ब्रह्मांड की शक्ति का स्रोत है प्रेम व सकारात्मकता

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Erase yourself, then know Brahma

भारतीय ऋषियों को प्रकृति के विज्ञान की गहरी समझ थी। वेद में उन्होंने इसी विचार को समाहित किया है। वे प्रकृति को न सिर्फ गहराई से समझते थे, बल्कि उसका दोहन करना भी जानते थे। इसके लिए उन्होंने प्रेम, सकारात्मक सोच, योग, ध्यान, मंत्र (शब्द), तंत्र और यंत्र का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है। मैं आपको प्रेम और सकारात्मक सोच के बारे में जानकारी दे रहा हूं। इसे आज घर बैठे दैनिक जीवन में ही अपना कर इसके चमत्कारिक लाभ महसूस कर सकते हैं।


1)सबसे उपयोगी ताकत है प्रेम : प्राणी मात्र के लिए सबसे बड़ी शक्ति प्रेम व आकर्षण है। प्रेम का असर हर वस्तु जड़-चेतन यहां तक कि जल पर भी पड़ना साबित हो चुका है। इसी नियम के कारण हम समान प्रकृति के व्यक्ति के प्रति प्रेम व आकर्षण अनुभव करते हैं।

2)जैसा सोचोगे, वैसा ही होगा : सबसे महत्वपूर्ण है कि हम इस पल कैसा महसूस कर रहे हैं क्योंकि वर्तमान पल से ही भविष्य का निर्माण हो रहा है। हम जैसा सोचते हैं, उसी से जीवन की हर घटना परिस्थितियों व अनुभव का निर्माण होता है। सोचें कि मेरा जीवन बेहतरीन है तो ऐसे लोग व स्थितियों को आकर्षित कर सकेंगे जिससे सचमुच जीवन बेहतरीन हो जाएगा। प्रेम ही सकारात्मकता और अच्छी भावना है।

3)प्रेम ही अच्छी भावना का आधार : अच्छी भावनाएं प्रेम से उपजती हैं। बुरी भावनाएं प्रेम के अभाव का प्रतीक है। प्रेम की सकारात्मक शक्ति किसी भी अच्छी चीज का सृजन कर सकती है, उसे बढ़ा भी सकती है और बुरे को अच्छे में बदल सकती है। इसके लिए अच्छी भावनाएं बढ़ानी होंगी। इसे बढ़ाने के लिए प्रतिदिन सुबह प्रिय चीजों, घटनाओं, वस्तुओं और व्यक्तियों के बारे में सोचें। इसके तहत हम दिन भर/सप्ताह भर या माह भर की अच्छी और प्रिय घटनाओं, वस्तुओं व लोगों के बारे में एक-एक कर सोचते हुए सिर्फ प्रेम, सकारात्मक विचार व भाव देकर बात करें तो इसका मतलब है कि हम प्रेम दे रहे हैं और अच्छी भावनाएं बढ़ा रहे हैं। ये जितना बढ़ेगा, उतना प्रेम बढ़ेगा।

4)हमारे महसूस करने का असर जीवन पर पड़ता है  : जीवन में हर पल हम कुछ न कुछ विकल्प चुनते हैं और उस माध्यम से सकारात्मकता या नकारात्मकता को देते रहते हैं। यह जानने के लिए कि हम जीवन को ज्यादा क्या दे रहे हैं–हम नौकरी, स्वास्थ्य, जीवन, संबंधों आदि के बारे में सोचें और महसूस करें कि अच्छा या बुरा कैसा लग रहा है तो पता लग जाएगा कि हम क्या दे रहे हैं। ज्यादातर समय तक ठीक-ठाक महसूस करना भी नकारात्मकता का संकेत है। हमें अच्छा या बहुत अच्छा महसूस करना चाहिए।

5)हमेशा खुश रहें : अच्छी चीज पाने के लिए पहले खुश होना होगा और उसे पाया मानकर धन्यवाद देना होगा, तभी वह मिलेगा। यदि खुश होने के लिए उसका इंतजार करेंगे तो कभी खुशी नहीं मिलेगी।

6)शब्दों व विचारों की ताकत है भावना : भावनाएं ही विचार व शब्द की ताकत है। विचार और शब्द यदि रॉकेट हैं तो भावना ईंधन। बिना भावना के विचार और शब्द के कोई मायने नहीं है। यदि भावना प्रतिकूल और विचार व शब्द अनुकूल हो तो उसका कोई मतलब नहीं है।

7)हर चीज सजीव है : सृष्टि की हर चीज सजीव है क्योंकि उसका निर्माण इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से हुआ है। अत: हर चीज में चुंबकीय शक्ति है और उसकी अपनी फ्रीक्वेन्सी होती है। भावना और विचार से हम जिस फ्रीक्वेन्सी में होते हैं, उस वस्तु, व्यक्ति एवं घटना को देख, समझ और अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अत: सब अच्छी व प्रिय वस्तुओं, घटनाओं व व्यक्तियों में सकारात्मकता व प्रेम देकर उन्हें आकर्षित कर सकते हैं। हम जिस फ्रीक्वेन्सी में नहीं होते,वह हमें सामने होते हुए भी दिखाई नहीं देता और हमारा ध्यान नहीं खींच पाता है। अत: कुछ समय निकाल कर प्रतिदिन घर, परिवार, दोस्त, संबंधी, वस्तु, घटनाएं, स्थान आदि में से प्रिय चीज की मानसिक सूची बनाएं और एक-एक कर उन्हें याद करते रहें तो अदभुत अनुभव होगा। हर माह ऐसी सूची लिखी और पढ़ी जानी चाहिए।


