वाल्मीकि रामायण में लिखा है लंका का सबसे सटीक हवाई मार्ग

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वाल्मीकि रामायण में लिखा है लंका का सबसे सटीक हवाई मार्ग
वाल्मीकि रामायण में लिखा है लंका का सबसे सटीक हवाई मार्ग।

काल्पनिक नहीं, सही घटना का लेखा-जोखा है रामायण

The most accurate air route of Lanka is in Valmiki Ramayana : वाल्मीकि रामायण में लिखा है लंका का सबसे सटीक हवाई मार्ग। कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी को रामायण को मात्र कथा करार देते हैं। इसकी देखा-देखी कई युवा भी भ्रमित हो रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए वाल्मीकि रामायण आईना है। इसमें वे सत्य को देख और समझ सकते हैं। चाहे तो स्वयं परख भी सकते हैं। ईसा के जन्म से हजारों वर्ष पूर्व जब विश्व भर में विकास की किरणें नहीं पहुंची थीं। लोग हवाई यात्रा की कल्पना भी नहीं कर पाते थे। आने-जाने का मुख्य साधन पैदल, घोड़े, हाथी, रथ आदि थे। मार्ग के नाम पर भी कुछ भी नहीं था। जंगलों से होकर लोग भारी जोखिम लेकर यात्रा करते थे। तब महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में पुष्पक विमान से हवाई यात्रा की सटीक जानकारी दी। इसके कई ठोस साक्ष्य भी उपलब्ध हैं।

पैदल यात्रा के युग में हवाई मार्ग की जानकारी विस्मयकारी

वाल्मीकि रामायण में सीता अपहरण के दौरान पुष्पक विमान के मार्ग की सटीक जानकारी दी गई है। आज के युग में उसे गूगल मैप पर देखकर आसानी से समझा जा सकता है। हजारों साल पहले महर्षि वाल्मीकि के युग में इसकी कल्पना भी संभव नहीं थी। मान्यता के अनुसार महर्षि ने दिव्य दृष्टि के बल पर भगवान राम के जन्म से पहले ही रामायण की रचना कर दी थी। आज भले ही लोग इसे अंधविश्वास कहें लेकिन जैसी सटीक जानकारी है, उसे झुठलाया नहीं जा सकता है। संत तुलसीदास जी ने भी रामचरित मानस में ऐसी ही जानकारी दी थी। उन्होंने करीब 500 साल पहले ही पृथ्वी से सूर्य की दूरी लिख दी थी- जुग सहस्र जोजन पर भानु। इसके सैकड़ों वर्षों बाद नासा ने इस दूरी का पता लगाया। चमत्कारिक पहलू यह है कि दोनों दूरी लगभग समान है।

पंचवटी से लंका का इस तरह बताया रास्ता

वाल्मीकि रामायण में लिखा है पंचवटी से लंका का हवाई मार्ग। रावण ने पंचवटी (नासिक, महाराष्ट्र) से माता सीता का हरण किया था। पुष्पक विमान से लेकर हम्पी (कर्नाटक) व लेपक्षी (आंध्र प्रदेश) होकर लंका पहुंचा था। यह पंचवटी से लंका का सबसे छोटा और सीधा हवाई मार्ग है। भगवान राम वनवास काल में माता सीता व लक्ष्मण के साथ पंचवटी में रह रहे थे। वहीं लक्ष्मण ने शूर्पनखा की नाक अर्थात नासिका काट दी थी। उसे ही हम नासिक (महाराष्ट्र) के नाम से जानते हैं। प्रसंग के अनुसार वहां से रावण जब माता को लेकर चला तो आगे ऋष्यमूक पर्वत (हम्पी, कर्नाटक) पर माता ने वानरों के समूह को देखा। राम को उन्हें ढूंढने में सहायता मिलेगी, यह सोचकर अपने वस्त्र के कोर फाड़कर उसमें अपने कंगन बांधकर नीचे फेंक दिए थे। आगे जटायू ने जहां रावण को रोककर युद्ध किया था, वही स्थान लेपक्षी (आंध्र प्रदेश) है।

पूर्णतः वैज्ञानिक है यह मार्ग

यह हवाई मार्ग पूर्णतः वैज्ञानिक है। गूगल मैप से कोई भी इसकी पुष्टि कर सकता है। मानचित्र पर नासिक से लंका की सीधी रेखा खींचे तो पहली नजर में ही बीच में क्रमशः कर्नाटक और आंध्र प्रदेश का कुछ हिस्सा नजर आता है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि रामायण मात्र पौराणिक कथा नहीं भारत के ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति और जीवन का अभिन्न अंग है। यह त्रिकालदर्शी महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया सत्य इतिहास है। जिसके सारे वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। आवश्यकता है उसके सही शोध की। तब सिद्ध हो जाएगा कि जब विश्व के बाकी देश सभ्यता की किरणों से कोसों दूर थे, जगत गुरु भारत तब ज्ञान-विज्ञान से परिपूर्ण था।

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