दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने का मौका सोमवती अमावस्या

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दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने का मौका सोमवती अमावस्या
दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने का मौका सोमवती अमावस्या।

Somwati Amawasya is a chance to make married life happy : दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने का मौका है सोमवती अमावस्या। यह 12 अप्रैल को है। इसे दर्श या चैत्र अमावस्या भी कहते हैं। यह पितरों को प्रसन्न करने और दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने का शानदार अवसर है। साल में 12 अमावस्या होती है। दिन के हिसाब से अमावस्या के नाम भी अलग-अलग हैं। सोमवार को पड़ने वाले को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन का विशेष महत्व है। क्योंकि सोमवार चंद्रमा का दिन है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक सीध में होते हैं। यह बेहद शुभ माना जाता है। यह दान-पुण्य, आध्यात्मिक शक्ति जगाने, शाबर मंत्रों को प्रयोग के लिए और मजबूत बनाने के लिए भी बेहद उपयुक्त है। उसके लिए अनुष्ठान शुरू करने का भी शुभ समय हैं।

सोमवार भगवान शिव का दिन, पितृदेव इसके स्वामी

भगवान आशुतोष मोक्ष के दाता हैं। सोमवार उनका दिन माना जाता है। साथ ही इस दिन के स्वामी पितृदेव हैं। मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण करने पर महादेव उस जातक को पितृ ऋण से मुक्त कर देते हैं। वे पितरों का भी कल्याण करते हैं। इस अवसर पर पितरों के लिए किए हवन, पूजन, तर्पण आदि करने से कुंडली का पितृ दोष  समाप्त हो जाता है। इस दिन तालाब, नदी या समुद्र में स्नान कर जप, दान और तप (मंत्र जप) करना शुभ होता है। चूंकि यह चंद्रमा से जुड़ा है, इसलिए इस दिन के पूजा-पाठ, दान आदि से चंद्रमा भी प्रसन्न होते हैं। दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने का भी यह अच्छा मौका है।

इस तरह बिताएं दिन

सुबह जितनी जल्दी संभव हो उठकर स्नान करें। इस दिन देर तक सोना अच्छा नहीं माना जाता है। स्नान के बाद पीपल के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। पितरों का तर्पण भी अवश्य करें। उनके लिए हवन-पूजन का आयोजन शुभ होता है। उनके नाम पर किसी गरीब या ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। चाहें तो अन्नदान भी कर सकते हैं। ऐसा करने से पितर तृप्त होते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है। सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना से व्रत रखकर दान करती हैं। मान्यता है कि इससे परिवार में सुख, शांति और खुशहाली आती है। साथ ही दांपत्य जीवन को खुशहाल होता है। इस दिन मन, वचन और भोजन में सात्विक तरीके से रहना चाहिए। मांस-मदिरा का सेवन नहीं करें। झूठ नहीं बोलें।

सोमवती अमावस्या का योग

अमावस्या की शुरुआत रविवार 11 अप्रैल को सुबह 06.05 बजे शुरू हो जाएगा। इसका समापन सोमवार 12 अप्रैल को सुबह 08.02 बजे होगा। अर्थात इस अमावस्या का लाभ उठाने के लिए रविवार सुबह से ही जप आदि कर सकते हैं। शाबर मंत्रों के जप के लिए सबसे अनुकूल समय 11 अप्रैल की रात नौ बजे से तीन बजे तक का होगा।

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