पितृपक्ष में स्वयं करें श्राद्ध और तर्पण

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पितृपक्ष में स्वयं करें श्राद्ध और तर्पण
पितृपक्ष में स्वयं करें श्राद्ध और तर्पण।

do-shraadh-and-tarpan-in-pitrapaksh-yourself : पितृपक्ष में स्वयं करें श्राद्ध और तर्पण। इसकीविधिकाफी आसान है। कोरोनाकाल में पंडितों को बुलाना भी समस्या है। इसलिए इसकी आसान विधि दे रहा हूं। इसमें अधिक पैसे और समय खर्च करने या परेशान होने की भी जरूरत नहीं है। कुश, जौ, काला तिल, सफेद फूल, जल, अक्षत और पके चावल से काम चल सकता है। पितर के निधन के पांच साल हो चुके हों तो प्रक्रिया और हल्की हो जाएगी। फिर श्राद्ध करना जरूरी नहीं है। सिर्फ तर्पण और भोज ही उपयुक्त होता है।

कैसे करें समय का निर्धारण

यदि महिला के लिए तर्पण और श्राद्ध कर रहे हैं तो उचित होगा कि दिन में 12 से पूर्व काम शुरू कर दें। उनके लिए बेहतर समय 11 से 1 बजे के बीच का होता है। पुरुषों के लिए कर रहे हैं तो सर्वश्रेष्ठ समय 12 बजे के बाद अर्थात 12 बजे से 2 बजे के बीच का होता है। 

आवाहन व तर्पण मंत्र व विधि

हर महत्वपूर्ण कार्य की तरह पितरों को तर्पण देने और श्राद्ध शुरू करने से पहले संकल्प लेने का विधान है। यह सरल विधि है। पितृपक्ष में स्वयं करें इन सारी प्रक्रिया को। इसमें सबसे पहले हाथ में कुश, काला तिल, जौ, अक्षत (कुछ जगहों पर) एवं जल लेकर इस मंत्र से संकल्प करें–ऊं अद्य श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त सर्व सांसारिक सुख-समृद्धि प्राप्ति च वंश-वृद्धि हेतव देवऋषिमनुष्यपितृतर्पणम च अहं करिष्ये। इसके बाद उनका आवाहन इस मंत्र से करें-“ब्रह्मादय:सुरा:सर्वे ऋषय:सनकादय:। आगच्छंतु महाभाग ब्रह्मांड उदर वर्तिन:।फिर हाथ में जल और काला तिल लेकर इस पुनः इस मंत्र से पितर का आवाहन करते हुए उन्हें अपिर्त करें-मम (अमुक-अपना नाम) गोत्र (गोत्र का नाम) अस्मत पिता/माता (जिनके लिए कर रहे हैं-उनका नाम) वसुस्वरूप तृप्यताम इदम तिलोदकम तस्मै स्वधा नम:।

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श्राद्ध कर्म मंत्र

तर्पण के बाद चावल को मिट्टी के पात्र में पका कर उसे पिंड रूप (गोल) कर उस पर काला तिल लगाना चाहिए फिर इस मंत्र से पितर को अर्पित करें- अनेन यथाशक्ति कृतेन देवऋषिमनुष्यपितृतरपण आख्य कर्म भगवान पितृस्वरूपी जनार्दन वासुदेव प्रियताम नमम। ऊं ततसद ब्रह्मा सह सर्व पितृदेव इदम श्राद्धकर्म अर्पणमस्तु। ऊं विष्णवे नम:, ऊं विष्णवे नम:, ऊं विष्णवे नम:। इसे तीन बार कहकर श्राद्ध कर्म पूर्ण करना चाहिए। पितृपक्ष में स्वयं करें श्राद्ध और तर्पण के अंत में प्रार्थना का विधान है।

प्रार्थना मंत्र

पितर के तर्पण और श्राद्ध के बाद इस मंत्र से उनकी प्रार्थना करें- ऊं नमो व:पितरो रसाय नमो व:पितर: शोषाय नमो व:पितरो जीवाय नमो व:पितर:स्वधायै नमो व:पितरो घोराय नमो व:पितरो मन्यवे नमो व:पितर:पितरो नमो वो गृहाण मम पूजा पितरो दत्त सतो व:सर्व पितरो नमो नम:।फिर ब्राह्मण एवं गरीबों को भोजन कराकर दक्षिणा देकर विदा करने का विधान है। चूंकि कोरोना काल में भीड़ एकत्र करना उचित नहीं होगा, इसलिए अनाज और दक्षिणा देकर ही काम चलाना उपयुक्त होगा। यदि ब्राह्मण या जरूरतमंद को वस्त्रादि दें तो और अच्छा रहेगा।

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