शारदीय नवरात्र का शुभ मुहूर्त जानें, इनका भी रखें ध्यान

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चैत्र नवरात्र का शुभ मुहूर्त जानें, इनका भी रखें ध्यान
चैत्र नवरात्र का शुभ मुहूर्त जानें, इनका भी रखें ध्यान।

Know the auspicious time of Shardiya Navratra, take care of them too :  शारदीय नवरात्र का शुभ मुहूर्त जानें, इनका भी रखें ध्यान। शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस बार 7 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2021 तक है। इसमें पूजा-पाठ, उपासना, जप आदि के लिए मात्र आठ दिन मिलेगा। क्योंकि इस बार एक तिथि का क्षय हो रहा है। इस दौरान सभी को सात्विक रहना चाहिए। सात्विक का अर्थ मात्र भोजन नहीं अपितु विचार से भी है। व्रत करने वाले नवरात्र में दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाएं। हालांकि व्रत के बारे में अपने स्वास्थ्य को देखते हुए ही कोई निर्णय लें। यदि किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या पहले से है तो बिना डाक्टर की सलाह के व्रत नहीं करें। पाठ, जप और अनुष्ठान करने वाले भी पहले से ही पूरी तैयारी कर लें। नवरात्र के दौरान ब्रह्मचर्य का सख्ती से पालन करें और भूमि पर कंबल बिछाकर शयन करें।

कलश स्थापना सहित अन्य शुभ मुहूर्त

नवरात्र के पहले दिन अर्थात 7 अक्तूबर को प्रतिपदा दिन में 3.28 बजे तक है। अतः सूर्योदय से लेकर उस समय तक कभी भी कलश स्थापना कर सकते हैं। वैसे 11.15 से 12.45 के बीच अभिजीत मुहूर्त के दौरान करना सबसे अच्छा होगा। प्रातः करने के इच्छुक भक्त जन कन्या लग्न में 6.10 से 6.40 बजे के बीच कर लें। एक तिथि के क्षय के कारण इस बार अष्टमी 13 अक्टूबर को है। हालांकि उसका प्रारंभ 12 अक्टूबर की रात 9.47 बजे हो जाएगा। वह 13 अक्टूबर को रात 8.07 बजे समाप्त होगा। ऐसे में अष्टमी पूजन और कन्या भोजन कराने वाले को 13 अक्टूबर ही अष्टमी मानना चाहिए। 14 को निर्विवाद रूप से नवमी है। व्रत का पारण करने वाले इसी तारीख को करें।

इन दिनों में करें माता के विभिन्न रूपों का पूजन

प्रतिपदा के दिन पहले मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ बोएं। बीच में कलश रखने का स्थान छोड़ दें। स्थान की कमी हो तो कलश और जौ आसपास रखें। आप शुद्ध आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह कर बैठें। फिर देवी की प्रतिमा या चित्र रखकर पूजा करें। उसके बाद पाठ, जप आदि करें। शारदीय नवरात्र का शुभ मुहूर्त आपने जाना। अब पढ़ें कि किस तारीख को माता के किन रूपों की पूजा करनी है।

पहला दिन (7 अक्टूबर)- घटस्थापना और शैलपुत्री पूजा

दूसरा दिन (8 अक्टूबर)- ब्रह्मचारिणी पूजा

तीसरा दिन (9 अक्टूबर)- चंद्रघंटा और कूष्मांडा पूजा

चौथा दिन  (10 अक्टूबर) स्कंद माता पूजा

पांचवां दिन (11 अक्टूबर) कात्यायनी पूजा

छठा दिन  (12 अक्टूबर) कालरात्रि पूजा

सातवां दिन (13 अक्टूबर) महागौरी पूजा

आठवां दिन (14 अक्टूबर) सिद्धिदात्री पूजा

नौवां दिन   (15 अक्टूबर) विजया दशमी पूजा

डोली पर आएंगी माता, इसी पर विदा भी होंगी

मां दुर्गा इस बार डोली पर आ रही हैं। उनकी विदाई भी डोली पर ही होगी। ज्योतिषी और पंडित माता के वाहन के आधार पर अगले साल की भविष्यवाणी करते हैं। वैसे तो माता की सवारी शेर मानी जाती है लेकिन नवरात्र में दिन के आधार पर उनके आने-जाने के वाहन नियत हैं। देवी भागवत पुराण में इस संबंध में बहुत स्पष्ट रूप से लिखा गया है।

शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च डोलायां बुधे नौका प्रकिर्त्तिता।

गजे च जलदा देवी छत्रभंगस्तुरंगमे। नौकायां सर्वसिद्धि स्यात डोलायां मरण ध्रुवम्।

इस बार नवरात्र का प्रारंभ गुरुवार और विजया दशमी शुक्रवार को है। अतः माता का आगमन और विदाई डोली से होगी। इसमें मातृ शक्ति को मजबूती मिलती है। विश्व भर में बाकी मामलों और आम जन के लिए यह शुभ नहीं माना जाता है। इसमें प्राकृतिक आपदा, राजनीतिक अस्थिरता का खतरा रहता है। इससे जन-धन की हानि होती है।

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