महिषासुर पर विजय का प्रतीक मैसूर का चामुंडेश्वरी मंदिर

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मैसूर के ऐतिहासिक पर्यटक आकर्षणों में से एक है चामुंडी पहाड़ी। इस पहाड़ी पर स्थित है असत्य और अन्याय पर सत्य व न्याय की जीत का प्रतीक मां चामुंडेश्वरी का मंदिर। मां को मैसूर के राजा का दर्जा प्राप्त है। मैसूर से 13 किलोमीटर दूर चामुंडा पहाड़ी पर मां चामुंडा का मंदिर है। ये मंदिर 700 साल से ज्यादा पुराना है। पहाड़ की चोटी से मैसूर का मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है। मंदिर के पास ही महिषासुर की विशाल प्रतिमा रखी हुई है। पहाड़ी के रास्ते में काले ग्रेनाइट के पत्थर से बने नंदी बैल के भी दर्शन होते हैं। मैसूर का चामुंडेश्वरी मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। यह मंदिर देवी दुर्गा की राक्षस महिषासुर पर विजय का प्रतीक माना जाता है। हालांकि चामुंडा का मतलब होता है चंडमुंड का संहार करने वाली देवी, लेकिन यहां की मान्यता के अनुसार यह महिषासुर का वध करने का प्रतीक है। वैसे भी यह पौराणिक तथ्य है कि मां महाशक्ति ने भी अपने विभिन्न रूपों के माध्यम से चंडमुंड व महिषासुर सहित उस समय के समस्त असुरों का संहार किया था।


इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था। यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का एक अच्छा नमूना है। मंदिर मुख्य गर्भगृह में स्थापित देवी की प्रतिमा शुद्ध सोने की बनी हुई है। मंदिर की इमारत सात मंजिला है जिसकी कुल ऊंचाई 40 मीटर है। मुख्य मंदिर के पीछे महाबलेश्वर को समर्पित एक छोटा सा शिव मंदिर भी है जो 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है। पहाड़ की चोटी से मैसूर का मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है।
कहा जाता है मैसूर शहर के लोगों पर मां चामुंडा की खास कृपा है। उनके आशीर्वाद से ही मैसूर शहर हर सदी में तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। मैसूर के दशहरे के मौके पर निकाली जाने वाली झांकी में मां चामुंडा की प्रतिकृति को ही राजा की जगह पालकी पर आसीन किया जाता है। यहां को लोगों में भी मां के प्रति अगाध श्रद्धा है। कोई भी शुभ कार्य हो या अशुभ कार्यों से निवृत्ति का समय है लोग मां का आशीर्वाद लेने अवश्य आते हैं।


इस मंदिर के बारे में तरह-तरह की मान्यताएं व कथा प्रचलित है। इनमें सबसे रोचक है मंदिर के पास ही स्थित महिषासुर की विशाल प्रतिमा के बारे में। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस प्रतिमा के पास खड़े होकर उसे ज्यादा देर तक नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने पर उस व्यक्ति का महिषासुर पीछा करने लगते हैं और उसे परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


मंदिर में पूजा का समय :  यहां आप सुबह 7.30 से दोपहर 2 बजे तक और फिर दोपहर 3.30 से शाम 6 बजे तक पूजा कर सकते हैं। फिर शाम 7.30 से रात 9 बजे तक मंदिर के द्वार खुले रहते हैं। अगर आप मंदिर में दर्शन करना चाहते हैं तो दो से तीन घंटे का समय लेकर पहुंचे। टूरिस्ट बस से आने वाले लोगों को समय कम रहने के कारण दर्शन नहीं मिल पाता है।


विशेष दर्शन :  दक्षिण के अन्य मंदिरों की तरह ही चामुंडेश्वरी मंदिर में समान्य दर्शन के अलावा विशेष दर्शन का भी कूपन उपलब्ध रहता है। चामुंडा देवी के दर्शन के लिए रोज देश भर से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वैसे नवरात्र के समय मंदिर में ज्यादा भीड़ होती है। चामुंडा पहाड़ी पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला में आवास की सुविधा उपलब्ध है। यहां अन्न क्षेत्र का भी संचालन होता है जहां आप भोजन ग्रहण कर सकते हैं।


ऐसे पहुंचेंं :  मैसूर शहर के मुख्य बस स्टैंड से चामुंडा पहाड़ी के लिए दिन भर बस सेवा उपलब्ध रहती है। यहां से वातानुकूलित वोल्वो बसें भी श्रद्धालुओं के लिए चलाई जाती हैं।



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