पंचक में रहें सावधान, जानें इनके अर्थ और रखें सावधानी

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वृक्षों का महत्त्व।
वृक्षों का महत्त्व ।

know what is panchak : पंचक में रहें सावधान, जानें इनके अर्थ और रखें सावधानी। इस बार ये रविवार से शुरू हो चुके हैं। आपने कई बार इनके नाम सुने होंगे। शुभ-अशुभ काम के दौरान कई बार जिक्र आता है। खासकर लोग शुभ काम में इससे बचने की कोशिश करते हैं। यह पूरी तरह सही नहीं है। इसमें आमतौर पर शुभ काम नहीं करने चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि पंचक हमेशा खराब नहीं होते। इनके कई रूप हैं। कुछ पंचक शुभ भी माने जाते हैं। उस दौरान अच्छे काम शुरू कर सकते हैं। आइए जानें कि यह कितने तरह के होते हैं। शुभ और अशुभ पंचक कौन-कौन से हैं।

पंचक के पांच मुख्य रूप

पंचक में रहें सावधान। इनके पांच मुख्य रूप हैं। इनके अलावा कुछ अन्य भी होते हैं। पंचक पांच दिन के होते हैं। आमतौर पर ये धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र में आते हैं। इसमें सामान्य रूप से शुभ कार्य शुरू करने से परहेज करना चाहिए। जानें पंचक के विभिन्न रूपों के बारे में।

रोग पंचक

रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसके प्रभाव से पांच दिन परेशानियों वाले होते हैं। इसमें शारीरिक व मानसिक समस्याएं होती हैं। इस दौरान शुभ कार्य से परहेज करना चाहिए। मांगलिक कार्यों में इसे अशुभ माना गया है। इस बार का पंचक रोग पंचक ही है।

राज पंचक

यदि पंचक सोमवार को शुरू होता है। ऐसे में वह राज पंचक कहलाता है। यह पंचक अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है। राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम शुरू करना शुभ रहता है। इससे जुड़े पुराने काम भी पूरे कर सकते हैं। इस पंचक का उपयोग करना उचित रहता है।

अग्नि पंचक

मंगलवार को शुरू होने वाला अग्नि पंचक कहलाता है। यह मिला-जुला माना जाता है। इसमें कोर्ट- कचहरी व अन्य विवाद में अपना हक पाने वाले काम किए जा सकते हैं। फैसला पक्ष में आने की संभावना रहती है। इसमें अग्नि का भय होता है। इस दौरान निर्माण कार्य और मशीनरी वाले कामों की शुरू करना अशुभ माना गया है।

चोर पंचक

शुक्रवार से शुरू होने वाला चोर पंचक कहलाता है। इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है। नाम के अनुरूप इसमें शुरू हुए काम नुकसान का खतरा रहता है। लेन-देन, व्यापार समेत किसी भी तरह के सौदे नहीं करने चाहिए। अन्यथा धन हानि हो सकती है। अतः उससे परहेज करना चाहिए।

मृत्यु पंचक

शनिवार को शुरू होने वाला मृत्यु पंचक कहलाता है। नाम के अनुरूप अशुभ दिन से शुरू होने वाला यह पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है। इन पांच दिनों के दौरान किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।

अन्य पंचक

सभी पंचक में रहें सावधान, उन्हें पहले परखें। फिर करें काम। ये बुधवार और गुरुवार को शुरू होते हैं। इस पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं है। इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में पंचक में सिर्फ नीचे दिए जा रहे पांच कामों से परहेज करें। इनके अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।

सभी पंचक में नहीं करें ये पांच काम

पंचक में रहें सावधान। रविवार से शुरू हो रहे पंचक समेत सभी में नीचे दिए जा रहे पांच काम नहीं करने चाहिए। ये पांच काम हैं।

1-इस दौरान चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता है। विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से संकट आ सकता है।

2-इस दौरान यदि धनिष्ठा नक्षत्र हो तो घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं एकत्र नहीं करनी चाहिए। अन्यथा आग लगने का भय रहता है।

3-पंचक में दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यह यम की दिशा मानी गई है। इनमें दक्षिण दिशा की यात्रा अशुभ होती है।

4-यदि रेवती नक्षत्र हो तो घर की छत नहीं बनाना चाहिए। इससे धन हानि होती है। इसके साथ ही घर में क्लेश होता है।

5-अंतिम संस्कार में रखें ध्यान। पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लें। ऐसा संभव न हो तो शव के साथ पांच आटे या कुश के पुतले बनाकर अर्थी पर रखें। शव की तरह विधि-विधान से उनका भी अंतिम संस्कार करें। इससे पंचक दोष समाप्त हो जाता है।

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