माला के महत्व को जाने बिना मंत्र जप अधूरा

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माला के महत्व को जाने बिना मंत्र जप अधूरा
माला के महत्व को जाने बिना मंत्र जप अधूरा

Chanting the mantra is incomplete without Mala : माला के महत्व को जाने बिना मंत्र जप अधूरा रहता है। जप के लिए माला का चयन बेहद  महत्वपूर्ण है। मंत्रों और देवताओं के अनुसार माला भी तय है। उसी माला पर जप करना श्रेयस्कर और फलदायी होता है। इसका प्रभाव सूक्ष्म लेकिन गहरा होता है। कई लोग इसके महत्व को जानें बिना जप करते हैं और अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से निराश होते हैं। पिछले लेख में मैंने नाम जप का जिक्र किया था। उसके लिए भी माला जरूरी है। कामना मंत्र या शक्ति मंत्र में तो इसका महत्व और ज्यादा है। यह निश्चित मानें कि सही माला का चयन किए बिना मंत्र जप उसी तरह का होता है जैसे कार में पेट्रोल या डीजल के बदले केरोसिन डालकर चलाना। नीचे पढ़ें कि किस तरह के मंत्र और देवता के लिए कौन माला उपयुक्त है।

मंत्र जप में माला का महत्व

जप के महत्व पर इसी वेबसाइट में कई लेख हैं। अतः सीधे माला के महत्व पर आता हूं। पहले तो जानें कि माला क्यों जरूरी है। जप तो गिनने वाले किसी आधुनिक उपकरण या घड़ी में समय देखकर अंदाज से भी किया जा सकता है। इसका जवाब है कि क्या हम वैज्ञानिक प्रयोग में एच2ओ में थोड़ा फेरबदल कर अपेक्षित परिणाम पा सकते हैं? जवाब होगा बिल्कुल नहीं। उसी तरह जप में भी होता है। प्रक्रिया दोषपूर्ण होगी तो परिणाम सटीक कैसे होंगे? जप में मंत्र के साथ उंगलियां माला के मनकों को एक-एक कर पार करती हैं। ध्यान में संबंधित देवता होते हैं। तब ध्वनि तंरग के साथ, क्रिया और भाव तरंग भी एक साथ अपना काम करती हैं। अन्य तरीके में सिर्फ शब्द तंरग की रह जाती है। क्रिया और भाव तंरग का लगभग लोप होता है। साथ ही मन की चंचलता कम होकर एकाग्रता बढ़ती है।

जानें किस मंत्र व देवता के लिए कौन सी माला उपयुक्त

माला के महत्व को जानने से पहले यह समझ लें कि सनातन परंपरा में माला में 108 मनके से जप का विधान है। इसके बाद सुमेरु का स्थान होता है। उसे लांघा (पार) नहीं किया जाता है। वहां से माला को घुमा लिया जाता है। अब बात आती है कि देवता और मंत्र के अनुसार माला का विधान। जैसे एक सामान्य परंपरा के अनुसार शिव के लिए रुद्राक्ष, विष्णु के लिए तुलसी, देवी के लिए देवियों के लिए रक्त चंदन, गणेश, बृहस्पति और बगलामुखी के लिए हल्दी आदि की माला से जप का विधान है। आमतौर पर साधक अपने आराध्य देवी-देवता के अनुसार ही माला धारण करते हैं।

शिव व उनके मंत्रों के लिए रुद्राक्ष की माला

शिव और उनके मंत्रों के जप के लिए रुद्राक्ष की माला सबसे उपयुक्त है। इसकी उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से मानी जाती है। मान्यता है कि इस पवित्र बीज में हर दुख को दूर करने की ताकत है। कई लोग इससे जप करने के साथ ही रुद्राक्ष की माला पहनते भी हैं। मान्यता है कि इससे जप करने पर शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उनके मंत्र का भी जल्दी फल मिलता है।

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विष्णु और उनके रूपों के लिए तुलसी की माला

तुलसी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसकी पत्तियों के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि उन्हें भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त है। इसलिए इसके पौधे को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसकी पत्तियां भगवान के पूजन में और लकड़ी माला बनने में काम आती हैं। इस माला धारण करने वाले को भगवान विष्णु और उनके अवतारों की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि माला धारण करने के कड़े नियम हैं। पूरी तरह सात्विक होना जरूरी है। अन्यथा लाभ के बदले हानि होने का खतरा रहता है।

हल्दी की माला का महत्व

हल्दी को भारतीय परंपरा में शुभ माना जाता है। पीला रंग भी शुभ माना जाता है। इसका भोजन में भी प्रयोग होता है। इसको स्वास्थ्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पीला रंग प्रथम पूज्य गणेश, देव गुरु बृहस्पति, विष्णु और बगलामुखी को प्रिय है। अतः हल्दी की माला से इन सभी का जप प्रभावी माना जाता है। बृहस्पति को अनुकूल करने के लिए भी हल्दी की गांठ को धारण करना उपयोगी होता है। संतान और ज्ञान प्राप्ति में भी इस माला से जप करने से शीघ्र फल मिलता है। माला के महत्व को जानने के क्रम में यह बेहद अहम है।

चंदन की माला अत्यंत उपयोगी

चंदन की तासीर जबरदस्त होती है। माला के साथ ही इसे घिस कर माथे पर तिलक के रूप में लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे तन और मन को शीतलता मिलती है। साथ ही दैवीय कृपा भी मिलती है। चंदन दो तरह का होता है। सफेद और रक्त चंदन। सफेद चंदन विष्णु और उनके अवतारों को प्रिय है। रक्त चंदन से शक्ति के विभिन्न रूपों के मंत्रों जप किया जाता है। उससे मंत्र शीघ्र फल देते हैं। साधक की मनोकामना पूरी होती है। जैसे शक्ति की साधना में लाल चंदन की माला से तो वहीं भगवान कृष्ण के मंत्र का जप सफेद चंदन की माला से किया जाता है। इस माला के मंत्र जप से मनोकामना बहुत जल्दी पूर्ण होती है।

स्फटिक की माला

स्फटिक पत्थर दिखने में सुंदर और आकर्षक होता है। उसी तरह इसकी माला को धारण करना भी सुंदरता के साथ दैवीय कृपा दिलाती है। मान्यता है कि इससे जबरदस्त सकारात्मकता निकलती है। नकारात्मक ताकत इसे पहनने वाले के पास भी नहीं आ सकती है। देवी की साधना में यह माला अत्यंत उपयोगी है। खासकर मां सरस्वती की आराधना और मंत्र जप में बेहद कारगर है। स्फटिक की माला को धन और मन दोनों ताकत प्रदान करने वाला माना जाता है। शुक्र ग्रह को अनुकूल बनाने के लिए भी इसकी माला उपयोगी मानी जाती है।

कुछ अन्य प्रमुख मालाएं

कमलगट्टे की माला देवियों, वैजयंती की माला विष्णु के लिए उपयुक्त मानी जाती है। टोपाज की माला बृहस्पति, गणेश और बगलामुखी के जप व प्रसन्नता के लिए उपयोगी है। इसको हल्दी का विकल्प के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त भी कई मालाएं हैं। उनका रूटीन में कम उपयोग होता है। विशेष जानकारी के लिए उनके बारे में आवश्यकतानुसार साधक सीधे संपर्क कर सकते हैं। उम्मीद है कि मंत्र जप और देवताओं की प्रसन्नता के लिए माला के महत्व को आपने समझ लिया होगा।

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