प्रकृति स्वरूपा दुर्गा रोगों को दूर करने में भी प्रभावी

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प्रकृति स्वरूपा दुर्गा रोगों को दूर करने में भी प्रभावी
प्रकृति स्वरूपा दुर्गा रोगों को दूर करने में भी प्रभावी।

औषधि रूप में भी स्थित, उसके सेवन से मिलता है स्वास्थ्य का वरदान

Prkriti swaroopa Durga is also effective in curing disease : प्रकृति स्वरूपा दुर्गा रोगों को दूर करने में भी प्रभावी हैं। उनका नौ रूप नौ औषधियों में भी स्थित हैं। उन औषधियों के नियमित सेवन से निरोग रहने में सहायता मिलती है। यह भक्तों के लिए एक तरह से माता का कवच है। यह तो सभी जानते हैं कि मां दुर्गा अपने भक्तों को भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करती हैं। उनकी उपासना से ग्रहों के प्रकोप से बचकर उसे अनुकूल करने के बारे में मैंने पहले बताया था। इस बार जानें भक्ति के साथ उनके औषधीय चमत्कार के बारे में। यदि वनस्पति रूप में स्थिति माता के उस रूप को समझ कर उपयोग किया जाए तो मनुष्य कई रोगों से जीवन भर बचा रह जाएगा।

हरड़ में वास है शैलपुत्री का

शैलपुत्री का वास दिव्य औषधि हरड़ में है। नवदुर्गा में ये प्रथम हैं। हरड़ का नाम आपने सुना ही होगा। कई औषधियों में इसका प्रयोग होता है। आयुर्वेद में इसका बहुत महत्व है। इसे गुण की खान कहा जाता है। इसे हरितकी के नाम से भी जाना जाता है। यूनानी चिकित्सा पद्धति में इसका प्रयोग एंटी-टॉक्सिन के रूप में कंजक्टीवाइटिस, गैस्ट्रिक समस्याओं, पुराने और बार-बार होने वाले बुखार, साइनस, एनीमिया और हिस्टीरिया के इलाज में किया जाता है।

ब्राह्मी में ब्रह्मचारिणी

दुर्गा के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी को मानसिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। वनस्पति में वे ब्राह्मी रूप से स्थित हैं। मानसिक क्षमता बढ़ाने में इसे बेजोड़ माना जाता है। इस औषधि को मस्तिष्क का टॉनिक कहा जाता है। ब्राह्मी मन, मस्तिष्क और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाले के साथ रक्त संबंधी समस्याओं को दूर करने में उपयोगी है। इसका सेवन करने वाले का चूंकि मस्तिष्क शांत रहता है तो उसकी वाणी भी मधुर रहती है। यह गैस और मूत्र संबंधी रोगों की भी प्रमुख दवा है। मूत्र के माध्यम से यह रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ है। प्रकृति स्वरूपा दुर्गा रोगों को दूर करने में उपयोगी हैं। अतः इससे संबंधित समस्या ग्रस्त लोगों को ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ ब्राह्मी का सेवन करना चाहिए।

चंद्रघंटा रूप चंदुसूर मोटापा दूर करने में सक्षम

धनिया की तरह का पौधा चंदुसूर मोटापा दूर करने में सक्षम है। इसमें दुर्गा के तीसरे रूप चंद्रघंटा का वास है। यदि आप मोटापे की समस्या से परेशान हैं तो मां चंद्रघंटा को चंदुसूर चढ़ाएं। साथ ही इसका प्रसाद रूप में नियमित सेवन भी करें। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी भी बनाई जाती है। इसमें कई औषधीय गुण हैं। मोटापा दूर करने में तो यह अत्यंत प्रभावी है ही। यह शरीर की शक्ति को बढ़ाने वाली एवं हृदय रोग को ठीक करने में भी उपयोगी है। इसलिए इस बीमारी से संबंधित लोगों को नियमित रूप से मां चंद्रघंटा की पूजा कर प्रसाद के रूप में चंदुसूर ग्रहण करना चाहिए।

