बेहतर जीवन चाहिए तो सूर्योदय से पहले करें स्नान

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suryoday ke samay snan

For Better Life take bath before Sun rise : बेहतर जीवन चाहिए तो सूर्योदय से पहले स्नान करने की आदत डाल लें। यह आध्यात्मिक रूप से आवश्यक है ही स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम है। भौतिकवादी युग में व्यस्त जीवनशैली के कारण लोगों के नित्यकर्म का समय अस्त-व्यस्त हो गया है। इसका कुपरिणाम भी उन्हें भोगना पड़ता है। पहले सभी लोग सूर्योदय से पहले स्नान करते थे। अब देर से करते हैं। इसका कुप्रभाव भी पड़ता है। देर से स्नान करने वाले की दिनचर्या देर से शुरू होती है। परिणामस्वरूप उनके पास दैनिक काम का समय कम रहता है। वह दिनभर भागदौड़ में फंसा अस्त-व्यस्त रहता है।

शास्त्रों में स्नान का समय तय

शास्त्रों में हर वर्ग के लोगों के लिए स्नान का समय तय है। समय के आधार पर स्नान के फल तक का निर्धारण हैं। इसमें सूर्योदय से पहले के स्नान को बेहतर माना जाता है। स्नान में जितना विलंब होता है, उसे उतना ही खराब माना जाता है। देर से स्नान की निंदा की गई है। व्यस्तता और अनियमित जीवनचर्या के कारण सभी के लिए मानक के अनुरूप स्नान संभव नहीं है। ऐसे में यथासाध्य प्रातः स्नान की आदत डालें। धर्मशास्त्र में स्नान को समय के आधार पर चार भागों में बांटा गया है, जो निम्न हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में मुनि और पांच से छह के बीच देव स्नान

सुबह चार से पांच बजे के बीच किया जाने वाला स्नान मुनि स्नान कहा जाता है। यह सर्वोत्तम है। इस समय स्नान करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। मनुष्य में विद्या, बल, आरोग्य और चेतना का संचार होता है। बेहतर जीवन चाहिए तो इस स्नान को दिनचर्या में शामिल कर लें। प्रातः पांच से छह बजे के बीच किए जाने वाले स्नान को देव स्नान कहते हैं। यह उत्तम माना जाता है। इससे जीवन में यश, धन, वैभव, सुख, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। 

प्रातः छह से आठ तक मानव और फिर राक्षसी स्नान

प्रातः छह से आठ बजे के बीच के स्नान को मानव स्नान कहा जाता है। यह सामान्य श्रेणी का माना जाता है। इससे काम में सफलता मिलती है। भाग्य और अच्छे कर्मों से परिवार में एकता बनी रहती है। जीवन मंगलमय रहता है। अच्छे स्नान के रूप में यह सीमा है। इसके बाद का स्नान अच्छा नहीं माना जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार सुबह आठ बजे के बाद स्नान को निषिद्ध माना गया है। इसी कारण उसे राक्षसी स्नान कहा जाता है। इस समय स्नान करने वाले के जीवन में दरिद्रता, हानि, क्लेश और परेशानी बनी रहती है। अतः बेहतर जीवन चाहिए तो राक्षसी स्नान छोड़कर ऊपर का कोई स्नान करें।

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