दैनिक उपयोग में आने वाले मंत्र, करे हर समस्या का समाधान

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मंत्रों का हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है। यदि दैनिक जीवन में हम मंत्रों को महत्व देना और प्रयोग करना शुरू करें तो प्रतिदिन चंद मिनट खर्च कर ही हम जीवन में चमत्कारिक सुधार ला सकते हैं। सुधि पाठकों की सुविधा के लिए मैं यहां दैनिक जीवन में प्रयोग आने वाले कुछ मंत्रों व प्रयोगों की जानकारी दे रहा हूं। मेरा सुझाव है कि पाठक इसका उपयोग करें और अद्भुत अनुभव का लाभ उठाएं।


तिलक लगाने का मंत्र

केशवानन्न्त गोविन्द बाराह पुरुषोत्तम। पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु।।

कान्ति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम्। ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम्।।


भोग लगाने का मंत्र

त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर।।


भोजन से पूर्व बोलने का मंत्र

ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना।।


भोजन के बाद का मंत्र

अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभव:। यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञ: कर्म समुद् भव:।


अग्नि जिमाने का मंत्र

ॐ भूपतये स्वाहा, ॐ भुवनप, ॐ भुवनपतये स्वाहा। ॐ भूतानां पतये स्वाहा।। कहकर तीन आहूतियाँ बने हुए भोजन को डालें। या ॐ नमो नारायणाय।। कहकर नमक रहित अन्न को अग्नि में डालें।


शयन का मंत्र

जले रक्षतु वाराह: स्थले रक्षतु वामन:। अटव्यां नारसिंहश्च सर्वत: पातु केशव:।।


सूर्य दर्शन मंत्र

रत्नमालाविभूषितम्। प्रात: काले रवि दर्शनं सर्व पाप विमोचनम्।।


श्री राम के जप मंत्र

1)ॐ राम ॐ राम ॐ राम। श्री राम के जप मन्त्र। 2)ह्रीं राम ह्रीं राम। 3)श्रीं राम श्रीं राम। 4)क्लीं राम क्लीं राम। 5)फ़ट् राम फ़ट्। 6)रामाय नम:। 7)श्री रामचंद्राय नम:। 8)श्री राम शरणं मम्। 9)ॐ रामाय हुँ फ़ट् स्वाहा। 10)श्री राम जय राम जय जय राम। 11)राम राम राम राम रामाय राम।


उपयोगी मंत्र

रामचरित मानस की लोकप्रियता यूं ही नहीं है। उसकी चौपाई रामबाण की तरह असरकारक हैं। इसके लिए अतिरिक्त प्रयास करने की भी आवश्यकता नहीं है। चूंकि उसकी चौपाई मानस मंत्र हैं। अत: उनके लिए किसी विशेष विधि-विधान की जरूरत नहीं होती है। सिर्फ मन-कर्म-वचन की शुद्धि से श्रीराम का स्मरण करके मन ही मन श्रद्धा से जप कर मनोकामना की पूर्ति करना संभव है। प्रस्तुत हैं कुछ उपयोगी मंत्र।


झगड़े में विजय प्राप्ति के लिए

कृपादृष्टिव करि वृष्टिए प्रभु अभय किए सुरवृन्द। भालु कोल सब हरषे जय सुखधाम मुकुंद।।


विद्या प्राप्ति के लिए

गुरू गृह गए पढ़न रघुराई। अल्प काल विद्या सब आई।।


यात्रा की सफलता के लिए

बिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदय राखि कोसलपुर राजा।।


ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए

लगे सवारन सकल सुर वाहन विविध विमान। होई सगुन मंगल सुखद करनहि अप्सरा गान।।


दरिद्रता मिटाने के लिए

अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।

जे सकाम नर सुनहि जे गावहि। सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।


संकट नाश के लिए

दिन दयाल बिरिदु सम्भारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।


जीविका प्राप्ति के लिए

विस्व भरण पोषण कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।


विपत्ति नाश के लिए

राजीव नयन धरे धनु सायक। भगत विपत्ति भंजक सुखदायक।।


विघ्न निवारण के लिए

सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही। राम सुकृपा बिलोकहि जेही।।


आकर्षण के लिए

जेहि के जेहि परह सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू।।


परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए

जेहि पर कृपा करहि जनु जा‍नी। कवि उर अजिर नचावहि बानी।।

मोरि सुधारिहि सो सब भाँति। जासु कृपा नहि कृपा अघाति।।


नीचे निम्न दो अत्यंत उपयोगी मंत्र दे रहा हूं जिनके जाप से मनोवांछित फल मिलता है

–ॐ गं गणपतये नम: यह बेहद प्रभावी मंत्र है। इसके जप के लिए यदि हाथी दाँत की माला हो तो बहुत अच्छा परिणाम आता है। वैसे भी इसका मंत्र जप कल्याणकारी होता है। इस मंत्र के नियमित जप करने से हर भी कार्य में सफलता मिलती है। यदि कुँवारी कन्या इक्कीस बुधवार तक इस मंत्र का जप करें तथा चूरमा अथवा मूँग के सवा किलो लड्डू का गणेश जी को भोग लगाकर बच्चों एवं परिजनों में बाँटें तो उनका विवाह अतिशीघ्र हो जाता है। इस मंत्र का जप करने और व्रत रखने से क्रूरतम मंगली और कालसर्प योग वाली कन्याओं का विवाह भी शीघ्र होता है। साथ ही व्यापार में वृद्धि एवं छात्र-छात्राओं को परीक्षाओं में सफलता मिलती है। यदि इसी मंत्र की इकतीस मालाएँ नित्य जाप की जाएँ तो हर मनोवांछित कार्य पूरा होता है।


रोग मुक्ति मंत्र : रोगों के निवारणार्थ यह मंत्र निम्न है : ॐ अच्युताय नम:, ॐ गोविंदाय नम:, ॐ अनंताय नम:।

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से दूसरे दिन के सूर्योदय तक इसका जाप करने से यह मंत्र सिद्ध होता है और साधक जटिल रोगों से मुक्त होता है। साथ ही उसे अन्न लक्ष्मी, धन लक्ष्मी व राज्य लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।



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