कालीघाट में है शक्तिपीठ, देखें माता काली का प्रचंड रूप

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कालीघाट में है शक्तिपीठ, देखें माता काली का प्रचंड रूप
कालीघाट स्थित शक्तिपीठ में देखें प्रचंड रूप में मां काली को।

fierce form of kali at kalighat : कालीघाट में है शक्तिपीठ व माता काली का प्रचंड रूप। यहां सती के दाहिने पैर की उंगली गिरी थी। इस शक्तिपीठ को दक्षिणेश्वर काली भी कहा जाता है। माता काली शिव के सीने पर पैर रखे खड़ी हैं। यह महान साधक रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि है। वे यहां घंटों काली की भक्ति में लीन रहते थे। उनका काली से साक्षात्कार होता था। उन्होंने यहां पुजारी के रूप में भी काम किया। 

सती के पैर की उंगली गिरी थी

मंदिर में काली की लाल-काले रंग के कास्टिक पत्थर की मूर्ति है। एक अनुश्रुति के अनुसार माता किसी बात पर गुस्‍सा हो गईं। उन्‍होंने नरसंहार शुरू कर दिया। जो भी मार्ग में आता‍ मारा जाता था। उनके क्रोध को शांत करने के लिए शिव रास्‍ते में लेट गए। देवी ने गुस्‍से में उनकी छाती पर पांव रख दिया। तभी उन्‍होंने शिव को पहचान लिया। इसके बाद उनका गुस्‍सा शांत हुआ। फिर उन्‍होंने नरसंहार बंद कर दिया।

वर्तमान मंदिर 1809 में बना

यह मंदिर प्राचीन है। इसका मौजूदा स्वरूप 1809 में बना। शक्तिपीठ में इस प्रतिमा की प्रतिष्ठा कामदेव ब्रह्मचारी ने की थी। काली का स्थान दस महाविद्याओं में पहला है। इस मंदिर का प्रभाव कोलकातावासियों के मन पर गहरा है। दूर दूर से श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करने आते हैं। सचिन तेंदुलकर ने भी उनकी पूजा की थी। मौका था उनके 99 शतक बनाने के बाद का।

अघोर व तंत्र साधना का बड़ा केंद्र

कालीघाट में है शक्तिपीठ जो तंत्र व अघोर साधना लिए प्रसिद्ध है। दूर-दूर से साधक आकर लंबी साधना करते हैं। परिसर में मां शीतला का मंदिर भी है। उनको भोग में सामिष भोजन चढ़ाया जाता है। यानी मांस, मछली अंडा सब कुछ। वैसे यहां सात्विक पूजा वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में आते हैं। माता उनकी भी मनोकामना पूरी करती है। यहां मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा होती है।

मनोकामना पूरी होने का बड़ा केंद्र

मान्यता है कि यहां भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। सिर्फ माता के दर्शन से ही दुख दूर होते हैं। कोलकाता के लोगों की अटूट आस्था है। एक बार आने वाले भक्त बार-बार आते हैं। यहां देश ही नहीं विदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। सचिन तेंदुलकर भी माता के भक्त हैं। 99 शतक के बाद वे दबाव में थे। तब उन्होंने कालीघाट आकर पूजा की। 

मंदिर खुलने का समय और कैसे पहुंचें

मंदिर सुबह पांच बजे खुल जाता है। दोपहर 02 से 3.30 बजे तक बंद रहता है। शाम को 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक फिर खुलता है। दर्शन करने आए हैं तो यहां पंडों से सावधान रहें। विजयादशमी और बंगला नववर्ष के दिन भारी भीड़ उमड़ती है। हावड़ा स्टेशन से बस, मेट्रो और ट्राम से पहुंच सकते हैं। मुख्य सड़क पर ही मंदिर का विशाल प्रवेश द्वार है। इस पर आधा किलोमीटर चलने के बाद मंदिर है। कालीघाट में है शक्तिपीठ जिसका दर्शन अत्यंत फलदायी है।

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