चित्रकूट की पावन भूमि की ओर, सपना पूरा हुआ

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चित्रकूट की पावन भूमि की ओर, सपना पूरा हुआ
चित्रकूट की पावन भूमि।

Chitrakoot : चित्रकूट की पावन भूमि बचपन से मेरे लिए सपने की भूमि रही है। मैहर के बाद हमें चित्रकूट की पावन भूमि की ओर प्रस्थान करना था। सबमें राम-सीता और लक्ष्मण से जुड़े उस स्थान पर पहुंचने का उत्साह था। उस समय एक मेला स्पेशल चित्रकूट के लिए नौ बजे जाती थी। मैहर से उसकी दूरी लगभग सवा सौ किलोमीटर है। सो हम टिकट लेकर स्टेशन पर पहुंच गए। सुखद बात यह कि ट्रेन ठीक समय पर आई और चल दी। उससे भी सुखद यह कि लगभग पूरी ट्रेन खाली थी। हम अपनी मर्जी के हिसाब से डिब्बा और सीट का चुनाव कर सकते थे। हम ऐसे डिब्बे में घुस गए जिसमें हमारे अलावा कोई यात्री नहीं था। तकलीफ यह हुई कि पूरे रास्ते एक कप चाय नसीब नहीं हुई।

चित्रकूट धाम कर्वी स्टेशन पहुंचे

यात्रा पूरी हुई और हम चित्रकूट धाम कर्वी स्टेशन पर उतरे। यहाँ से चित्रकूट धाम दूर है। लगभग छह-सात किलोमीटर दूर तो होगा। रेलवे स्टेशन कर्वी में है जो कि एक अल्पज्ञात स्थान है। चित्रकूट धाम का नाम जुड़ जाने से कर्वी भी प्रसिद्ध हो गया है। बाहर निकलते ही आटो वालों के झुंड ने हमें कब्जाने के लिए हमला किया। रामघाट तक जाने और होटल दिखा देने के नाम पर बात तय हुई। हम कुछ देर में टूटी-फूटी सड़कों से होते हुए रामघाट पहुंच गए।

यहां होटल तलाशने में जो कठिनाई हुई, वह आशा के विपरीत थी। मुझे अंदाजा नहीं था कि चित्रकूट की पावन भूमि में होटल मिलने में दिक्कत आएगी। पहले रामघाट पर स्थित कामदगिरि भवन में कमरा मिल जाने की उम्मीद थी। कामदगिरि एक अच्छा और उचित दर का ट्रस्ट आधारित होटल है। मुझे नेट से इसी की जानकारी मिली थी किंतु इसकी ऑनलाइन बुकिंग नहीं थी। मौके पर कोई कमरा खाली नहीं मिला। मजबूरन एक होटल में ऊंची कीमत देकर हमने कमरा बुक किया। नहा-धोकर हम भोजन की तलाश में निकले। चित्रकूट की पावन भूमि में नाम के अनुरूप नजदीक ही एक शुद्ध शाकाहारी भोजनालय मिल गया।

कामदगिरि परिक्रमा

योजना के मुताबिक आज की शाम कामदगिरि परिक्रमा और रामघाट के दर्शन में निकालनी थी। कामदगिरि पर्वत पर श्रीराम ने वनवास की अवधि में निवास किया था। यह पर्वत पवित्र और दर्शनीय  है। कहा जाता है कि इसकी परिक्रमा से समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है। सात किलोमीटर की पदयात्रा निश्चित रूप से पर्वत के महत्त्व, स्वास्थ्य एवं सोच के लिए लाभदायक है। होटल के स्वागत कार्यालय से जानकारी मिली कि रामघाट (बिलकुल पास था) से ऑटो मिल जाएंगे। वही कामदगिरि मंदिर पर पहुंचा देगा। वहां से शेष यात्रा पैदल करनी होगी।

दो भागों में बंटा चित्रकूट

चित्रकूट की एक खास और विचित्र बात यह कि आधा चित्रकूट उत्तरप्रदेश और आधा मध्यप्रदेश में है। चित्रकूट के दर्शनीय स्थलों में भरतकूप को छोड़कर अधिकांश मध्य प्रदेश में पड़ते हैं। यहाँ तक कि कामदगिरि का परिक्रमापथ भी इस राजनीतिक बंटवारे का शिकार है। रामघाट के पास एक गंदा नाला है। उसके इस तरफ उत्तर प्रदेश के ऑटो मिलते हैं तो उस पार मध्यप्रदेश के। यह बात अलग है कि लाख सख्ती के बावजूद अपने देश का आदमी हर नियम-कानून की काट निकाल लेता है और कुछ नियम विरुद्ध करके अपनी आत्मा को संतुष्ट पाता है और ऑटो-टैक्सी वाले ऐसा खेल न खेलें, ऐसा कैसे हो सकता है? यह चित्रकूट की पावन भूमि पर व्यवस्था का धब्बा है।

(क्रमशः)

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