सबसे धनी मंदिर : तिरुपति बालाजी, करते हैं भक्तों की हर मनोकामना पूरी

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एक लोककथा प्रचलित है कि भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी से धूमधाम से विवाह करने के लिए धन के देवता कुबेर से कर्ज के रूप में भारी धनराशि ले ली। शादी शानदार हुई लेकिन भगवान कोई रोजगार तो करते नहीं थे, अतः कर्ज कैसे चुकाते। उधर, कुबेर ने उनके कर्ज वापसी के लिए लगातार टोकाकाटी शुरू कर दी। बाद में दबाव देने लगे तो परेशान होकर भगवान भूमिगत हो गए। अब तो पूरे ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया। सृष्टि के पालन का काम ठप पड़ने लगा। माता लक्ष्मी भी परेशान हो गईं। सबने उनकी तलाश शुरू की। इसमें सफलता मिली माता लक्ष्मी को। उन्हें भगवान विष्णु तिरुमाला पर्वत श्रृंखला में छिपे हुए मिले। माता ने वापस विष्णु लोक चलने के लिए कहा तो तो उन्होंने माता को सारी बात बताई और जाने से इंकार कर दिया। माता लक्ष्मी ने उन्हें कहा कि वे चिंतामुक्त होकर एक अंश से यहां निवास करें। माता भी अपने अंश रूप में उनके साथ रहेंगी। यह मंदिर सबसे ज्यादा पैसे वाला होगा और कुबेर के कर्ज का भुगतान आसानी से हो जाएगा।


उक्त कथा में कितनी सच्चाई है यह तो भगवान ही जानें लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि तिरुपति बालाजी अर्थात भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर दुनिया के सर्वाधिक धनी मंदिरों में से एक है। कुछ समय पहले तक यही सबसे अमीर भगवान थे। अब उन्ही के दूसरे रूप तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभ स्वामी ने उन्हें टक्कर दे डाली है। लेकिन अभी रोज श्रद्धालुओं की आमद के हिसाब से तिरुपति ही सबसे बड़ा मंदिर है । इसकी कुल संपत्ति 50 हजार करोड़ से भी ज्यादा है। श्रद्धालुओं की आस्था के इस बड़े केंद्र से शायद ही कोई श्रद्धालु निराश लौटता है। इसी कारण यहां हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।


तिरुपति पहुंचना बहुत आसान है।

उत्तर भारत की ओर से जाना हो तो तिरुपति के लिए कई प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेन है। अन्यथा चेन्नई रूट पर गुडूर रेलवे स्टेशन पर उतर कर भी तिरुपति पहुंचा जा सकता है। तिरुपति आंध्र प्रदेश में है लेकिन तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से मात्र 140 किलोमीटर, बेंगलुरू से 300 किलोमीटर एवं हैदराबाद से 600 किलोमीटर दूर है। यानी सबसे आसान चेन्नई से पहुंचना है। तिरुपति के अलावा रेनुगुंटा नामक रेलवे स्टेशन भी पास में है। आप तिरुपति जाने के लिए तिरुपति या रेनुगुंटा कहीं भी उतर सकते हैं। हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरू से तिरुपति जाने और लौटने के लिए पैकेज टूर भी बुक कराया जा सकता है। लेकिन ट्रेन से तिरुपति पहुंचना ज्यादा बेहतर है। तिरुपति रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने पर आप सीधे विष्णु निवासम का रुख करें। ये स्टेशन के बिल्कुल सामने तिरुपति तिरुमला देवस्थानम ट्रस्ट द्वारा बनवाया गया कांप्लेक्स है। इस विशाल कांप्लेक्स में आवासीय सुविधा ( एसी नान एसी कमरे) निःशुल्क टायलेट, स्नानागार, क्लाक रुम, रेस्टोरेंट, फ्री डिस्पेंसरी, कलात्मक शापिंग के लिए दुकानें आदि सब कुछ हैं।


अगर आप किसी और होटल में भी रहने जाना चाहते हैं, लेकिन अभी चेक इन का समय नहीं हुआ है, या जाने वाली ट्रेन का इंतजार करना है तो भी विष्णु निवास में काफी वक्त गुजार सकते हैं। यहां अपने वाहन से आने वालों के लिए पार्किंग का भी इंतजाम है। इसी तरह का कांप्लेक्स श्रीनिवासम कांप्लेक्स नाम से तिरुपति बस स्टैंड के सामने भी है। उसके पास ही सस्ते व अच्छे होटल हैं। वैसे आप तिरुमला हिल्स पर रहने के लिए बुकिंग करा सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको अपने तिरुमला जाने की नीयत तारीख पहले से ही तय करनी होगी। आप ट्रस्ट वेबसाइट पर आनलाइन बुकिंग करा सकते हैं।
तिरुपति से 17 किलोमीटर दूर तिरुमाला पहाड़ी पर विराजते हैं भगवान वेंकटेश्वर। तिरुपति से तिरुमाला जाने के लिए रेलवे स्टेशन के सामने विष्णु निवासम से आंध्र प्रदेश रोडवेज की बसें जाती हैं। जाने का किराया 40 रुपये बच्चों के लिए 20 रुपये है। आप जीप से भी जा सकते हैं जहां किराया 50 रुपये हो जाता है। अपने लिए मोलभाव करके टैक्सी आरक्षित भी कर सकते हैं।


