प्रकृति की शक्ति और उसके दोहन के तरीके (भाग-4)

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Nature

अगर आप प्रेम को हटा लें तो हमारी पृथ्वी कब्रिस्तान बन जाएगी।

— राबर्ट ब्राउनिंग, प्रख्यात कवि (1812-1889)


पूरा ब्रह्मांड प्रेम (आकर्षण) की शक्ति से संचालित और नियंत्रित होता है। आकर्षण की शक्ति नहीं होती तो ब्रह्मांड अस्त-व्यस्त हो जाता। पृथ्वी, चांद और तारे तक अपनी जगह पर बने नहीं रह पाते। पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए सूर्य की परिक्रमा नहीं करती। यहां तक की जीव-जंतुओं की संतति भी आगे नहीं बढ़ती। सारे जड़ व चेतन जहां के तहां पड़े रहते। प्रेम (आकर्षण) की शक्ति ही सबको सक्रिय रखती है। हम सुबह इसी शक्ति की बदौलत उठते हैं, रोजगार का जुगाड़ तलाशते हैं, हम में आगे बढ़ने और कुछ खास करने की ललक पैदा होती है। शिक्षा, खेल, नृत्य, बातचीत, धर्म, कला, संगीत सहित कुछ भी सीखने की ललक के पीछे इसी शक्ति का हाथ है। यहां तक कि मानव जाति का आधार स्त्री-पुरुष संबंध भी इसी पर टिका हुआ है। प्रेम (आकर्षण) न होता तो लोग निष्प्राण पत्थर की मूर्ति की तरह जीवन बिताते। महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति (प्रेम व आकर्षण) सबसे स्पष्ट और प्रभावी रूप में मानव मस्तिष्क में निहित है। अर्थात मानव में ही वह क्षमता है कि वह इच्छानुसार इस शक्ति का उपयोग कर सके।


ऐसे में सवाल उठता है कि अगर मानव के पास इतनी बड़ी शक्ति है तो उसका जीवन उल्लास से परिपूर्ण एवं अद्भुत क्यों नहीं है? क्यों नहीं उसके पास हर मनचाही वस्तु उपलब्ध हो पाती है? वह हमेशा सुखी और खुश क्यों नहीं रह पाता है? जवाब बेहद सरल है कि हमारी दुर्दशा के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। प्रकृति ने हमें सबसे बड़ी शक्ति प्रेम और आकर्षण के उपहार के साथ ही हर पल उन्हें चुनने या न चुनने का विकल्प भी दे दिया है। दुर्भाग्य से हम में से अधिकतर लोग रोजमर्रा के जीवन में अधिकतर समय प्रेम और आकर्षण की शक्ति के बदले नकारात्मक विचारों का चयन करते हैं और अपनी समस्याओं के लिए भाग्य को दोष देते हैं। इस नियम में कोई झोल या अपवाद नहीं है। जिसने भी सकारात्मक विचारों से प्रेम किया, उसके जीवन में सकारात्मक घटनाओं की भरमार रही, उसके जीवन में सुख, शांति और संपन्नता रही। जिसने नकारात्मक शक्ति का चयन किया, वह जीवन भर नकारात्मक घटनाओं, दुख, रोग, शोक आदि से घिरा रहा है।


मनोवैज्ञानिक शोधों से भी साफ हो चुका है कि सकारात्मक विचार मनुष्य के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उसकी शारीरिक और मानसिक ताकत को भी काफी बढ़ाता है। जोश और जज्बे की भावना उसमें ज्यादा रहती है, परिणामस्वरूप ऐसे लोग कड़ी चुनौतियों से निपटने में तुलनात्मक रूप में नकारात्मक विचार वाले लोगों से ज्यादा सक्षम होते हैं। आमतौर पर ऐसे लोगों का जीवन तनावरहित और सुखमय होता है। दरअसल इसका कारण प्रकृति का नियम ही है, जो किसी भी क्रिया के समान प्रतिक्रिया देती है। आप प्रेम और सकारात्मकता देते हैं, तो वही मिलता है और आप नकारात्मकता देते हैं, तो बदले में उसे पाते हैं। इस नियम में तनिक भी बदलाव संभव है। बिजली का आविष्कार, वाहन का चलना, हवाई जहाज का उड़ना आदि प्रकृति के नियम के अनुसार ही संचालित होता है। वैज्ञानिकों ने जितने भी आविष्कार किए हैं, वे सिर्फ इसलिए सफल हैं, क्योंकि प्रकृति के नियम के अनुकूल हैं। बिना अपवाद के कोई भी आविष्कार या चमत्कार प्रकृति के आकर्षण के नियम के विरुद्ध संभव नहीं है। पूरा ब्रह्मांड- ग्रह, नक्षत्र, सूर्य आदि सभी इसी नियम से संचालित होते हैं।


अब सवाल उठता है कि प्रेम या आकर्षण की शक्ति क्या है और कैसे काम करता है? मोटे रूप में देखें तो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थिति आदि के प्रति आकर्षण या प्रेम का भाव ही वह शक्ति है जो इस नियम के तहत निर्णायक होती है। पृथ्वी का सूर्य, चंद्रमा के प्रति आकर्षण ही उसे अपनी धुरी पर बनाए रखता है। इसी तरह पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण उस पर स्थित वस्तुओं, प्राणियों, वातावरण आदि के अस्तित्व का आधार होता है। जहां तक इस नियम के काम करने का मसला है, तो वह भी अत्यंत साफ है। हम जितनी शक्ति (स्पष्टता और तीव्रता) से किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति आकर्षित होते है, उतनी ही तीव्रता से आकर्षण का नियम ब्रह्मांड में संदेश भेजता है और वह वस्तु या व्यक्ति फिर उसी अनुपात में हमारी ओर खिंचता चला आता है। अधिकांश समय हमारे प्रेम/आकर्षण के विचार में स्पष्टता और तीव्रता की कमी होती है, परिणामस्वरूप हम इच्छित फल प्राप्त नहीं कर पाते हैं। यही स्थिति नकारात्मक भाव के साथ भी होती है। यदि आप किसी मित्र, परिचित या किसी भी व्यक्ति को अच्छे भाव से मदद करते हैं, तो वह भाव ब्रह्मांड में जाता है और सबसे पहले आपके मन को खुशी देता हुआ, आपके लिए भविष्य में सकारात्मक माहौल देने की पृष्ठभूमि तैयार कर लेता है। उदाहरण के लिए आप सड़क पर वाहन से कहीं गुजर रहे हैं और संकट में फंसे किसी व्यक्ति की रुककर मदद कर देते हैं। आप गंतव्य तक पहुंचते हैं तो आप जिस काम के लिए जा रहे थे, वह काम आपका आसानी से हो जाता है। प्रत्यक्ष रूप में भले आप दोनों घटनाओं को मिला न पाएं लेकिन यदि लगातार इन पर ध्यान देंगे तो पाएंगे कि ऐसी घटनाएं आपके साथ लगातार घटित होती हैं। यह अलग बात है कि प्रकृति के इस नियम से अनभिज्ञ लोग प्रतिदान को समझ नहीं पाते हैं। अत: अपनी भलाई के लिए आज से ही खुद को बदलने और सकारात्मकता से परिपूर्ण करने का संकल्प लें।


दोगे तो तुम्हें भी दिया जाएगा, तुम्हारे पैमाने के हिसाब से तुम्हें प्रतिदान मिलेगा।

– ईसा मसीह



 

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