अद्भुत शक्तियों के स्वामी हैं हम, जानें उसे पाने के तरीके

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अद्भुत शक्तियों के स्वामी हैं हम, जानें उसे पाने के तरीके
अद्भुत शक्तियों के स्वामी हैं हम, जानें उसे पाने के तरीके।

we all have super natural power : अद्भुत शक्तियों के स्वामी हैं हम। जानें उसे पाने के तरीके। आपने वशिष्ठ, विश्वामित्र, वाल्मीकि, परशुराम आदि के कई मंदिर देखे होंगे। इसी तरह ऋषि पत्नी रेणुका, राक्षसी हिडंबा, जमींदार की पत्नी बिहुला, रानी सती आदि की देवी के रूप में पूजा होती है। इन पर भक्तों का अगाध विश्वास है। वे श्रद्धा से पूजा करते हैं। उनकी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। कई जगह तो उनके आशीर्वाद के बिना कोई शुभ काम शुरू ही नहीं किया जाता है। मनाली में माता हिडंबा के प्रति ऐसी ही मान्यता है। ऐसे मामलों को महज संयोग नहीं कह सकते हैं। इनके भक्तों की बड़ी संख्या है। यह साबित करती हैं कि उनमें कुछ तो है। अर्थात कोई भी इंसान विशेष कार्य कर देवत्व हासिल कर सकता है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो पाएंगे कि ब्रह्मांड की सारी शक्ति हम में सन्निहित है।

भगवान का ही रूप है इंसान

इंसान ब्रह्मांड का ही लघु रूप है। दूसरे शब्दों में वह भगवान का लघु रूप है। ब्रह्मांड से जुड़ी शक्तियों को जगाएं। अपना संबंध ब्रह्मांड से जोड़ें। इससे आप कभी नष्ट न होने वाले शक्तिपूंज बन सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो भगवान बन सकते हैं। शास्त्रों में भी इस बारे में साफ लिखा है। इंसान विभिन्न तरीकों से आध्यात्मिक शक्तियों को जगा सकता है। खुद को परमपिता परमेश्वर में मिला सकता है। अर्थात वह भगवान बन सकता है। अब वैज्ञानिक नजरिये से देखें। रिसर्च से साबित हो गया है कि ब्रह्मांड की हर वस्तु को टुकड़ों में विभक्त करते जाएं तो वह अणु से परमाणु फिर इलेक्ट्रान-प्रोटान-न्यूट्रान और अंतत: गॉड पार्टिकल में विभक्त हो जाता है। अर्थात ब्रह्मांड की हर वस्तु गॉड पार्टिकल है। जड़-चेतन में वस्तु के गुण-धर्म के अनुरूप गॉड पार्टिकल सक्रिय या निष्क्रिय रहता है।

कैसे करें शक्ति को जागृत

इंसान में क्षमता है कि योग, मंत्र, ध्यान आदि से अपने अंदर की शक्तियों को जगाकर ईश्वरीय तत्व को हासिल कर ले। ऐसे में प्रश्न यह है कि जब सबके शरीर में समान ताकत है तो सभी ईश्वर क्यों नहीं बन जाते हैं? जवाब बहुत सरल है। ईश्वरीय तत्व हमारे शरीर में बीज रूप में है। पहले उसे जगाना होगा। उसे ईश्वर रूपी पौधा बनाने के लिए मानव रूपी शरीर के तत्वों को नष्ट करना होगा। जैसे बीज को पौधा बनने में अपने अस्तित्व को मिटाना पड़ता है। वैसे ही इंसान को ईश्वरीय तत्व रूपी पौधे में बदलने के लिए काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार से मुक्त होना होता है। फिर खुद को ईश्वरीय तत्व के रूप में बदलना। यह सारी प्रक्रिया मानसिक ही है। चूंकि हमारी पहचान, ताकत या बंधन जो भी कहें, शरीर ही है। इसलिए शरीर को भी इस यात्रा का सहभागी बनाना होगा।

सूक्ष्म शरीर की यात्रा

अद्भुत शक्तियों के स्वामी हैं हम। इसे आपने कभी न कभी अनुभव किया होगा। गंभीर संकट या समस्या होने पर आकस्मिक रूप से कोई अज्ञात शक्ति हमें उससे निकलने में मदद करती है। उसे हम संयोग मान लेते हैं। वास्तव में संयोग कुछ होता ही नहीं है। ब्रह्मांड में अकारण पत्ता भी नहीं हिलता है। वहां कई बार ऐसी घटनाएं अकारण कैसे हो जाएंगी। निश्चय ही इसके कारण हैं। यह कारण सूक्ष्म रूप में मौजूद हमारी ही शक्तियां हैं। जो कभी शरीर में थीं। फिर आंतरिक शक्तियों को जगाकर ब्रह्मांड में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल हो गई। वही शक्तियां अपने समान गुण-धर्म वाले लोगों की समय-असमय मदद करती हैं। आप ध्यान दें तो कई बार उनकी उपस्थिति को महसूस कर सकते हैं। इसके लिए जरूरत है कि अपनी संवेदनशीलता व महसूस करने की शक्ति को बढ़ाएं।

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