करमनघाट हनुमान मंदिर में डर से औरंगजेब हो गया था बेहोश

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शाबर मंत्र के कुछ और उपयोगी मंत्र एवं प्रयोग विधि
शाबर मंत्र के कुछ और उपयोगी मंत्र एवं प्रयोग विधि।

Aurangzeb fainted with fear in Hanuman temple : करमनघाट हनुमान मंदिर में डर से औरंगजेब हो गया था बेहोश। हनुमान जी यहां स्वंय प्रकट हुए थे। उन्होंने राजा को स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर बनवाने का आदेश दिया था। यह श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां हनुमान जी प्रत्यक्ष अनुभव होते हैं। औरंगजेब की उसकी सेना ने इस मंदिर को गिराने की कोशिश की। उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। हनुमान जी के उग्र रूप से सैनिक कांप उठे। औरंगजेब तो बेहोश ही हो गया। यह मंदिर उस दौर में भी सीना ताने खड़ा रहा। यह मंदिर संतानहीन स्त्रियों व लाइलाज बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए वरदान है।

900 साल पहले स्थापित हुआ था मंदिर

ऐतिहासिक दस्तावेज के अनुसार मंदिर की स्थापना 12वीं सदी में हुई है। उस दौरान काकतीय वंश के राजा प्रताप रुद्र द्वितीय जंगल में शिकार करने गए थे। उन्होंने जंगल में रात बिताई जाए। आधी रात को उनकी नींद खुली। उन्हें लगा कि कोई भगवान श्रीराम के नाम का जप कर रहा है। विस्मित राजा आवाज के आधार पर आगें बढ़े। देखा कि हनुमान जी की मूर्ति ध्यान मुद्रा में बैठी हुई है। उस मूर्ति में गजब का आकर्षण था। उन्हें महसूस हुआ कि राम नाम की आवाज उसी मूर्ति से आ रही है। ध्यान से देखने पर लगा कि मूर्ति नहीं बल्कि खुद हनुमान जी बैठे हुए हैं। कुछ देर बैठकर राजा अपने शिविर में लौट गए। रात में स्वप्न देखा कि हनुमान जी साक्षात दर्शन देकर वहां मंदिर बनाने का आदेश दिया। फिर राजा ने मंदिर बनवाया।

चमत्कारिक अनुभव होते हैं भक्तों को

जंगल में स्वयंभु हनुमान की प्रतिमा पहले से थी। उसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। करमनघाट हनुमान मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा ध्यानस्थ है। कहा जाता है कि वे अपने इष्ट भगवान राम के ध्यान में मग्न हैं। इसलिए इसे ध्यानंजनेय स्वामी का मंदिर भी कहा जाता है। वहां जाने वाले भक्तों को दिव्य व चमत्कारिक अनुभूति होती है। लोगों की मनोकामना पूर्ति का भी यह बड़ा केंद्र है। यहां आने वाले कई लोगों की गंभीर बीमारियां ठीक हो गई हैं। यह भी मान्यता है कि संतानहीन स्त्रियों को यहां आने पर निश्चित ही संतान की प्राप्ति होती है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इस मंदिर में हनुमान जी की विशेष पूजा मंगलवार या शनिवार को न होकर रविवार को होती है। यहां हनुमान जी का रूप सुदर्शन और शांत है।

औरंगजेब को खानी पड़ी शिकस्त, हुआ बेहोश

इस बारे में दिलचस्प कथा है। कथा के अनुसार मंदिरों को तोड़ने के अभियान में सन 1687 में औरंगजेब यहां आया था। उसने सिपाहियों को मंदिर तोड़ने का आदेश दिया। सिपाही इस प्रयास में जड़ हो गए। काफी कोशिश के बाद भी मंदिर तोड़ना तो दूर उसकी ओर बढ़ भी नहीं पाए। उन्होंने औरंगजेब को इसकी जानकारी दी। वह खुद मंदिर तोड़ने आया। वह जैसे ही मंदिर की ओर बड़ा अंदर से भीषण गर्जना की आवाज आई। साथ ही स्वर गूंजा-करमनघाट। अर्थात दिल को मजबूत करो। इसके बाद औरंगजेब बेहोश हो गया। सिपाही उसे उठाकर ले गए। उसने फिर इस मंदिर का रुख नहीं किया। इसके बाद मंदिर की ख्याति और फैली। करमनघाट हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं को अभी भी अलौकिक अनुभव होता है।

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