बिना जन्मकुंडली व पंडित के जानें ग्रहों की स्थिति, खुद करें सुधार

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सर्वार्थ सिद्धि योग में पाएं मनचाही सफलता
सर्वार्थ सिद्धि योग में पाएं मनचाही सफलता

Know your planets position without horoscope : बिना जन्मकुंडली व पंडित के जानें ग्रहों की स्थिति। इसके साथ ही हालात देखकर उनमें खुद करें सुधार के उपाय। जिनके पास जन्मकुंडली नहीं है, वे परेशान न हों। मैं उनके लिए सुखी जीवन जीने का आसान तरीका लेकर आया हूं। जन्मकुंडली नहीं होने पर ज्योतिषी लक्षण के आधार पर ग्रह शांति के उपाय बताने के लिए मोटी रकम मांगते हैं। इस लेख की मदद से लोग खुद अपनी समस्या दूर कर सकेंगे।

ऐसे शांत करें ग्रहों को

आप चिंता ना करें। जीवन में आने वाले हर कष्टों को दूर करने के लिए बहुत सस्ते उपाय द्वारा ग्रह दोष से उत्पन्न रोग व बाधाएं और उसके निवारण के लिए अचूक टोटके और उपाय की जानकारी यहां प्रस्तुत है। इसे हर व्यक्ति आसानी से कर सकता है।

प्रतिकूल सूर्य के प्रभाव व उपाय

अगर आपको पेट, आँख और हृदय रोग के लक्षण दिखाई पड़े। इसके साथ ही सरकारी कार्य में बाधा आने लगे, पिता या किसी गुरुजन से मनमुटाव हो, मुंह में बार-बार बलगम इकट्ठा होता हो तथा बोलते समय मुंह से थूक उड़ता है तो आप निश्चय मानें कि आपका सूर्य अशुभ है।
उपाय : ऐसे स्थिति में तांबा, गेहूं एवं गुड़ का दान करें। प्रत्येक कार्य का प्रारंभ मीठा खाकर करें। तांबे के एक टुकड़े को काटकर उसके दो भाग करें। एक को पानी में बहा दें तथा दूसरे को जीवन भर साथ रखें।

चंद्रमा अशुभ हो तो

यदि आपके घर में दूध देने वाले पशु की मृत्यु हो जाए। स्मरण शक्ति कमजोर होने लगे, घर में बार-बार पानी की कमी समस्या होती है या नलकूप, कुएं आदि सूख जाते हैं। माता को किसी भी प्रकार का कष्ट हो, मानसिक बैचेनी और सर्दी बनी रहती हो और  मन में नकारात्मक विचार बार-बार आते रहते हों तो समझिए कि कुंडली में चंद्रमा अशुभ है। इस तरह आप बिना जन्मकुंडली व पंडित के खुद जान सकते हैं ग्रहों की स्थिति।
उपाय : दो मोती या दो चाँदी का टुकड़ा लेकर एक पानी में बहा दें तथा दूसरे को अपने पास रखें। कुंडली के छठवें भाव में चंद्र हो तो दूध या पानी का दान करना मना है। यदि चंद्र बारहवें स्थान पर हो तो साधु-संतों को भोजन न कराएं और ना ही दूध पिलाएं।

(जारी। कल पढ़ें- अशुभ ग्रहों से परेशान न हों, ऐसे करें उपाय। इसमें मंगल, बुध और बृहस्पति को अनुकूल करने के उपाय बताए जाएंगे।)

-आचार्य वैकुंठनाथ झा

 

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