हृदय में बसो, दिमाग में खुद बस जाओगे

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Radha Krishna

कृष्ण की राधा से शादी नहीं हुई। व्यवहारिक रूप से देखें तो उनका साथ भी बचपन (कुछ वर्षों) का ही था। बाद में कृष्ण के जीवन में एक से एक कई रानियां आईं लेकिन आज भी उनका नाम सबसे ज्यादा राधा के साथ ही लिया जाता है। कहने के लिए यह गहरा रहस्य है लेकिन आध्यात्मिक रूप से देखें तो अत्यंत सहज और सरल है। इस बारे में एक बोध कथा दे रही हूं। उम्मीद करती हूं कि सुधि पाठकों को इस कथा से राधा-कृष्ण के रहस्य को समझने में काफी मदद मिलेगी। इसके साथ ही यह प्रसंग सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक भी है कि सिर्फ साथ समय बिताने से कुछ नहीं होता। होता तब है जब आप उस व्यक्ति के साथ क्वालिटी टाइम (गुणवत्ता पूर्ण समय) बिताएं। उससे शारीरिक निकटता नहीं बल्कि उसके दिल के करीब हों।


एक दिन रुक्मणी ने भोजन के बाद, श्री कृष्ण को दूध पीने को दिया। दूध ज्यदा गरम होने के कारण श्री कृष्ण के हृदय में लगा और उनके श्रीमुख से निकला- “हे राधे!” सुनते ही रुक्मणी बोली- प्रभु! ऐसा क्या है राधा जी में, जो आपकी हर साँस पर उनका ही नाम होता है? मैं भी तो आपसे अपार प्रेम करती हूँ…फिर भी, आप हमें नहीं पुकारते ! श्री कृष्ण ने कहा- देवी ! आप कभी राधा से मिली हैं? और मंद मंद मुस्काने लगे…


अगले दिन रुक्मणी राधाजी से मिलने उनके महल में पहुंची। राधाजी के कक्ष के बाहर अत्यंत खूबसूरत स्त्री को देखा…और, उनके मुख पर तेज होने कारण उसने सोचा कि- ये ही राधाजी है और उनके चरण छूने लगी! तभी वो बोली-आप कौन हैं? तब रुक्मणी ने अपना परिचय दिया और आने का कारण बताया…तब वो बोली- मैं तो राधा जी की दासी हूँ। राधाजी तो सात द्वार के बाद आपको मिलेंगी!


रुक्मणी ने सातों द्वार पार किये…। हर द्वार पर एक से एक सुंदर और तेजवान दासी को देख सोच रही थी कि़- अगर उनकी दासियाँ इतनी रूपवान हैं…तो, राधारानी स्वयं कैसी होंंगी? सोचते हुए राधाजी के कक्ष में पहुंची…कक्ष में राधा जी को देखा-अत्यंत रूपवान तेजस्वी जिसका मुख सूर्य से भी तेज चमक रहा था। रुक्मणी सहसा ही उनके चरणों में गिर पड़ी…पर, ये क्या राधा जी के पूरे शरीर पर तो छाले पड़े हुए है! रुक्मणी ने पूछा- देवी आपके शरीर पे ये छाले कैसे? तब राधा जी ने कहा- देवी! कल आपने कृष्णजी को जो दूध दिया… वो ज्यदा गरम था! जिससे उनके ह्रदय पर छाले पड़ गए…और, उनके ह्रदय में तो सदैव मेरा ही वास होता है..!


इसलिए कहा जाता है- बसना हो तो…’ह्रदय’ में बसो किसी के..! ‘दिमाग’ में तो..लोग खुद ही बसा लेते है..!!



……….राधे राधे

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