दत्तात्रेय की तपस्थली में भूतों ने एक रात में बनाया मंदिर

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दत्तात्रेय की तपस्थली में भूतों ने एक रात में बनाया मंदिर

Ghost built a temple in one night in Dattatreya’s Tapobhoomi :  दत्तात्रेय की तपस्थली में भूतों ने एक रात में बनाया मंदिर। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के सिंभावली क्षेत्र के दत्तियाना गांव में इस मंदिर के साथ कई किंवदंतियां जुड़ी हैं। पुजारी और ग्रामीणों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण भूतों ने किया था। सोते समय लोगों ने खाली भूमि देखी थी, सुबह वहां मंदिर था। अतः मान्यता है कि भूतों ने उसे रात भर में बनाया। सुबह मुर्गे की बांग के साथ वे चले गए। उस समय मंदिर के शिखर का काम अधूरा रह गया था, जिसे राजा नैन सिंह ने पूरा कराया। मात्र ईंटों से निर्मित यह लाल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। महान शिव भक्त ऋषि दत्तात्रेय की तपस्थली होने के कारण यह श्रद्धालुओं के आकर्षण का बड़ा केंद्र है। भोलेनाथ यहां आने वालों की मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं।

आस्था और कला का केंद्र

यह मंदिर हिंदू और मुगल कलाकृति का मिला-जुला रूप प्रतीत होता है। मात्र ईंटों से तैयार इस मंदिर में उन्हें जोड़ने के लिए किसी सामग्री के प्रयोग का साक्ष्य ऊपर से नहीं दिखता है। उस जमाने में सीमेंट होता नहीं था। मिट्टी या चूना के प्रयोग का भी संकेत नहीं मिलता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो ईंटों को एक-दूसरे के ऊपर रख दिया गया है। उसके बाद भी सदियों से तेज धूप और बारिश को झेलते हुए मंदिर जीवंत प्रतीत होता है। इसकी निर्माण कला और भव्यता बरबस लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है। इसके निर्माण का समय किसी को ज्ञात नहीं है। मान्यता है कि सैकड़ों साल पहले बना था। भूतों द्वारा निर्माण की बात भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली चर्चा के आधार पर कही जाती है। मुख्य द्वार पर चारों प्रमुख धर्मों हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई के प्रतीक चिह्न हैं। इसका कारण भी निर्माण की तरह अस्पष्ट है।

मंदिर के प्रवेश द्वार पर अंकित दत्तात्रेय तपस्थली। परिसर में मंदिर के बारे में जानकारी देते पुजारी।
मंदिर के प्रवेश द्वार पर अंकित दत्तात्रेय तपस्थली। परिसर में मंदिर के बारे में जानकारी देते पुजारी।

विशिष्ट है मंदिर

दत्तात्रेय की तपस्थली में स्थित मंदिर निर्माण की तरह कई अन्य रहस्य से पूर्ण है। इसके 600 मीटर की परिधि में कभी प्राकृतिक आपदा का असर नहीं होता है। यहां तक की ओला वृष्टि के दौरान भी यह क्षेत्र अछूता रह जाता है। संभवतः यही कारण है कि बिना उचित देख-रेख के भी मंदिर की भव्यता बरकरार है। यह इलाके की शान माना जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां भलेनाथ का दर्शन करने और उनका अभिषेक करने आते हैं। लगातार बढ़ती भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यहां भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। सावन माह में भारी भीड़ उमड़ती है। दुखद यह है कि पौराणिक और ऐतिहासिक रहस्यों को समेटे यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र तो है लेकिन पुरातत्व विभाग या सरकार की नजर से दूर है। इसलिए उचित रखरखाव नहीं हो पा रहा है। पुजारी परिवार ही मंदिर की सेवा में लगा रहता है।

ऐसे पहुंचें

दिल्ली-मुरादाबाद सिंभावली के पास मुख्य मार्ग से करीब आठ किलोमीटर अंदर यह मंदिर स्थित है। हापुड़, गाजियाबाद, नोएडा या दिल्ली से टैक्सी से दतियाना गांव पहुंचा जा सकता है। यहां भूतों वाले मंदिर के रूप में यह विख्यात है। मंदिर के पुजारी राकेश स्वामी ने बताया कि सावन और फागुन में मंदिर में जलाभिषेक का विशेष महत्व है। उस दौरान यहां आने वाले भक्तों की मनोकामना भोलेनाथ पूरे करते हैं। दत्तात्रेय की तपस्थली में भगवान शिव की साधना भी शीघ्र फलीभूत होती है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अजय त्यागी के अनुसार दूर से आने वाले शिव भक्तों के विश्राम या रात में रुकने की भी व्यवस्था की गई है। भीड़ के दौरान कमेटी के स्वयंसेवक व्यवस्था संभालते हैं।

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