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स्वयंसिद्ध शाबर मंत्र के प्रयोग से हर समस्या होगी दूर

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संतान सुख और कर्ज मुक्ति के लिए करें प्रदोष व्रत
संतान सुख और कर्ज मुक्ति के लिए करें प्रदोष व्रत।

Swayamsiddh Sabar Mantra : स्वयंसिद्ध शाबर मंत्र के प्रयोग से हर समस्या होगी दूर। ये मंत्र जनकल्याण के लिए बनाए गए हैं। जनहित के कार्य में अत्यंत प्रभावी हैं। निजी हित में भी भरपूर उपयोगी हैं। आप हर समस्या दूर कर सकते हैं। ये जीवनस्तर को उठाने में भी कारगर हैं। ऐसे ही कुछ मंत्रों की जानकारी दे रहा हूं। ये दैनिक जीवन में बेहद उपयोगी हैं। इनका प्रयोग अत्यंत आसान है।

धन के लिए शिव की मंजू घोष साधना

मंत्र – अ र व च ल धीं

प्रयोग विधि : यदि लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे हों और बच निकलने का मार्ग न मिल रहा हो तो शिव के मंजू घोष रूप की उच्छिष्ट साधना करें। इससे आपको थोड़े दिनों में ही आर्थिक संकट से छुटकारा मिल जाएगा। खाना खाने के बाद जूठी थाली में बचे अन्न, दाल, सब्जी या पानी से उंगली के सहारे डमरू का आकार बनाएं। उस डमरू के ऊपर और नीचे उंगली से ही अ र व च ल धीं मंत्र लिखें। फिर उच्छिष्ट मुंह और हाथ लिये 108 बार इस मंत्र का जप करें। कुछ ही दिन में आर्थिक संकट से छुटकारा मिल जाएगा।

महालक्ष्मी मंत्र

मंत्र –राम-राम क्या करे, चीनी मेरा नाम। सर्वनगरी बस में करूं, मोहूं सारा गांव।राजा की बकरी करूं, नगरी करूं बिलाई। नीचा में ऊंचा करूं, सिद्ध गौरखनाथ का दुहाई।

प्रयोग विधि : पुष्य नक्षत्र का गुरुवार शुभ दिन होता है। उस दिन एकांत में बैठकर मंत्र का 108 बार से जप शुरू करें। जप के लिए कमलगट्टे की माला का प्रयोग करें। 40 दिन तक जप से मंत्र सिद्ध हो जाता है। फिर नित्य 11 बार जप करते रहें। मां महालक्ष्मी की कृपा अवश्य मिलेगी। स्वयंसिद्ध शाबर मंत्र के उपयोग में कोई समस्या नहीं आती है।

शरीर रक्षा मंत्र

1.उत्तर बांधों, दक्खिन बांधों, बांधों मरी मसान, डायन भूत के गुण बांधों, बांधों कुल परिवार, नाटक बांधों, चाटक बांधों, बांधों भुइयां वैताल, नजर गुजर देह बांधों, राम दुहाई फेरों।

2.जल बांधों, थल बांधों, बांधों अपनी काया, सात सौ योगिनी बांधों, बांधों जगत की माया, दुहाई कामरू कमक्षा नैना योगिनी की, दुहाई गौरा पार्वती की, दुहाई वीर मसान की।

प्रयोग विधि : उक्त दोनों में किसी एक मंत्र को चुनें। पर्व, संक्रांति, ग्रहण जैसे सिद्धकाल में जप करें। कम से कम 2100 मंत्र का जप हो। यदि 11000 हो सके तो उत्तम होगा। जपने पर प्रयोग के लिए तैयार हो जाता है। आवश्यकता पड़ने पर मंत्र का नौ बार जप करें। फिर हथेली पर नौ बार फूंक मारें। हथेली को पूरे शरीर पर फिरा दें। इससे शरीर सुरक्षित हो जाएगा।

उदर पीड़ा निवारक हनुमान मंत्र

मंत्र – जो जो हनुमंत धगधजित फलफलित आयुराष: खरूराह

प्रयोग विधि : यह मंत्र रामबाण की तरह प्रभावी है। पेट रोग में तत्काल सुधार होने लगता है। चौबीस घंटे में स्थिति संतोषजनक हो जाती है। यह प्रयोग रोगी के पूरी तरह ठीक होने तक प्रतिदिन दो बार करना चाहिए। इसके प्रयोग के लिए निम्न दो प्रमुख विधियां हैं। इनमें से सुविधानुसार एक या दोनों का एक साथ प्रयोग किया जा सकता है।

