दीपावली में शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन

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दीपावली में शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन
दीपावली में शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन।
auspicious time and lakshami poojan in diwali : दीपावली में शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन। इसके लिए शुभ मुहूर्त को जानना जरूरी है। इस साल अमावस्या को लेकर पेंच फंसा है। अमावस्या 14 नवंबर को शुरू होगा। यह 15 नवंबर को सुबह 10.36 तक है। अर्थात अमावस्या में सूर्योदय 15 को होगा। लेकिन दीपावली अमावस्या की रात में होती है। अमावस्या की रात 14 नवंबर को है। इसलिए दीपावली उसी रात मनाई जाएगी। अतः लक्ष्मी पूजन भी 14 की शाम को होगी। अब बात पूजन के लिए शुभ मुहूर्त की।

लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली में शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन। पूजन के लिए मुहूर्त नीचे है। 
पूजन समय– शाम-05.28 से 07.24 बजे तक।
सर्वश्रेष्ठ समय-शाम 05.49 से 06.2 बजे तक
प्रदोष काल—–शाम 05.33 से रात 08.12 बजे तक।

चौघड़िया मुहूर्त

दोपहर 02.17 से शाम 04.07 बजे तक।
शाम-05.28 से 07.07 बजे तक।
रात्रि 08.47 से 01.45 बजे तक।
15 नवंबर को
सुबह 05.04 से 06.44 बजे तक।
गृहस्थों के लिए श्रेष्ठ समय
शाम 05.49 से 06.02 बजे तक।
व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12.09 से शाम 04.05 बजे तक।

मंत्र सिद्धि के लिए बोजोड़ समय

दीपावली में शुभ मुहूर्त मंत्र सिद्ध् के लिए बेजोड़ है। धन प्राप्ति व मनोकामना पूर्ति में भी प्रभावी है। इसके लिए प्रदोषकाल से आधी रात तक जप करें। यह समय जाग्रत रहता है। आधी रात तक न हो तो प्रदोषव्यापिनी को शुभ समय मानें। व्रतोत्सव में स्पष्ट लिखा है।
कार्तिके मास्यमावास्या तस्यां दीपप्रदीपनम्।
शालायां ब्राह्मण: कुर्यात् स गच्छेत् परमं पदम्।
अर्थात- अमावस्या में प्रज्ज्वलित दीपों की पंक्ति लगाएं। दीपों का मंडल बनाएं। ऐसे व्यक्ति को परमपद प्राप्त होता है। सामान्य भाषा में देखें। दीपावली में जलते दीपों की पंक्ति रहती है। दीपों का मंडल बनाने से दीपमालिका बनती है। ब्रह्मपुराण में स्पष्ट लिखा है। इस तिथि को लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर आती हैं। वे सद्गृहस्थों के घरों में घूमती हैं। उनकी कृपा पाने के लिए घर को स्वच्छ रखें। उसे शुद्ध और सुशोभित रखें। इससे माता प्रसन्न होती हैं। वे उस घर में स्थाई रूप से रहती हैं।
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कार्तिक अमावस्या

भविष्योत्तर में लिखा है। इस दिन सुबह में स्नान करें। फिर देव और पितर का अर्चन करें। दूध, दही, घी आदि से श्राद्ध करें। अपराह्न में घर को साफ व सुशोभित करें। भजन, नृत्य और संकीर्तन भी करें। प्रदोषकाल में दीप सजाएं। आधी रात तक सजावट का निरीक्षण करें। इसके बाद सूप और डमरू बजाएं। इस तरह लक्ष्मी का आवाहन करें। साथ ही अलक्ष्मी को घर से बाहर करें।

कौमुदी महोत्सव

दीपावली में शुभ मुहूर्त में इसका महत्व है। इसमें धन वृद्धि के लिए प्रयास किया जाता है। इसे टोटका कह सकते हैं। वह्निपुराण में लिखा है। सारे कृत्य एकादशी से ही शुरू करें। यह अमावास्या तक निरंतर चलना चाहिए। उस दिन सभी प्रकार से खुश व संतुष्ट हों। स्वच्छ व सजे घर में दीपक जलाएं। इससे कौमुदी महोत्सव पूरा होता है।

लक्ष्मी पूजन

लक्ष्मी पूजन के बिना दीपावली संभव नहीं है। दीपावली में शुभ मुहूर्त में ही पूजन करें। लक्ष्मी पूजन के बारे में पहले लिख चुका हूं। नीचे लिंक भी दे रहा हूं। यहां पुनः संक्षिप्त विधि दे रहा हूं। सुबह स्नानादि से निवृत्त हों। फिर निम्न मंत्र से संकल्प लें। दिन भर व्रत रखें। इस दौरान पूर्ण उपवास करें। ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करें।
मम सर्वापच्छांतिपूर्वकदीर्घायुष्य बलपुष्टिनैरूज्यादि सकलशुभफलप्राप्त्यर्थं गजतुरगरथ राज्यैश्चर्यादि सकलसंपदामुत्तरोत्तराभिवृद्ध्यर्थम् इंद्रकुबेरसहितश्रीलक्ष्मीपूजनं करिष्ये।
शाम को पुन: स्नान करें। दीपमालिका और दीपवृक्ष आदि बनाएं। खजाने में या किसी शुद्ध, सुंदर, सुशोभित और शांतिवर्द्धक स्थान में वेदी बनाएं। चौकी-पाटे आदि पर अक्षतादि से अष्टदल लिखें। फिर उस पर लक्ष्मी को स्थापित करें। निम्न मंत्र पढ़ें।
लक्ष्म्ये नम:। इंद्राय नम:। कुबेराय नम:।
तीनों नाम से अलग या संयुक्त रूप से पूजन करें। उन्हें धूप-दीप के साथ नैवेद्य का भोग लगाएं। फिर लक्ष्मी की वंदना करें।
नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरे: प्रिया। इंद्र की ऐरावत समारूढ़ो वज्रहस्तो महाबल:। शतयज्ञाधिपो देवस्तस्मा इंद्राय ते नम: और कुबेर की धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसंपद:।
 

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