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पितृ दोष से मुक्ति के लिए शांति आवश्यक

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पितृपक्ष में स्वयं करें श्राद्ध और तर्पण
पितृपक्ष में स्वयं करें श्राद्ध और तर्पण।

Shraddha is necessary to get rid of Pitra Dosh : पितृ दोष से मुक्ति के लिए शांति आवश्यक। यह मात्र धार्मिक कृत्य नहीं, अपितु कार्यकारिणी नियम के अनुरूप है। हमने किसी से कुछ लिया तो उसे देना ही पड़ेगा। प्रकृति इसका पूरा हिसाब रखती है। जन्म कुंडली में पितृ दोष का भी कारण यही है। कई बार लोगों ने यह प्रश्न भी उठाया कि मैंने अपने माता-पिता का पूरा सम्मान किया। इसके बाद भी अशुभ घटनाएं हो रही हैं। इसमें कोई रहस्य नहीं है। कई बार पूर्व जन्म के कर्म भी प्रभाव डालते हैं। साथ ही कुल के उत्तराधिकारी के रूप में हर व्यक्ति में कुल से संबंधित डीएनए आता है। उसके साथ ही आती है जिम्मेदारी और पूर्व में किए गए कर्मों का फल भी। यदि पूर्वजों के कर्म अच्छे होते हैं तो बाद वाले को लाभ मिलता है। गलत करने पर परेशानी भी होती है।

लक्षणों से स्वयं जानें कि पितृ दोष है या नहीं

आप स्वयं लक्षणों से जान सकते हैं कि पितृ दोष है या नहीं। इसके लिए किसी ज्योतिषी का पंडित का होना ही आवश्यक नहीं है। जन्म कुंडली में पितृ दोष होने पर जीवन में कई तरह की बाधाएं और समस्याएं आने लगती हैं। इसका प्रभाव कई बार पूरे परिवार (कुल) पर पड़ता है। इन समस्याओं को संकेत समझ कर आपको सहज पता चल जाता है कि पितृ दोष है या नहीं। यदि हो तो इसे दूर करने का सबसे उपयुक्त समय श्राद्ध पक्ष ही है। इस 15 दिन की अवधि का सदुपयोग कर लिया जाए तो सारे दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है। हालांकि इसे किसी अमावस्या को भी कर सकते हैं। आइए पहले जानें कि किस तरह से पितृ दोष का पता लगाया जा सकता है। दोष हो तो उनसे किस तरह से मुक्ति पाई जा सकती है। पहले स्वयं पितृ दोष को जानने का तरीका जानें।

यदि ऐसा हो रहा हो तो पितृ दोष मानें

पितृ दोष से मुक्ति के लिए उसके लक्ष्णों को भी जानना चाहिए। इसके प्रमुख लक्षणों में परिवार में जवान सदस्य की मृत्यु का भी खतरा शामिल है। शुभ कार्य में लगातार बाधा आती है। परिवार में कोई कुंवारा रह जाता है। वंश वृद्धि की समस्या होती है। कई बार चिकित्सा रिपोर्ट में कुछ नहीं आता लेकिन संतान नहीं होती है। नए मकान, संपत्ति या वाहन खरीदने में भी अड़चनें आती हैं। अंतिम समय में कोई बाधा खड़ी हो जाती है। घर में अनायास बिना कारण के यदि दुर्गंध आने लगे तो समझें कि पितृ दोष हो सकता है। खाने में बार-बार बाल आना भी इसका संकेत है। कई बार पितर बार-बार सपने में भी आकर संकेत देते हैं। उनका आना अकारण नहीं होता है। ऐसे में उनकी शांति के लिए उपाय अवश्य करें। ध्यान रहे कि पितृ दोष की शांति मात्र पितर ही कर सकते हैं।

इस तरह करें शांति के उपाय

दोष शांत करने के घोषित उपाय से अलग में कुछ उपयोगी जानकारी दे रहा हूं। इसका प्रभाव जबरदस्त है। इनमें सबसे अहम है- गुप्त रूप से किसी गरीब कन्या का विवाह कराना, पीपल, बरगद आदि के पेड़ लगाना। पितृ पक्ष के दौरान पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाकर उसका 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए। पितरों के नाम पर पितृ पक्ष के दौरान नित्य श्रद्धापूर्वक तर्पण करना भी अत्यंत उपयोगी होता है। साथ ही निश्चित तिथि को श्रद्धापूर्वक किसी गरीब, गाय और कौवे को खिलाना अत्यंत कल्याणकारी होता है। परिवार के जीवित वृद्ध और मातृ शक्ति का सम्मान करने वालों के भी दोष कम हो जाते हैं। सूर्य को पिता माना जाता है। अतः तांबे के पात्र (लोटा हो तो अच्छा) में लाल फूल, रक्त चंदन का चूरा या घिसकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। उस समय ऊं घृणि सूर्याय नमः मंत्र का 11 बार जप करें।

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