पंच तत्व से ही जुड़ा है ज्योतिष और कर्मकांड

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अक्षय तृतीया तीन मई को
अक्षय तृतीया तीन मई को।

Astrology and rituals are related to the five elements : पंच तत्व से ही जुड़ा है ज्योतिष और कर्मकांड। पहले के लेखों में मैंने पंच तत्व के बारे में लिखा था। फिर भी याद दिलाने के लिए बता दूं कि सृष्टि ही नहीं, प्रकृति में भी भूमि, जल, पवन, अग्नि और आकाश ही व्याप्त है। सभी जीव-जंतु और वस्तुओं में विकास क्रम के अनुसार इनका ही अंश होता है। योग में इनका संतुलन बहुत बड़ा लक्ष्य माना जाता है। कुंडलिनी जागृति इसके बिना संभव ही नहीं है। ज्योतिष में बताए सभी ग्रह भी पंच तत्वों से सीधे जुड़े हैं और उससे प्रभावित होते एवं उसे करते हैं। कर्मकांड में सर्वाधिक महत्वपूर्ण पंच देवता वास्तव में पंच तत्व के देवता हैं। पंच तत्व का हर तत्व मनुष्य के गुण, स्वभाव, विशेषता, कमी, भाग्य का कारण बनता है। रोग, शोक एवं प्रसन्नता में भी इन तत्वों की निर्णायक भूमिका होती है।

जीवन की हर समस्या का समाधान पंच तत्व में निहित

जीवन की हर समस्या का समाधान पंच तत्व में निहित है। रोगों से घिरे हों या समस्याएं पीछा नहीं छोड़ रही हैं। परिश्रम का फल नहीं मिल पा रहा है तो चिंता नहीं करें। पंच तत्व को संतुलित कर मनचाहा जीवन पा सकते हैं। यह प्रक्रिया भी सरल है। पंच तत्व के संतुलन की कई विधियां हैं। घर की दीवारों, अंदर रखें समान, पहनने वाले वस्त्रों आदि में रंगों का संयोजन, मकान की बनावट, मुद्राएं, तत्व के एक अक्षर वाले मंत्र, ग्रह, नक्षत्र, राशि, देवी-देवता सब इसी से जुड़े हैं। इनमें से कोई भी एक विधि अपना कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। यदि समस्या गंभीर हो और शीघ्र हल चाहते हों तो विधियों के समन्वय से मनचाहा लक्ष्य पा सकते हैं। ज्योतिष और कर्मकांड भी इसी का एक रूप है। योग में इसका अत्यधिक महत्व है।

वास्तु शास्त्र का भी आधार है पंच तत्व

वास्तु शास्त्र भी पंच तत्व से ही जुड़ा है। भवन निर्माण एवं रखरखाव पूरी तरह से पंच तत्व से ही जुड़ा है। इसमें भूमि, जल, वायु, अग्नि एवं आकाश अर्थात पांचों तत्व समाहित हैं। भारतीय ही नहीं विदेशी पद्धति में भी थोड़े फेरबदल के साथ इसे महत्व दिया गया है। फेंगशुई में अवश्य बदले परिवेश के साथ कुछ नयापन है लेकिन मौलिक रूप से उनमें काफी समानता है। सभी में भूमि को आधार माना गया है। इसकी जांच और सुधार की विधि में थोड़ा ही अंतर है लेकिन मूल उद्देश्य संतुलन ही है। इस मामले में जहां चीनी, जापानी व पाश्चात्य पद्धित में रंग, सामग्री में फेरबदल एवं उनके संयोजन पर जोर दिया जाता है, वहीं भारतीय पद्धति उन उपायों के साथ ही मुद्रा व मंत्र के साथ ग्रहों एवं देवताओं के माध्यम से भी स्थिति को अनुकूल बनाने का विकल्प देती है।

रंगों का संयोजन

संतुलन के उपाय की विधियों के क्रम में प्रारंभ रंगों से। पृथ्वी तत्व का रंग पीला है। जल का सफेद और वायु तत्व का नीला या भूरा रंग माना जाता है। अग्नि तत्व का रंग लाल एवं आकाश का रंग काला (अंधकार) है। भारत में चूंकि चीनी पद्धति फेंगशुई भी काफी प्रचलन में आ गई है। मेरा अनुभव है कि भारतीय पद्धति इस मामले में अधिक गहराई लिये हुए है। फेंगशुई का जोर भौतिक सुख पर अधिक है। मेरा अनुभव है कि भौतिक आवश्यकता की पूर्ति में वह भी काफी उपयोगी है। अतः थोड़ी चर्चा उसके बारे में भी। चीनी पद्धति के अनुसार पृथ्वी और अग्नि तत्व का रंग समान है। जल तत्व को उसमें काला या नीला बताया गया है। उसमें वायु और आकाश तत्व के बदले काष्ठ और धातु तत्व का समावेश किया गया है। काष्ठ अर्थात पेड़-पौधे जिसका रंग हरा है। धातु का रंग सफेद है।

क्रमशः (अगले अंक में पढ़ें कि रंगों से कैसे दूर होती है समस्याएं)

यह भी पढ़ें- वास्तु और ग्रहों के संतुलन से एक-दूसरे की कमी दूर करें

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