शक्ति संचय व मनोकामना पूर्ति का स्वर्णिम अवसर नवरात्र

317
शक्ति संचय व मनोकामना पूर्ति का स्वर्णिम अवसर नवरात्र
शक्ति संचय व मनोकामना पूर्ति का स्वर्णिम अवसर नवरात्र।

शारदीय नवरात्र 2021 : सात से 15 अक्तूबर तक

Navratri is golden opportunity for power accumulation and wish fulfilment : शक्ति संचय व मनोकामना पूर्ति का स्वर्णिम अवसर नवरात्र। इस बार सात अक्तूबर 2021 से शारदीय नवरात्र का प्रारंभ हो रहा है। विजया दशमी 15 अक्तूबर को है। माता की उपासना के लिए आठ दिन का समय मिल रहा है। भक्तों के लिए यह समय साधना के लिए अत्यंत अनुकूल है। वैसे भी ऋतुओं के संधिकाल को साधना काल माना जाता है। शारदीय नवरात्र में मां शक्ति परिवार सहित पृथ्वी पर विराजती हैं। कम साधना से भी वे प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान देती हैं। इस समय दिन छोटे हो रहे होते हैं और उनमें शीतलता बढ़ रही होती है। शरीर और बाहरी मौसम का तापमान लगभग समान होता है, इसके कारण शारीरिक ऊर्जा का क्षय कम होता है। इसलिए अतिरिक्त ऊर्जा का विनियोग साधना में करने पर व्यक्ति में नई संभावनाओं का सृजन होता है।

व्रत में रखें स्वास्थ्य का भी ध्यान

साधकों के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि साधना और आहार का शरीर व मन पर गहरा असर पड़ता है। मन की स्थिति अन्न पर निर्भर करती है। व्रत से पूर्व ही आहार को लेकर सजग हो जाना चाहिए। अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्यवर्द्धक एवं सात्विक आहार को भोजन में शामिल कर लेना चाहिए। इससे बीमारियों से बचने के साथ ही, आपके शरीर में पर्याप्त ऊर्जा बनी रहेगी। पद्मासन अथवा सुखासन में बैठकर ध्यान लगाने का अभ्यास नवरात्र साधना के दौरान बहुत सहयोगी साबित होता है। दैनिक बोलचाल में कटु वाणी का त्याग करके यथासंभव अपने चहुंओर के परिवेश को सात्विक बनाए रखें। यदि किसी मंत्र या पाठ को करने की इच्छा है तो उसका अभ्यास भी पहले कर लेना चाहिए। इससे उसकी संख्या, समय और शुद्धता की परख पहले ही हो जाती है।

यह भी पढ़ें- बिना जन्मकुंडली व पंडित के जानें ग्रहों की स्थिति और उनके उपाय

शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखें

शारदीय नवरात्र शक्ति संचय व मनोकामना पूर्ति का शानदार अवसर है। इस दौरान व्रत महत्वपूर्ण है। यह साधक की शारीरिक और मानसिक स्थिति को स्थिर रखने में सहायक होता है। सजग रहते हुए व्रत करें तो यह शरीर में ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहने के साथ स्वास्थ्य के लिए भी वरदान होता है। इसमें कई व्रती खूब आलू खाते हैं। वह उचित नहीं है। नियमित अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाना, तरल या पेय चीजें लेते रहना और जरूरत से ज्यादा न खाना उपवास को उपयोगी बनाने के मुख्य उपाय हैं। यह भी ध्यान रखें कि लंबे समय तक भूखे रहने से पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ताजा फल व जूस का सेवन करना चाहिए। दही, घर में बना पनीर, मूंगफली, ताजा सब्जियों व फलों का जूस ले सकते हैं। लस्सी, नारियल पानी, घर में बने सूप व नींबू पानी का सेवन भी कर सकते हैं।

सप्तशती पाठ या मंत्र जप का ले सकते हैं संकल्प

यदि मात्र भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति के लिए उपासना करना चाहते हैं तो नवरात्र में नित्य दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ करना उचित रहेगा। आप चाहें तो इसके साथ – ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये विच्चै मंत्र का भी जप सुविधानुसार कर सकते हैं। कुछ लोग इस दौरान अन्य मंत्रों का भी संकल्प लेकर सिद्धि के लिए जप करते हैं। उसके लिए भी अनुकूल समय है। यदि मनोकामना पूर्ति की इच्छा है तो सप्तशती का संपुट पाठ करना उचित रहेगा। संपुट पाठ में अपनी इच्छानुसार सप्तशती के हर मंत्र से पहले और बाद में कामना मंत्र पढ़ा जाता है। भक्तों की सुविधा के लिए दुर्गा सप्तशती पुस्तक के अंत में कई कामना मंत्र दिए गए हैं। उनमें से किसी का भी चयन किया जा सकता है। पाठ व जप से पहले मां दुर्गा की विधिवत पूजा अवश्य करें। अंत में क्षमा स्तोत्र पढ़ें।

नोट- शक्ति संचय व मनोकामना पूर्ति का स्वर्णिम अवसर नवरात्र का यह क्रम जारी रहेगा। आगे के अंकों में कुछ प्रमुख मंत्र, साधना विधि और दुर्गा के विभिन्न रूप, महिमा और सिद्धियों की जानकारी दी जाएगा।

यह भी पढ़ें- अत्यंत कल्याणकारी है दुर्गा सप्तशती

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here