हनुमान चालीसा में छुपा है हर समस्या का हल

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हनुमान चालीसा में छुपा है हर समस्या का हल
हनुमान चालीसा में छुपा है हर समस्या का हल।

Hanuman Chalisa has hidden in every problem : हनुमान चालीसा में छुपा है हर समस्या का हल। सही तरीके से उपयोग करें तो निश्चित और मनचाहा फल मिलेगा। अधिकतर लोग इसका तरीका नहीं जानते हैं। उनकी शिकायत रहती है कि रोज पाठ करने पर भी फल नहीं मिलता। ऐसे लोगों को पता ही नहीं रहता कि क्या पाठ कर रहे हैं। उसका अर्थ क्या है और भाव क्या? पूछिए तो जवाब होगा कि वे भक्ति करते हैं। हनुमान जी से कृपा और आशीर्वाद मांगते हैं। जब भाव और प्रार्थना ही स्पष्ट नहीं, तो फल कैसे मिलेगा? कहा भी गया है कि देवता से पूरे भाव से की गई प्रार्थना ही सफल होती है। इसका ध्यान रखेंगे तो ही फल मिलेगा। हनुमान चालीसा का पाठ अमोघ है। नियमित पाठ करेंगे तो फल जरूर मिलेगा। वैसे भी हनुमान जी कलियुग के जाग्रत देवता हैं। भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

भाव के भूखे हैं भगवान

भगवान भाव के भूखे होते हैं। पूजा-पाठ, जप, स्तोत्र आदि में जब तक भाव की जानकारी न हो पूरे फल की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। इसी कारण पहले के मंत्र तत्कालीन बोल-चाल की भाषा संस्कृत में होते थे। बाद में समय-समय पर इनमें बदलाव होता गया। दुर्भाग्य से हाल के वर्षों में इस दिशा में काम लगभग ठप है। इसका प्रमुख कारण इस क्षेत्र से लोगों की दूरी है। संस्कृत की जानकारी के अभाव में लोग भाव से दूर होने लगे। धार्मिक अनुष्ठान मशीनी अंदाज में होने लगा। बिना भाव के पूजा-पाठ और जप-अनुष्ठान का फल भी कम होने लगा। परिणामस्वरूप लोग इसे पाखंड और अंधविश्वास करार देने लगे। जबकि कमी उनमें थी। हनुमान चालीसा में छुपा है हर समस्या का हल। जरूरत है भाव के साथ पाठ की।

पूजा-अनुष्ठान में आडंबर की जगह नहीं

पूजा-पाठ, जप-अनुष्ठान में आडंबर की कोई जगह नहीं है। दुर्भाग्य से प्राचीन मूल ग्रंथों और संस्कृत भाषा जानने वालों की कमी से मूल तरीका लगभग लुप्त हो गया है। पूरा करने और कराने वाले आडंबर की चकाचौंध में फंस गए हैं। भाव की जगह दिखावे का चलन हो गया है। ऐसे में फल की उम्मीद भी बेकार है। इसके लिए पंडित भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। ज्ञान की कमी के कारण लोगों को समझाना तो दूर उन्हीं की दिशा में बह चले हैं। वर्तमान में लोगों को समझने लायक भाषा में ऐसे साहित्य को लाने का काम रुक सा गया है। ठगों का बोल-बाला हो गया। लोगों को प्रभावित करने के लिए अनुष्ठानों में आडंबर भर दिया गया।

सहज और सरल है हनुमान चालीसा, भाव पर दें जोर

हनुमान चालीसा सहज और सरल है। थोड़ा ध्यान देने पर उसके भाव को समझा जा सकता है। यदि इसका नियमित पाठ करते हैं तो पहले इसके अर्थ को समझ लें। कुछ दिन अलग से इस पर ध्यान दें। इसके बाद पाठ शुरू करें। पाठ के दौरान शब्द के साथ-साथ उसके भाव पर भी ध्यान दें। निश्चय ही कुछ ही दिनों में आपको फल भी मिलने लगेगा। आज की स्थिति में हनुमान जी अत्यंत प्रभावी हैं और हनुमान चालीसा उन्हें प्रसन्न करने का सशक्त माध्यम। भाव के साथ इसका नियमित पाठ बड़ी से बड़ी कामना पूरी करने में सक्षम है। यकीन मानिए कि प्रार्थना, मंत्र, श्लोक कभी निरर्थक नहीं होते हैं। हां, पूरा फल तभी मिलेगा जब मतलब भी पता हो। पाठ में शब्दों के साथ मन में भाव भी चलता रहे। मनचाहा फल निश्चित मिलेगा। विश्वास रखें कि हनुमान चालीसा में छुपा है हर समस्या का हल।

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