जब सेल्यूकस को पता चला सिकंदर की हार का कारण

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भारत से लौटते समय रास्ते में ही अलेक्जेंडर द ग्रेट यानी सिकंदर की मौत हो गई थी। उसके सेनापति सेल्यूकस ने उसके जीते गए राज्यों का खुद को राजा घोषित कर दिया। जब सेल्यूकस लौट कर यूनान गए तो वहां उनका भव्य स्वागत किया गया। वहां दरबार में राजनीति के प्रकांड विद्वान अरस्तू भी मौजूद थे। उन्होंने सेल्यूकस से पूछा- ‘सम्राट, यानी सिकंदर तो कभी नहीं हारे। आप कैसे हार गए।’ सेल्यूकस ने गर्व के साथ उत्तर दिया कि ‘उनके जामाता चंद्रगुप्त मौर्य के शौर्य के कारण उन्हें हारना पड़ा।’ यह सुन कर अरस्तू हंस पड़े। उन्होंने सेल्यूकस से कहा कि ‘उसे अपनी हार का कारण भी नहीं मालूम है। उसकी हार का कारण चंद्रगुप्त मौर्य नहीं, चाणक्य है।’ यह नाम सेल्यूकस ने पहली बार सुना था। उसे काफी आश्चर्य हुआ। उसने सोचा कि वह एक ऐसे व्यक्ति के कारण हार गया जिसका नाम भी उसे नहीं मालूम। इस बार उसने चाणक्य से मिलने की ठानी। लेकिन, इस बार वह सम्राट की वेश-भूषा में नहीं, व्यापारियों के दल के रूप में चला। उसने खैबर दर्रे के पास से भारत की सीमा में प्रवेश किया। वर्तमान में यह स्थान अफगानिस्तान के पास पड़ता है। वहां से महीनों यात्रा कर वे लोग पाटलिपुत्र पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद इन्होंने अपनी पहचान उजागर की। पाटलिपुत्र में चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने श्वसुर सेल्यूकस का भव्य स्वागत किया। शाम में सेल्यूकस ने कहा कि उनकी इस बार भारत आने का कारण चाणक्य हैं। वे चाणक्य से मिलना चाहते हैं। चंद्रगुप्त ने कहा कि इसके लिए अनुमति लेनी होगी। सेल्यूकस ने आश्चर्य के साथ पूछा कि आप भारत के सम्राट हैं, आपको भी अनुमति लेनी होगी। खैर, अनुमति मिल गई। दोनों चाणक्य से मिलने चले। आश्रम से काफी दूरी पर ही रथ रोक दिया गया। जब चंद्रगुप्त ने चाणक्य को बताया कि मेरे श्वसुर सेल्यूकस आपसे मिलने ही यूनान से यहां आए हैं तो चाणक्य ने कहा कि अब मेरी चिंता दूर हुई। यह सुन कर अब चौंकने की बारी सेल्यूकस की थी। उसने पूछा-कैसी चिंता! चाणक्य ने अपने दस्तावेज मंगवाए। सेल्यूकस ने जब खैबर दर्रे से भारत में कदम रखा था, उस समय से पाटिलीपुत्र पहुंचने तक की एक-एक बात दस्तावेज में दर्ज थी। चाणक्य के गुप्तचर वहीं से रोज सेल्यूकस पर नजर रख रहे थे। उन्होंने कहा कि अतिथि विदेशी है, इस कारण उस पर नजर रखना जरूरी है। आपने पूरी यात्रा के दौरान कभी अपने भारत आगमन के उद्देश्य की चर्चा नहीं की थी। सेल्यूकस समझ गया कि वास्तव में उसकी हार का कारण चाणक्य ही हैं। उसने कहा जब कि जब तक वन में रह कर आप जैसे ज्ञानी देश की चिंता करते रहेंगे, तब तक इस देश का बाल भी बांका नहीं होगा।



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