गुरु के राशि परिवर्तन से होंगे बड़े बदलाव

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ब्रह्मांड में राशियों, खासकर बृहस्पति का स्थान परिवर्तन बड़ा और अच्छा बदलाव लेकर आएगा। देवगुरु बृहस्पति 11 अक्टूबर को शाम 7 : 20 बजे अपने शत्रु शुक्र की तुला राशि से मित्र मंगल की वृश्चिक राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। यहाँ पांच नवंबर 2019 तक अर्थात 13 माह रहेंगे।

गुरु का राशि परिवर्तन का विभिन्न राशियों पर पड़ने वाला असर निम्न प्रकार से पड़ेगा

मेष :  मेष राशि के लिए गुरु का परिवर्तन बहुत शुभ नहीं माना गया है। यह गोचर जन्मराशि से अष्ठम भाव में होगा। स्वास्थ जैसे पेट, किडनी, ज्वर की समस्या हो सकती है। खान-पान में सावधानी बरतें। कुछ अनावश्यक वाद-विवाद, धन का फंसना, जॉब या व्यपार में हानि हो सकती है।

बृष :: गुरु का यह गोचर सप्तम भाव में हो रहा है। यहाँ यह शुभ फल प्रदान करता है। इस गोचर से शनि की ढैय्या के बुरा फल में भी कमी करेगा। लंबे समय से चले आ रहे रोग में भी सुधार होगा। स्वयं का या घर में किसी अपने का विवाह हो सकता है। सामाजिक और आर्थिक पक्ष मजबूत होंगे। कुछ पुरस्कार सम्मान या धन की भी वृद्धि होगी। धार्मिक एवं यात्रा व्यापारिक यात्रा होगी।

मिथुन ::  मिथुन राशि में गुरु का गोचर छठे भाव में होगा जो शुभ नहीं है। वाद-विवाद से बचें। शत्रु हावी हो सकते हैं। कुछ संक्रमण या उदर रोग हो सकता है। जीवनसाथी से विवाद, धन का फंसना या कुछ कानूनी उलझन भी हो सकती है। कर समय पर दें और जोखिम उठाने से बचें।

कर्क :: कर्क राशि वालों के लिए यह परिवर्तन बहुत ही शुभ समय ले कर आ रहा है। अभी गोचर में शनि भी शुभ है। इन्हें चारों ओर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। विवाह या जॉब की समस्या समाप्त होगी। सामाजिक और धार्मिक क्रियाकलाप बढेगा। मान सम्मान में वृद्धि और शिक्षा में सफलता प्राप्त होगी।

सिंह :: सिंह राशि के गुरु चतुर्थ भाव में गोचर करेंगे। यह मिला-जुला फल देगा। यह जहां विवाह और जॉब के लिए अनुकूल है वहीं पारिवारिक या पैतृक संपत्ति का विवाद और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हृदय व गला रोग से बचें। कुछ भूमि या भवन के पुराने विवाद शुरु हो सकते हैं। शिक्षा में कुछ बाधा उत्पन्न हो सकती है।

कन्या ::  कन्या राशि वालों का गुरु का गोचर तीसरे भाव में होगा। यहाँ गुरु बहुत अच्छा फल नहीं देते हैं। पर पति भाग्य और आय को देखने के कारण इनमें अच्छ फल मिलता है। कुछ मानसिक रोग मोटापा, अनिद्रा व तनाव दे सकता है। धार्मिक यात्रा भी हो सकती है। शनि के अनुकूल नहीं होने से जॉब में परिवर्तन हो सकता है। शिक्षा में बाधा और परेशानी हो सकती है।

तुला राशि::  आपका गुरु का गोचर दूसरे भाव में होगा । यह शुभ है। रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। आत्म्विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।  विवाह योग्य लोगों का विवाह होगा या दाम्पत्य जीवन में खुशी आएगी। आय में वृद्धि होगी। शिक्षा में भी शुभ होगा।  कुछ व्यापारिक या धार्मिक यात्रा होगी।

वृश्चिक :: गुरु आपके जन्मराशि में ही गोचर कर रहे हैं। यह गोचर सामान्य रहेगा। महादशा अच्छी रही तो इसका फल अच्छा प्राप्त होगा। शिक्षा और संतान संबंधी शुभ समाचार प्राप्त होंगे। शनि अनुकूल नहीं होने से पैर या कमर में कुछ समस्या हो सकती है। खर्च में वृद्धि होगी। गलत दोस्तों से दूर रहें। शिक्षा में सामान्य सफलता प्राप्त होगी। कानूनी कार्य ठीक से करें कुछ उलझन हो सकती है।

धनु :: धनु राशि का गुरु बारहवें भाव में शुभ नहीं कहा जा सकता है। कुछ आकस्मिक समस्या, रोग और संतान को कष्ट हो सकता है। अपनी वाणी, व्यवहार और आचरण में सावधानी रखें। जोखिम और धन निवेश से बचें।
गुप्त शत्रु से सावधान रहें।

मकर ::  आपका गुरु जन्मराशि से एकादश भाव में शुभ रहेगा। रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा। घर में मांगलिक कार्य होंगे। शिक्षा, संतान और धन के बारे में शुभ समचार प्राप्त होंगे। शनि के अनुकूल होने से यह गोचर सभी प्रकार से शुभ होगा। बेरोजगार को नौकरी और नौकरी पेशों को तरक्की या धन वृद्धि होगी।

कुंभ::  आपकी राशि से यह दशम भाव में रहेगा जो मध्यम फल प्रदान करता है। कार्य में बाधा, पिता या जॉब में परेशानी और गृह क्लेश संभव है। कुछ अपमान या सामाजिक प्रतिष्ठा में हानि हो सकती है। पैसा सोच समझ के खर्च करें और जोखिम से बचें। अध्ययन और एकाग्रता में बाधा हो सकती है।

मीन :: मीन राशि का गुरु का गोचर नवम भाव अर्थात भाग्य भाव में होगा जो शुभ है। रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। उत्साह एवं पराक्रम में वृद्धि होगी। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। गृह एवं वाहन का सुख प्राप्त होगा। अध्ययन के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। कार्यक्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होगी। कुल मिला कर समय अनुकूल रहेगा।

गुरू का गोचर जिनका शुभ है उसे और शुभ बनाने और जिन्हें अशुभ फल दे रहा है, उसमें कमी हो अर्थात गुरु का गोचर अनुकूल हो इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।

1) पूर्ण सात्विक जीवन जीना चाहिए। शराब, शबाब और कबाब से दूर रहें । खराब गुरु भी अच्छा फल देंगे।
2)  लक्ष्मी-नारायण का पूजन करें, श्रीशुक्त और पुरुशुक्त का मियमित पाठ करें।
3) माता-पिता और बूढ़े लोगों की सेवा करें। गुरु दीक्षा जरूर लें। गुरु मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जप करें।
4) पीला वस्त्र धारण करें। केला गाय को या गरीब को दें। गौ सेवा करें।
5 ) घर में धार्मिक कार्य या अनुष्ठान हो। अपने से बड़ों का सम्मान करें।

आचार्य प्रणव मिश्रा
ज्योतिष रत्न विजेता
आचार्यकुलम , अरगोड़ा राँची
9031249105

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