प्रयोग विधि : 1-108 मंत्र का जप करें। इस दौरान रोगी के पेट पर ऊपर से नीचे  हाथ फेरें।

2-जल को एक पात्र में रखें। गंगा जल मिले तो ज्यादा अच्छा होगा। 108 बार मंत्र जप कर उसे अभिमंत्रित करें। इसके बाद उसे रोगी को पिलाएं।

दुकान में बिक्री बढ़ाने का मंत्र

श्री शुक्ले महा-शुक्ले कमल-दल-निवासे श्री महा-लक्ष्मी नमो नम:। लक्ष्मी माई सत्त की सवाई। आओ, चेतो, करो भलाई। ना करो, तो सात समुद्रों की दुहाई। ऋद्धि-सिद्धि खावोगी, तो नौ नाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई।।

प्रयोग विधि : धंधा मंदा है तो परेशान न हों। सुबह नहा-धोकर दुकान पर जाएं। अगरबत्ती जलाकर लक्ष्मी जी के चित्र की आरती करें। तब गद्दी पर बैठ जाएं। फिर उक्त मंत्र का एक माला जप करें। उसके बाद कामकाज शुरू करें। निश्चय ही आशातीत सफलता मिलेगी। स्वयंसिद्ध शाबर मंत्र के उपयोग में श्रद्धा और विश्वास जरूरी है।

नजर उतारने का मंत्र

ओम नमो आदेश गुरु का। गिरह-बाज नटनी का जाया, चलती बेर कबूतर खाया, पीवे दारू खाय जो मांस, रोग-दोष को लावे पांस। कहां-कहां से लावेगा? गुदगुद में सुद्रावेगा, बोटी-बोटी में से लावेगा, चाम-चाम में से लावेगा, नौ नाड़ी बहत्तर कोठा में से लावेगा, मार-मार बंदी कर लावेगा। न लावेगा तो अपनी माता की सेज पर पग रखेगा। मेरी भक्ति गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा।

प्रयोग विधि : बच्चों या बड़ों नजर लग गई है। उससे तबीयत खराब हो गई। दवा से फायदा नहीं मिल रहा। ऐसे में उक्त मंत्र पढ़ें। फिर मोर पंख से पीड़ित को झाड़ दें। उसे तत्काल आराम मिलने लगेगा। इससे नजर दोष दूर हो जाएगा। प्रयोग से पूर्व मंत्र को सिद्धकाल में कम से कम 1100 जप कर लें। इसके बाद आवश्यकतानुसार प्रयोग करें।

संकट से उबारने वाला गुरुमंत्र

आदिनाथ कैलास निवासी, उदयनाथ काटे जम फांसी। सत्यनाथ सारणी संत भाखे, संतोषनाथ सदा संतन की राखे। कन्थडिऩाथ सदा सुख दायी, अचती अचम्भेनाथ सहायी।ज्ञान पारखी सिद्ध चौरंगी, मच्छेन्द्रनाथ दादा बहुरंगी।गोरखनाथ सकल घट व्यापी, काटे कलिमल तारे भव पीड़ा। नव नाथों के नाम सुमिरिये, तनिक भस्मि ले मस्तक धरिये। रोग शोक दारिद्र नशावे, निर्मल देह परम सुख पावे। भूत प्रेत भय भञ्जना, नव नाथों के नाम। सेवक सुमिरे चन्द्रनाथ, पूर्ण होय सब काम।

प्रयोग विधि : शुभ समय में मंत्र का 1008 जप कर लें। फिर दशांश हवन कर भस्म रख लें। संकट, विशेष कार्य, रोग-शोक आदि होने पर उपयोग करें। इसमें मंत्र का पांच बार जप कर मस्तक पर भस्म लगा लें। कार्य अवश्य सिद्ध होगा। गंभीर संकट उपस्थित हो तो स्नान के बाद गीले शरीर में ही मंत्र का तीन बार जप करें। 15 दिन में समस्या का हल हो जाएगा। इस मंत्र का अकारण प्रयोग उचित नहीं है। 

शाबर मंत्र विज्ञान–क्रमशः

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