता है।

रनबिरेश्वर मंदिर : भगवान शिव का यह मंदिर जम्मू के शालीमार रोड पर स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव की 7.5 फीट के लिगं की पूजा की जाती है। इस लिगं के साथ ही महादेव के 15 सेंटीमीटर से 30 सेंटीमीटर के क्रिस्टल के छोटे छोटे लिंंग भी स्थापित हैं।

अमर महल : लाला पत्थर से बना महल भव्य है। यहां से शिवालिक की पहाड़ी़ और तापी नदी का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। राजा अमर सिंह का यह महल अब म्यूजियम में बदल दिया गया है। इसमें 120 किलो सोने से बना हुआ सिंहासन, सोफा और शेर दर्शकों को आकर्षित करते हैं। यहां पेटिंग का एक गलियारा हैं जिसे नल दमयंंती कहते हैं।

बाहु किला : तापी नदी के किनारे स्थित यह किला भव्य और पुराना है। इसके अंदर काली माँ का मंदिर है जिसे बाढे वाली मां का मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर जम्मू के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहां हर मंगलवार और रविवार तापी नदी की भी पूजा होती है।


कब जाएं : वैसे तो यहां सालों भर श्रद्धाालुओं का रेला लगा रहता है और भक्त वत्सल माता के दर्शन का कोई समय भी नहीं होना चाहिए लेकिन मौसम के हिसाब से यदि देखें तो यहां मार्च से मई और सितंबर से नवंबर का समय ज्यादा अनुकूल रहता है। इस दौरान न बारिश का खतरा रहता है और न ज्यादा ठंड का। आवागमन के रास्ते भी ठीक रहते हैं। आसपास का इलाका भी घूमा जा सकता है।



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