गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से, मनोकामना पूर्ति का शानदार अवसर

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गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से, मनोकामना पूर्ति का शानदार अवसर
गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से, मनोकामना पूर्ति का शानदार अवसर।

Gupta Navratri from July 11, a great opportunity for fulfilment of wishes : गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से, मनोकामना पूर्ति का शानदार अवसर है। इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दें। इस दौरान यदि मंत्र सिद्ध करना चाहें तो कर सकते हैं। यदि मनोकामना पूर्ति के लिए अनुष्ठान करने का भी स्वर्णिम अवसर है। आध्यात्मिक शक्ति जगाने के लिए भी इसे अनुकूल समय माना जाता है। शारदीय नवरात्र में मां की पूजा और सप्तशती पाठ ही करना चाहिए। वह समय भक्ति के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। कई लोग उसी दौरान मनोकामना पूर्ति या मंत्र सिद्धि का भी प्रयास करते हैं। इसमें उन्हें सफलता भी मिलती है। क्योंकि देवी उपासना के लिए वह भी अत्यंत प्रभावी समय होता है। लेकिन विद्वानों के अनुसार उस समय भक्ति करने पर उसका प्रभाव साल भर रहता है। इसका फायदा अन्य अनुष्ठान और कार्यों में मिलता है।

सप्तशती या दस महाविद्या के मंत्र से कर सकते हैं अनुष्ठान

इस नवरात्र में यदि मनोकामना पूर्ति करना चाहते हैं तो सप्तशती के किसी मंत्र का जप करें। नियमित पूजा के बाद निश्चित संख्या में जप का शीघ्र फल मिलता है। चाहें तो दस महाविद्या में से किसी के भी मंत्र का अनुष्ठान कर सकते हैं। दस महाविद्या के हर रूप का विशिष्ट अर्थ है। मनोकामना के अनुसार उनका चुनाव कर मंत्र का निर्णय लें। वह भी अत्यंत प्रभावी है। गायत्री मंत्र का अनुष्ठान भी कल्याणकारी होता है। शाबर मंत्र को प्रयोग में लाने के लिए इस दौरान निश्चित संख्या में जप का तत्काल फल मिलने लगता है। जिस भी मंत्र का अनुष्ठान करें, उसकी जप संख्या, विधि, स्थान आदि पहले से तय कर लें। उपासना अवधि में पूरी तरह से सात्विक रहें। भोजन, बातचीत और आचरण में यह उतारना होगा। तभी पूर्ण सफलता मिल सकेगी।

अनुष्ठान करने पर अखंड ज्योति अवश्य जलाएं

गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से है। यदि अनुष्ठान करने जा रहे हैं तो अखंड ज्योति अवश्य जलाएं। यह अत्यंत शुभ और कल्याणकारी होता है। इससे अनुष्ठान का प्रभाव बढ़ता है। अखंड ज्योति जलाने का निर्णय करने से पहले कुछ बातों को जान लेना आवश्यक है। एक बार जलाने पर इसे पूरे नौ दिन तक जलाए रखें। ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करें कि ज्योति खंडित (थोड़े समय के लिए भी बुझना) नहीं हो। इसका बुझना अशुभ माना जाता है। जहां अखंड दीप जलाएं, उस स्थान या आसपास कोई न कोई हमेशा अवश्य मौजूद रहे। उसमें घी स्वयं साधक ही डाले। अखंड ज्योति को देखकर आप साधना की सफलता का भी अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं। यदि दीपक सही तरीके से जल रहा हो, उसकी रोशनी सोने की तरह हो और हर दिशा में समान रूप से फैली हो तो यह साधना के सही मार्ग पर चलने का प्रतीक है।

सौभाग्य व कल्याण का प्रतीक है अच्छा अखंड दीप

अखंड दीप का माता के समझ ठीक से जलना सौभाग्य का प्रतीक है। इससे साधना काल में आप पर नकारात्मक शक्तियां हावी नहीं हो सकेंगी। चित्त शांत रहेगा और आंतरिक प्रसन्नता का अनुभव करेंगे। अर्थात मां की कृपा आप पर बनी हुई है। इसका अर्थ है कि सारी बाधाएं दूर होंगी। आप अपने लक्ष्य को पा लेंगे। परिवार में लोगों का स्वास्थ्य और जीवन अच्छा रहेगा। घर में किसी बाहरी प्रकोप का असर नहीं हो सकेगा। अतः याद रखें कि गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से है। उसमें कोई भी अनुष्ठान आपके जीवन में चार चांद लगा सकता है। अनुष्ठान से पूर्व मंत्र, विधि आदि के बारे में किसी योग्य पंडित से सलाह अवश्य ले लें।

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