दिल्ली में योगमाया का मंदिर, कृष्ण-बलराम की रक्षा की थी

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दिल्ली में योगमाया का मंदिर, कृष्ण-बलराम की रक्षा की थी
दिल्ली में योगमाया का मंदिर, कृष्ण-बलराम की रक्षा की थी।

Yogmaya temple in Delhi, protected Krishna-Balram : दिल्ली में योगमाया का मंदिर, कृष्ण-बलराम की रक्षा की थी। योगमाया को देवकी की आठवीं संतान समझ कंस ने मारने की कोशिश की थी। उन्होंने कंस से स्वयं को तो बचाया ही, उसे चेतावनी भी दी कि उसे मारने वाला जन्म ले चुका है। उसकी मृत्यु निश्चित है। उन्होंने ही उससे पहले बलराम को देवकी के पेट से संकर्षण कर रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया था। बाल्यकाल में समय-समय पर उन्होंने कृष्ण की भी रक्षा की। जन्माष्टमी पर जब बात कृष्ण की हो तो योगमाया की चर्चा न हो, ऐसा संभव ही नहीं है। योगमाया भगवान कृष्ण की बहन और विष्णु की शक्ति हैं। उन्हें आदि शक्ति भी कहा जाता है। उन्हीं की सहायता से भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं। दुर्गा सप्तशती में प्राण संकट में देख ब्रह्मा ने इन्हीं की प्रार्थना की थी।

आस्था का बड़ा केंद्र

दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में एक योगमाया मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यह महत्वपूर्ण मंदिर वर्तमान में पूरी तरह से निजी हाथों में है। इसे विदेशी आक्रमणकारियों ने भी खूब निशाना बनाया लेकिन पूजा को रोक नहीं सके। मंदिर में पूजा कर रहे तीन में से एक पंडित उदित पांडे के अनुसार कंस के हाथ से छूटकर योगमाया ने अपने को दो रूपों में विभक्त कर लिया। उनका पहला रूप विंध्याचल पर्वत पर स्थित है। दूसरा रूप महरौली में कुतुब मिनार के पास है। यह मंदिर कई बार बना और टूटा। वर्तमान स्वरूप 19वीं सदी में तैयार किया गया। इन्हीं के आशीर्वाद से पांडवों को कुरुक्षेत्र में जीत मिली। कृतज्ञ पांडवों ने ही दिल्ली के महरौली में उनके मंदिर का निर्माण करवाया। मान्यता के अनुसार इस मंदिर की आधारशिला भगवान श्रीकृष्ण ने रखी थी।

आध्यात्मिक शक्ति व शांति का अनुभव

योगमाया मंदिर का प्रवेश द्वार।
योगमाया मंदिर का प्रवेश द्वार।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में योगमाया का मंदिर होते हुए भी शोर-शराबा से दूर है। सुरम्य वातावरण में स्थित इस मंदिर में पहुंचते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता और शांति का अनुभव होता है। मंदिर में माता की मूर्ति नहीं है। वे पिंडी रूप में स्थित हैं। उसी की पूजा की जाती है। लाल वस्त्र से ढंकी पिंडी का मुख दक्षिण की ओर है। इसके दर्शन मात्र से बड़े से बड़े संकट खत्म हो जाते हैं। इन्हें प्रसाद के रूप में चना चढ़ाया जाता है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर सिद्धपीठ श्री योगमाया मंदिर लिखा हुआ है। मंदिर में कल्कि भगवान, लक्ष्मी, शिव, दुर्गा और हनुमान जी की भी प्रतिमाएं हैं। मंदिर प्रतिदिन प्रातः पांच बजे खुलता है और शाम को आरती के बाद बंद हो जाता है। इसमें सभी प्रमुख त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। नवरात्र के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है।

ऐसे पहुंचें

दिल्ली के हर प्रमुख इलाके से महरौली तक सीधी बस सेवा उपलब्ध है। टैक्सी या निजी वाहन से पहुंचना सबसे सरल होगा। कुतुब मीनार के लौह स्तंभ से करीब 260 मीटर की दूरी पर मंदिर स्थित है। लेकिन इसका रास्ता बाहर  है। इसलिए उचित होगा कि बाहर से ही पैदल या आटो लेकर मंदिर तक पहुंचा जाए। दिन भर मंदिर खुला रहता है। अतः समय को लेकर कोई समस्या नहीं है। जब सुविधा हो आप पहुंच सकते हैं।

संदर्भ- तीर्थांक, श्रीमद भागवत महापुराण।

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