हवन से जुड़ी कुछ आवश्यक बातें जानें

177
हवन से जुड़ी कुछ आवश्यक बातें जानें
हवन से जुड़ी कुछ आवश्यक बातें जानें।

Know some important things related to Havan : हवन से जुड़ी कुछ आवश्यक बातें जानें। पिछले अंक में आपने हवन कुंड और उससे जुड़े नियमों के बारे में जाना। हवन के बिना कोई भी मंत्र जप और अनुष्ठान का पूरा फल नहीं मिलता है। हवन का महत्व वेदों में भी वर्णित है। इसलिए अध्यात्म, विशेष रूप से कर्मकांड से जुड़े हर व्यक्ति को इसके बारे में जानना चाहिए। इसमें अग्निवास, समिधाएं, किस काम के लिए कौन सा हवन उपयुक्त और सावधानी के बारे में जानकारी दूंगा। इसमें सबसे पहले जानें अग्निवास विचार के बारे में।

अग्निवास का विचार

धर्मग्रंथों के अनुसार अग्नि तिथि वार कभी पृथ्वी, तो कभी आकाश तो कभी पाताल लोक में होता है। हवन शुरू करने से पहले इसके वास का विचार अवश्य कर लें। चूंकि हवन पृथ्वी पर होता है। अतः उस दौरान यदि उसका वास पृथ्वी पर हो तो वह सुख प्रदान करता है। आकाश या पाताल में अग्नि के वास के दौरान हवन करना उपयुक्त नहीं होता है। मनोकामना भले पूरी हो लेकिन आकाश में अग्नि होने पर हवन करने से शारीरिक कष्ट होता है। इसी तरह पाताल में अग्नि होने पर हवन करने स धन हानि का खतरा रहता है। इसलिए कहा गया है कि किसी भी तरह के हवन से पूर्व अग्निवास अवश्य देख लें। यह भी सुनिश्चित करें कि उस दौरान अग्नि पृथ्वी पर हो।

समिधाओं के बारे में जानें

हवन से जुड़ी कुछ आवश्यक बातों में समिधा (लकड़ी) का विशेष महत्व है। विभिन्न वृक्षों की लकड़ी के प्रयोग का अलग-अलग फल है। सूर्य की शांति मदार की समिधा से हवन करें। बृहस्पति की शांति के लिए पीपल और चंद्रमा के लिए पलाश की समिधा उपयुक्त है। मंगल खैर, बुध चिड़चिड़ा, शुक्र गूलर, शनि शमी, राहु दूर्वा और केतु की शांति के लिए कुश से हवन करें। देवताओं की प्रसन्नता के लिए पलाश की समिधा का उपयोग करें। मदार की लकड़ी से रोग नाश, पलास या कुश से सर्व कार्य सिद्धि और दूर्वा से दीर्घायु लाभ होता है। संकट नाश के लिए हवन के माध्यम से नवग्रह की शांति कराएं। ऋतुओं के अनुसार भी लकड़ी के प्रयोग का प्रावधान है। वसंत ऋतु में शमी, गर्मी में पीपल, वर्षा में ढाक या बिल्व, शरद में पाकर या आम, हेमंत में खैर, शिशिर में गूलर या बड़ की समिधा उपयुक्त है।

यह भी पढ़ें- हर समस्या का है समाधान, हमसे करें संपर्क

हवन सामग्री और उसकी प्रयोग विधि

अलग-अलग कामना के लिए भिन्न सामग्री का प्रावधान है। सामान्य रूप से तिल, जो, चावल, सफेद चंदन, अगर, तगर, गुग्गुल, जायफल, दालचीनी, लौंग इलायची, गोला, छुहारे, कपूर, आंवला, गिलोय, किशमिश, काली मिर्च, सरसों, शहद, लावा आदि का अधिक प्रयोग किया जाता है। कामना विशेष के बारे में अलग-अलग लेखों में जानकारी दे चुका हूं। यहां विभिन्न रोगों से मुक्ति के लिए सामग्री की जानकारी दे रहा हूं। पहले यह विधि काफी प्रचलित थी। अब यह ज्ञान लुप्त प्राय है। सर दर्द समेत अन्य समस्या के लिए ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जटामांसी, अगर, शहद, कपूर और पीली सरसों से हवन करें। स्त्री रोग, वात, पित्त, बुखार से मुक्ति के लिए श्योनक, अदरक, जायफल, निर्गुंडी, कटेरी, गिलोय, इलायची, चीनी, घी, शहद, सेमल और शीशम से हवन करें। हवन से जुड़ी कुछ आवश्यक बातों का ध्यान रखकर अपना व दूसरों का कल्याण कर सकते हैं।

उदर व श्वास रोग तथा कमजोरी में इन्हें आजमाएं

उदर एवं लीवर संबंधी परेशानी हो तो भृंगराज, आंवला, बेल, हरड़, अपामार्ग, गूलर, दूर्वा, गुग्गुल, घी और इलायची से हवन करें। श्वास संबंधी रोगों के लिए गिलोय, हरड़, वन तुलसी, काली मिर्च, अपामार्ग, खैर, अगर, तगर, दालचीनी, शहद, घी, अश्वगंधा, यूकेलिप्टस और आक से हवन करें। कमजोरी की समस्या हो, खासकर पौरुष शक्ति की कमी लगे तो सटीक उपाय है। बड़ी इलायची, गोला, लौंग, दालचीनी, तालीसपत्र, जायफल, गुग्गुल, मखाना, कपूर, पलाश, अश्वगंधा, सफेद चंदन का चूरा मिलाकर हवन करें। इससे निश्चय ही बीमारियों में लाभ मिलेगा। हर हवन में ध्यान रखें कि समिधाएं और सामग्रियां अच्छी स्थिति में हों। वे साफ जगह में रखी हों। सड़ी-घुनी, कीड़े-मकौड़े युक्त समिधा और सामग्री का प्रयोग नहीं करें। इससे लाभ के बदले हानि का खतरा रहता है।

इन बातों का भी रखें ध्यान

हवन कुंड में अग्नि अच्छी तरह से प्रज्ज्वलित हो। उसे ठीक से जलाने के लिए सामान्य स्थिति में मुंह से फूंक मारना, बाहरी से हवा देना, अग्नि को हिलाना-डुलाना वर्जित है। कुंड में सबसे अधिक प्रज्ज्वलित भाग ही अग्निदेव का मुख कहलाता है। उसी स्थान पर आहुति दें। ऐसा नहीं करने पर परेशानी होती है। कम जलने वाले भाग में आहुति डालने में नेत्र संबंधी समस्या का खतरा रहता है। जहां अधिक धुंआ हो, वहां आहुति देने पर मानसिक संताप होता है। जिस भाग में अंगारा अधिक दिखे, उसमें आहुति डालने पर धन नाश होता है। जहां समिधा की अधिकता हो, उस पर आहुति देने से कई प्रकार के रोग घेर लेते हैं। आशा करता हूं कि हवन से जुड़ी कुछ आवश्यक बातों को आपने समझ लिया होगा।

यह भी पढ़ें- संक्षिप्त हवन विधि से बिना पंडित के खुद करें हवन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here