तिरुमाला की ओर जैसे ही आपकी गाड़ी चढ़ने लगती है वातावरण मनोरम होने लगता है। पहाड़ी पर चढ़ने से पहले चेकपोस्ट आता है जहां आपके सामानों की पहली चेकिंग होती है। तिरुमाला पहाड़ी पर पूरी तरह बालाजी का सम्राज्य है। यहां का अपना अनुशासन है जिसका पालन श्रद्धालुओं को करना पड़ता है। बालाजी के दर्शन करने वालों को चाहिए कि वे तिरुपति में ठहरें और तिरुमाला तैयार होकर दर्शन करने पहुंचे। वैसे तिरुमाला में भी आवासीय सुविधा है लेकिन वहां कई बार कमरे खाली नहीं मिलते। मंदिर में दर्शन की प्रक्रिया सुबह से देर रात तक चलती रहती है।


बालाजी के मुख्य रुप से दो तरह के दर्शन हैं। सर्व दर्शन सबके लिए नि:शुल्क है। समान्य दिनों में इसमें चार से छह घंटे, भीड़ होने से 20 से 40 घंटे भी लग सकते हैं। इसमें लाइन में लगे लोगों को बड़े बड़े हॉल में एक हॉल से दूसरे हॉल में शिफ्ट किया जाता है। इस दौरान खाने पीने, शौचालय आदि के इंतजाम रहते हैं। जल्दी दर्शन करना चाहते हैं तो 300 रुपये का शीघ्र दर्शन वाली लाइन में लग सकते हैं। तिरुमला प्रेस क्लब से शुरु होने वाले लाइन तकरीबन एक किलोमीटर घुमाते हुए आपको बालाजी के मुख्य मंदिर तक पहुंचाती है।


दर्शन की लाइन में जाने से पहले बैग, मोबाइल फोन, कैमरा जैसी चीजें लॉकर में जमा कर देनी पड़ती हैं। शीघ्र दर्शन के लाइन में भी दूध और काफी मिलती रहती है। रास्ते में टायलेट्स भी बने हैं। लाइन में आगे बैठने के लिए हॉल बनाए गए हैं। बालाजी के मुख्य मंदिर के द्वार पर पहुंचने के बाद सर्व दर्शन और शीघ्र दर्शन की लाइन एक ही हो जाती है। बाला जी का एक 50 रुपये का टोकन दर्शन भी है जो आपके लाइन में लगने की अवधि को कम कर देता है। इसमें आपको लाइन में लगने का तय समय दिया जाता है।


मंदिर दर्शन के वक्त भक्तों को भगवान के पास ज्यादा देर रुकने नहीं दिया जाता। आपके पीछे भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के इंतजार में होते हैं। तिरुपति बालाजी का दर्शन करने के बाद मंदिर से बाहर निकलने वाले सभी भक्तों को चावल का प्रसाद नि:शुल्क दिया जाता है। इस प्रसाद को श्रद्धालु वहीं पर ग्रहण कर सकते हैं। इसके अलावा प्रसाद में तिरुपति बाला जी के लड्डु दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। देशी घी के बने ये बड़े आकार के लड्डु लंबे समय तक खराब नहीं होते। अतः उसे खरीदकर आप घर ला सकते हैं। जो लोग 300 रुपये का शीघ्र दर्शन वाला टिकट खरीदते हैं उन्हें दो लड्डू निशुल्क दिए जाते हैं। जो लोग सर्व दर्शन की लाइन में लगे हैं वे अपनी इच्छा से लड्डू खरीदते हैं। मुख्य मंदिर के पास लड्डु के कई काउंटर एक भवन में बने हैं। तिरुपति के लड्डु के निर्माण में पवित्रता और सफाई का खास ख्याल रखा जाता है।


तिरुमाला पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल अन्न प्रसादम गृह बनाया गया है। यहां श्रद्धालु निशुल्क भोजन कर सकते हैं। अन्न प्रसादम गृह में आठ विशालकाय डायनिंग हॉल बनाए गए हैं। हर डायनिंग हॉल में 400 से ज्यादा लोग एक साथ बैठकर जीम सकते हैं। बैठने के लिए टेबल और बेंच लगे हैं। केले के पत्ते पर चावल, सब्जी, दाल, भुजिया, चटनी, सांबर, छाछ जैसी चीजें बड़ी पवित्रता से परोसी जाती हैं। अन्न प्रसादम के विशाल डायनिंग हॉल का उदघाटन 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने किया। ये अन्न प्रसादम हॉल देश के किसी भी मंदिर के डायनिंग हॉल से काफी बड़ा है। तिरुमाला का ये अन्न प्रसादम भक्तों के दान से बना है और भक्तों के दान से ही चलता है। आसपास के भक्त अन्न प्रसादम के लिए हरी सब्जियां और दाल आदि भी दान में देते हैं। अन्न प्रसादम का भोजन तैयार करने के लिए सफाई और पवित्रता का खास ख्याल रखा जाता है। अब अन्न प्रसादम के रसोई से बना भोजन तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम ट्रस्ट की ओर संचालित अस्पताल के मरीजों के लिए भी उपलब्ध कराया जा रहा है।



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