–परमाणु या प्राथमिक कण स्वयं वास्तविक नहीं है, वे वस्तुओं या तथ्यों के बजाय संभावनाओं का संसार बनाते हैं।— वार्नर हाइजनबर्ग (नोबल पुरस्कार प्राप्त भौतिकशास्त्री)


8)फ्रीक्वेन्सी को समझें : फ्रीक्वेन्सी को समझने में कोई दिक्कत नहीं है। हम जैसा महसूस कर रहे हैं, उस समय उसी फ्रीक्वेन्सी में होते हैं। अर्थात यदि उत्साहित महसूस कर रहे हैं तो उत्साही लोग, स्थितियों व घटनाओं को आकर्षित करेंगे। डर रहे हैं तो डर से भरे लोगों व स्थितियों को आकर्षित करेंगे। भावनाओं व अहसासों को बदल कर फ्रीक्वेन्सी को बदला जा सकता है। उदाहरण के लिए हम सैर सपाटे पर जाना चाहते हैं लेकिन पैसे न होने से हम निराश हैं। अर्थात हम निराशा की फ्रीक्वेन्सी पर हैं तो हमें भविष्य में भी निराशा ही हाथ लगेगी।

9)भावना को स्वचलित न रहने दें : भावना को स्वचलित न रहने दें। अर्थात परिस्थिति के अनुरूप नकारात्मक प्रतिक्रिया/महसूस करना न दें। हर स्थिति में हमारी सोच व प्रतिक्रिया सकारात्मक होनी चाहिए। उदाहरण के लिए यदि हमारे पास धन नहीं है तो हम अच्छा महसूस नहीं करेंगे। यानि नकारात्मक भावनाएं देंगे। ऐसे में कभी धन के बारे में अच्छी स्थिति नहीं आएगी। हमें भारी भरकम बिल, अप्रत्याशित खर्च या उपकरण खराब होने जैसी स्थितियां ही मिलेंगी।


–आपके साथ जो होता है वह मायने नहीं रखता, मायने यह रखता है कि आप उस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। —एपिक्टीट (यूनानी दाशर्निक)


10)नकारात्मकता का प्रतिरोध न करें : नकारात्मकता को बदलने की कोशिश के लिए उसका प्रतिरोध न करें। इस तरह आप बुरी भावना को ही बढ़ावा दे रहे हैं। वैसे भी नकारात्मकता और कुछ नहीं प्रेम का अभाव है। जैसे ही हम उसे सकारात्मकता व प्रेम से लबालब भर देंगे, नकारात्मकता खत्म हो जाएगी। उदाहरण के लिए पानी से आधे भरे ग्लास में से खालीपन को दूर करने के लिए खालीपन को निकालना विकल्प नहीं है, बल्कि उसमें पानी भरकर ही खालीपन दूर किया जा सकता है।


–बुरी भावना (क्रोध, निराशा या गुस्सा) की तुलना जंगली घोड़े पर सवारी से करें। जब आप उस पर सवार हुए तो खुद उतर भी सकते हैं, उतनी ही तेजी से जितनी तेजी से सवार हुए थे।


11)महसूस करने का तरीका बदलें, जीवन बदलेगा : सिर्फ महसूस करने के तरीके को बदल कर जीवन को बदलने का अवसर हर पल रहता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमने पहले कितनी और कौन सी गलतियां की हैं। ध्यान रहे कि अफसोस करने में एक पल भी न गंवाएं क्योंकि अतीत की गलतियों के बारे में गहरी भावना हमें बीमार करती हैं। कहावत है—बीती ताहि बिसारी देहि आगे की सुधि लेहि।


–मैं किसी भी स्थिति में खुश रहने के लिए कृतसंकल्प हूं। मैंने अपने अनुभवों से सीखा है कि हमारे अधिकांश सुख-दुख हमारी परिस्थितियों पर नहीं हमारे स्वभाव व प्रकृति पर निर्भर हैं।—- मार्था वाशिंगटन (अमेरिका के पहले राष्ट्रपति की पत्नी)


12)दोष न दें, सिर्फ प्रेम करें हम प्रेम तो करते हैं लेकिन कभीकभार। दिन भर में ज्यादातर समय हम में नकारात्मक भावनाएं भरी रहती हैं। इसलिए वैसा ही परिणाम मिलता है। दिन में ज्यादातर समय प्रेम देने से प्रेम व सकारात्मक स्थितियां बनती और मिलती हैं। दोष देना, आलोचना करना, गलतियां खोजना, शिकायत करना आदि नकारात्मक आदतें हैं। मौसम, ट्रैफिक जाम, सरकार, महंगाई, खराब स्वास्थ्य, जीवनसाथी, संतान आदि के बारे में गलत सोचना भी नकारात्मकता है। अत: भयंकर, भयानक, बेकार और वाहियात जैसे शब्द अपनी शब्दावली से हटा दें क्योंकि इनके कहते समय हम नकारात्मकता देते हैं। इसके बदले सकारात्मकता वाले जबर्दस्त, अदभुत, शानदार बेहतरीन और जोरदार शब्द का प्रयोग करें।


–क्रोधित होना दहकते अंगारे को पकडऩे जैसा है। आप इसे किसी दूसरे पर फेंकने के लिए पकड़ते हैं लेकिन जलते खुद हैं। ————-गौतम बुद्ध


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