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कलियुग में नाम जप का महात्म्य जानें

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Importance of chanting God’s name in Kaliyuga : कलियुग में नाम जप का महात्म्य जानें। यह सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। जप के लिए नाम योग्य गुरु से लेना श्रेष्ठ कर होता है। ऐसा करने से मनुष्य का हर तरह से कल्याण होता है। इसके महत्व को समझने के लिए एक प्रसंग को देखें। देवर्षि नारद ने ब्रह्मा जी से पूछा कि कृपया कलिकाल के जाल से मुक्त रहने का उपाय बताएं। ब्रह्मा जी ने जवाब दिया- आदिपुरुषस्य नारायणस्य नामोच्चारणमात्रेण निर्धूत कलिर्भवति। अर्थात- आदि पुरुष भगवान नारायण के नामोच्चार मात्र से ही मनुष्य कलियुग के प्रभाव से मुक्त हो जाता है। कई ऋषियों ने भी भगवन्नाम जप का महत्व बताया है। उनकी मान्यता है कि सिर्फ इसी से जीवन के लक्ष्य को पाया जा सकता है। भगवान राम के बारे में तो यहां तक कहा जाता है कि राम से बड़ा राम का नाम।

इससे बढ़कर कोई साधना नहीं

संत तुकाराम जी ने कहा है कि नाम जप से बड़ी कोई साधना नहीं है। उन्होंने तो यहां तक कहा कि आप चाहे जो भी कर रहे हों, भगवान के नाम का जप अवश्य करते रहें। सिर्फ निष्ठा से नाम जप करें तो और कुछ भी करने की जरूरत ही नहीं है। प्राचीन काल में देवर्षि नारद, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, पवनपुत्र हनुमान, जटायु, शबरी इसी श्रेणी के थे। मध्य युग में चैतन्य महाप्रभु, मीरा, तुलसीदास, सूरदास, रैदास आदि इसी श्रेणी के विभूति थे। उन्होंने नाम जप कर परमपद को प्राप्त किया। कई ऋषि-मुनियों ने भी इस मार्ग का अनुसरण किया।

भक्ति योग का चरम है नाम जप

कलियुग में नाम जप का बहुत अधिक महत्व है। यह एक तरह से भक्ति योग का चरम है। चरम इसलिए क्योंकि भक्ति में भक्त और भगवान के बीच सिर्फ भावना होती है। नाम जप में भावना के साथ नामों की संख्या बढ़ती जाती है। यह मंत्र जप की तरह लगातार भक्त के स्तर को ऊपर उठाता रहता है। उनकी आंतरिक शक्ति भी लगातार विकसित होती रहती है। इस श्रेणी के संतों ने नाम जप में खुद को इस तरह से रमा लिया था कि उन्हें अपना भी होश नहीं रहता था। प्रभु की भक्ति में लीन होकर उन्होंने एक तरह से खुद को उनके साथ एकाकार कर लिया था। यही कारण है कि भक्त वत्सल भगवान उनके लिए खुद उपस्थित रहते थे। उनके सारे काम करते थे। उन्हें हर बाधाओं और खतरों से बचाते थे।

इस तरह काम करता है जप

नाम जप की महिमा अपरंपार है। जो लोग इसका नित्य जप करते हैं, उनके शारीरिक व मानसिक विकार दूर होने लगते हैं। अन्य उपयोगी मंत्रों की तरह उन्हें इसमें भी उसी तरह का फायदा मिलेन लगता है। उनमें दैवीय गुण विकसित होने लगाते हैं। जप करने वाले का आत्मिक बल बढ़ता जाता है। उसमें सौम्यता आने लगती है। चित्त-वृत्तियां शांत होने लगती हैं। नाम जप को भुक्ति और मुक्ति दोनों देने वाला माना गया है। उसकी सोई हुई चेतना तो जगने लगती ही है, सांसारिक सुख भी सहज ही मिलने लगते हैं। उम्मीद है कि आपने कलियुग में नाम जप के महात्म्य को समझ लिया होगा।

नोट- हर तरह के मंत्रों के जप के लिए माला के महत्व पर पढ़ें कल। जप करने वालों के लिए यह बेहद उपयोगी जानकारी होगी।

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