ब्रह्म मुहूर्त में उठने से क्या मिलता है लाभ जानें

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ऐसे समझें ग्रहों और तत्वों का असंतुलन
ऐसे समझें ग्रहों और तत्वों का असंतुलन।

Know the benefits of getting up in Braham Muhurta : ब्रह्म मुहूर्त में उठने से क्या मिलता है लाभ जानें। शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त को अत्यंत शुभ और विशेष माना गया है। सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घंटे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। अर्थात प्रातः लगभग चार से लेकर साढ़े पांच बजे तक का समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। इसी समय में जग जाना चाहिए। ऋषि-मुनियों ने इसका विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग कर उठने के लिए सर्वोत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार अपना भला चाहने वाले को इस समय नहीं सोना चाहिए। आइए जानते हैं कि प्राचीन ग्रंथों और कथाओं में ब्रह्म मुहूर्त को लेकर क्या कहा गया है। इसकी महिमा का किस तरह बखान किया गया है।

पहले वाल्मीकि रामायण से

वाल्मीकि रामायण में ब्रह्म मुहूर्त के महत्व को लेकर सुंदर प्रसंग है। संकट मोचक हनुमान जी ब्रह्म मुहूर्त में लंका स्थित अशोक वाटिका पहुंचे। वहां उन्होंने माता सीता को वेद मंत्र का पाठ कर सुनाया। इसी दौरान उन्होंने शास्त्र में वर्णित श्लोक सुनाया।

वर्णं कीर्तिं मतिं लक्ष्मीं स्वास्थ्यमायुश्च विदंति।

ब्राह्मे मुहूर्ते संजाग्रच्छि वा पंकज यथा॥

अर्थात- ब्रह्म मुहूर्त में उठने से व्यक्ति को सुंदरता, लक्ष्मी, बुद्धि, स्वास्थ्य, आयु आदि की प्राप्ति होती है। ऐसा करने से शरीर कमल की तरह सुंदर हो जाता है। वास्तव में इस समय का प्रकृति से भी सीधा संबंध है। आप नजर डालें तो पाएंगे कि इसी समय पशु-पक्षी भी जागते हैं। उनका मधुर कलरव शुरू हो जाता है। कमल के फूल खिल उठते हैं। मुर्गे बांग देने लगते हैं। पूर्व की तरफ लालिमा फैलने लगती है। मानो प्रकृति संदेश देती है कि निद्रा का त्‍याग करके उठो और दैनिक कार्यों में लग जाओ।

ब्रह्म मुहूर्त की वायु को अमृत तुल्य मानता है आयुर्वेद

ब्रह्म मुहूर्त में उठने का महत्व आयुर्वेद भी मानता है। वह उस समय की वायु को अमृत तुल्य कहता है। उसके अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर टहलने से शरीर में संजीवनी शक्ति का संचार होता है। शास्त्रों में यह समय अध्ययन के लिए भी सर्वोत्तम बताया गया है। रात को पूर्ण विश्राम करने के बाद ब्रह्म मुहूर्त में जब हम उठते हैं तो प्रकृति भी शांत और सुंदर रहती है। शरीर तथा मस्तिष्क में स्फूर्ति व ताजगी रहती है। इस समय की पढ़ाई मानस पर अपेक्षाकृत कम समय में अंकित होती है और उसकी याद अधिक समय तक बनी रहती है। टहलने, व्यायाम करने और अध्ययन करने के साथ ही ब्रह्म मुहूर्त योग, ध्यान और किसी भी तरह की साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होता है। यदि मनुष्य हर रोज इस शुभ घड़ी में जागना शुरू करें तो निश्चय की चमत्कारिक परिणाम मिलेंगे।

वास्‍तु शास्त्र में भी बताया गया है महत्व

नित्य ब्रह्म मुहूर्त में उठने का महत्व वास्तु शास्त्र में भी बताया गया है। उसके अनुसार भी इस समय प्रकृति में सकारात्मक शक्तियों का संचार अधिक होता है। दरवाजे-खिड़कियां खुली रखने तथा घर के लोगों के बाहर निकलने से सकारात्मक शक्ति शरीर और मन में ऊर्जा भर देती है। इस समय अच्छे और प्रभावी विचार आते हैं। उन्हें कार्य रूप देने की अच्छी योजना बन सकती है। इस सकारात्मक शक्ति के साथ जब हम कोई काम करते हैं तो उसमें सफलता की संभावना अधिक रहती है। शास्त्रों के साथ ही चिकित्सा विज्ञान भी मानने लगा है कि इस समय मानसिक शक्ति अधिक जाग्रत रहती है। किसी भी पाठ को याद करने का यह सर्वोत्तम समय होता है। विघ्न-बाधा सबसे कम आती है। मस्तिष्क और वातावरण शांत रहता है।

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