हृदयरोग, कोलेस्ट्राल व मधुमेह में कूष्मांडा प्रभावी

यदि आप हृदय रोग से पीड़ित हैं। कोलेस्ट्राल की समस्या है। मधुमेह और मूत्र रोग से परेशान हैं तो मां कूष्मांडा की उपासना करें। यह दुर्गा की चौथी रूप हैं। वनस्पतियों में पेठा में इनका वास है। इसे कुम्हड़ा भी कहा जाता हैं। यह हृदय रोगियों के लिए लाभदायक, कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाला, ठंडक पहुंचाने वाला और मूत्रवर्धक है। पेट की समस्याओं में भी यह उपयोगी है। रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित कर अग्न्याशय को सक्रिय करता है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। इन बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को पेठा के उपयोग के साथ कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए।

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वात, पित्त व कफ दोष में स्कंदमाता व कात्यायनी उपयोगी

आप देख रहे हैं कि प्रकृति स्वरूपा दुर्गा रोगों को दूर करने में किस तरह प्रभावी हैं। यदि आप वात, पित्त, कफ एवं गले की समस्या से परेशान हैं तो नव दुर्गा उसमें भी प्रभावी हैं। दुर्गा का पांचवां रूप स्कंदमाता औषधि रूप में अलसी में विद्यमान हैं। इसके गुण के बारे में जितना कहा जाए कम है। यह त्रिताप से मुक्त करने में सक्षम है। इसमें ओमेगा-3 और फाइबर की मात्रा भी काफी अधिक होती है। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। कात्यायनी माता की छठी रूप हैं। यह औषधि रूप में मोइया अर्थात माचिका में स्थित हैं। वात, पित्त और कफ के साथ गले की समस्या में भी यह उपयोगी हैं। यदि इन रोगों से पीड़ित हैं तो क्रमशः स्कंदमाता या कात्यायनी की नियमित उपासना कर उन्हें संबंधित औषधि चढ़ाएं और उसका सेवन करें।

नागदौन से कालरात्रि व तुलसी से जुड़ी हैं महागौरी

नवरात्र में सातवें दिन कालरात्रि की पूजा की जाती है। भय से मुक्त करने वाली माता औषधीय गुणों से भरपूर नागदौन में वास करती हैं। इनकी पूजा कर नागदौन अर्पित करने और प्रसाद रूप में उसके सेवन से मस्तिष्क रोग में लाभ मिलता है। इसे घर में लगा लिया जाए तो कई छोटी-मोटी बीमारियां पास फटकती भी नहीं हैं। मां दुर्गा की आठवीं रूप महागौरी का औषधीय रूप तुलसी है। यह जानी-मानी औषधि कई रोगों को दूर करने में सक्षम है। महागौरी के साधक उनकी नियमित पूजा कर तुलसी पत्र अर्पित करें। फिर प्रसाद रूप में उसका सेवन करें तो कई रोगों से हमेशा बचे रहेंगे।

औषधि रूप में शतावरी में स्थित हैं सिद्धिदात्री

मां दुर्गा का नौवां रूप में सिद्धिदात्री का है। सभी प्रकार की सिद्धियां देने वाली माता को नारायणी या शतावरी भी कहते हैं। औषधीय गुणों से भरपूर शतावरी वनस्पति बल, बुद्धि और वीर्य बढ़ाने के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात-पित्त शोध नाशक भी है। इसके नियमित सेवन से हृदय को बल मिलता है। सिद्धिदात्री की पूजा कर उन्हें शतावरी अर्पित करें। फिर प्रसाद रूप में उसका नियमपूर्वक सेवन करें तो सभी कष्ट स्वयं दूर हो जाते हैं। आपने जाना कि प्रकृति स्वरूपा दुर्गा रोगों को दूर करने में भी कितनी प्रभावी हैं।

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2 COMMENTS

  1. सनातन धर्म के वैज्ञानिक पक्ष की प्रमाणिक विश्लेषण निश्चित ही जीवन की सार्थकता है आपको साधु वाद

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