मनोकामना के अनुसार पूजा के लिए चुनें शिव विग्रह

102
मनोकामना के अनुसार पूजा के लिए चुनें शिव विग्रह
मनोकामना के अनुसार पूजा के लिए चुनें शिव विग्रह।

Choose Shiv deity for worship according to your wish : मनोकामना के अनुसार पूजा के लिए चुनें शिव विग्रह। अर्थात जानें कि महादेव की किस विग्रह की पूजा से मिलता है क्या फल? वैसे तो शिव हर रूप में कल्याणकारी हैं। भक्तों के भाव से ही प्रसन्न होकर वे हर इच्छा पूरी करते हैं। इसी कारण उन्हें औघड़दानी, भोलेनाथ जैसे नामों से भी पुकारा जाता है। फिर भी विशेष कामना और अनुष्ठान के लिए अलग से विधान है। श्रीलिंग महापुराण में इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इसमें साफ है कि शिवलिंग तो उपयोगी है ही उनके विभिन्न रूप अत्यंत कल्याणकारी हैं। हर रूप के पूजन का अलग-अलग फल है। आवश्यकतानुसार उनके उन रूपों की पूजा करनी चाहिए। मनोकामना पूर्ति में इस पूजा विधि का विशेष महत्व है। सावन माह में यह और अधिक कल्याणकारी और उपयोगी है। इसे अवश्य आजमाएं और इसका लाभ उठाएं।

विवाह में अर्धनारीश्वर व शिक्षा में उपदेश वाला रूप

यदि विवाह की समस्या आ रही हो तो शिव के अर्धनारीश्वर रूप की पूजा करें। इससे विवाह की बाधा दूर होती है। इस रूप की पूजा सुखी वैवाहिक जीवन में भी उपयोगी है। अर्थात दांपत्य जीवन में समस्या हो तो भी इस रूप की पूजा से फायदा होगा। विद्यार्थियों के लिए महादेव के उपदेश देने वाली स्थिति में बैठे प्रतिमा की पूजा श्रेयस्कर है। इस रूप में वे विद्या और ज्ञान दोनों ही देते हैं। शरीर पर भस्म लगाए बैठे हुए भोलेनाथ का रूप दोषों के नाश के लिए अत्यंत प्रभावी है। इस रूप में वे भक्तों के हर दोष को हर लेते हैं। यदि ग्रह दशा, पितृ दोष आदि से परेशान हों तो इस रूप की पूजा से अवश्य लाभ होगा। ध्यान रहे कि पूजा नियमित और भक्तिपूर्वक होनी चाहिए। इसमें उन्हें प्रिय वस्तु भांग, धतूरा, आक, बेल पत्र, बेल आदि भी अवश्य चढ़ाएं।

यह भी पढ़ें : महाकाल की नगरी उज्जैन : दूर होते हैं सारे दुख

सुख, सम्मान व संतान के लिए इन रूपों की पूजा करें

मनोकामना के अनुसार पूजा में सुख, सम्मान और संतान का बड़ा महत्व है। इसलिए जानें इन कामनाओं की पूर्ति के लिए महादेव के रूपों के बारे में। शिव जी के साथ माता पार्वती और कार्तिकेय साथ हों तो उस रूप की पूजा सुख-सुविधा के लिए अत्यंत प्रभावी है। इस रूप वाली प्रतिमा की पूजा करने से जीवन में सुख बढ़ता है। सुख-सुविधा के साधन जुटते हैं। नंदी और गणों से घिरे भोलेनाथ की माता पार्वती का रूप प्रभाव बढ़ाने वाला है। उनके इस रूप वाली प्रतिमा की पूजा करने से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। बैल पर बैठे शिव-पार्वती की प्रतिमा की पूजा संतान कामना के लिए बहुत उपयोगी है। यदि संतान की कामना है। इसके लिए परेशान हैं। कई उपाय कर चुके हैं तो उनके इस रूप की नियमपूर्वक पूजा करें। मनोकामना पूर्ति होने तक इसे करते रहें। निश्चय ही लाभ मिलेगा।

विभिन्न शिव विग्रहों की करें मनोकामना के अनुसार पूजा

भोलनाथ की त्रिशूल धारण किए चार हाथ और तीन नेत्रों वाली प्रतिमा देखी होगी। उनके उत्तर में विष्णु और दक्षिण में ब्रह्मा की प्रतिमा होती है। यह रूप अत्यंत उपयोगी है। इसकी पूजा से बीमारियों से मुक्ति मिलती है। स्वास्थ्य अच्छा रहता है। भोलेनाथ के इसी रूप में यदि वे अकेले हैं। इसमें प्रतिमा का रंग सफेद होना चाहिए। उनके हाथ में त्रिशूल के बदले कपाल और गले में सांप है, तो धन-संपत्ति देने वाले बन जाते हैं। यदि प्रतिमा का रंग काला है। तीनों नेत्र लाल हैं। चंद्रमा को आभूषण की तरह धारण किए हैं। एक हाथ में कपाल और दूसरे में गदा है। इस प्रतिमा की पूजा से काफी समय से रुके काम पूरे हो जाते हैं। मनुष्य की सारी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। शत्रु के भय से परेशान हैं तो जलंधर दैत्य का वध करते शिव की पूजा करें। इसमें हाथ में सुदर्शन चक्र है।

पारिवारिक सुख व अन्य कार्यों के लिए ये रूप प्रभावी

भोलेनाथ की मनोकामना के अनुसार पूजा में उनकी पार्वती के साथ की प्रतिमा बेहद उपयोगी है। पारिवारिक सुख के लिए इससे अच्छा उपाय और कुछ नहीं है। जटा में गंगा, सिर पर चंद्रमा धारण किए शिव की बायीं ओर गोद में पार्वती बैठी हैं। साथ में गणेश और कार्तिक हैं। ऐसी प्रतिमा की पूजा पारिवारिक विवाद को खत्म करता है। घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है। माता के साथ नृत्य करते हजार भुजाओं वाले शिव की प्रतिमा की पूजा हर सुख दिलाने वाली है। भगवान निकुंभ दैत्य की पीठ पर बैठे हों और बायीं ओर माता पार्वती हों। ऐसा प्रतिमा की पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। हाथ में धनुष-बाण लेकर रथ में बैठे शिव प्रतिमा की पूजा समस्त पापों का नाश करती है। दो सिरों वाली अग्निस्वरूप महादेव की प्रतिमा की पूजा से कभी अन्न की कमी नहीं होती है।
प्रस्तुति- किशोर झा

संदर्भ- श्रीलिंग महापुराण

यह भी पढ़ें- भगवान शिव की उपासना का महीना सावन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here