क्या आप जानते हैं कि राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था

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क्या आप जानते हैं कि राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था
क्या आप जानते हैं कि राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था?

do you know radha-krishna was married : क्या आप जानते हैं कि राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था। यह विवाह ब्रह्मा ने कराया था। सभी देवी-देवता इसके साक्षी बने थे। बात अजीब लगती है लेकिन है सच। एक वर्ग का ऐसा दावा है। दावें के पक्ष में वे दोनों के विवाह के साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। इस लेख में मैं राधा-कृष्ण के इसी अनछुए पहलू को उजागर कर रहा हूं। उनके अमर प्रेम के किस्से सभी जानते हैं। अधिकतर लोग मानते हैं कि उनकी प्रेम कहानी अधूरी रही। श्रीकृष्ण के मथुरा जाने के बाद दोनों की फिर मुलाकात नहीं हुई। विभिन्न ग्रंथों में यही लिखा है। कुछ में तो शादी का विवरण भी है। ऐसे में दोनों के विवाह का दावा थोड़ा चौंकाता है। नीचे इस दावे की पक्ष में तथ्य दे रहा हूं।

मथुरा के निकट हुआ था विवाह, गर्ग संहित में है जिक्र

ब्रह्मा ने राधा और कृष्ण का विवाह कराया था। जहां राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था, वह तीर्थ स्थान बन गया है। वहां जाने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही राधा-कृष्ण की कृपा भी प्राप्त होती है। दरअसल विवाह की बात कोरी कल्पना नहीं है। सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि वे दोनों आज भी अभिन्न हैं। भगवान श्रीकृष्ण के कई विवाह हुए। इसके बावजूद उनका नाम किसी रानी या पटरानी के साथ नहीं बल्कि राधारानी के साथ लिया जाता है। इस जोड़ी की उपासना कभी निरर्थक नहीं जाती। उनके विवाह के कुछ तथ्य आज भी मौजूद हैं। उनके विवाह का प्रसंग श्री गर्ग संहिता के गो-लोक खंड में है।

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मथुरा से 20 किलोमीटर दूर है स्थान, बोर्ड में दर्ज है विवरण

उनका विवाह मथुरा के पास के एक गांव भांडीय वन में हुआ था। मथुरा से इसकी दूरी मात्र 20 किलोमीटर है। प्रजापति ब्रह्मा ने सभी देवी-देवताओं की उपस्थिति में विवाह करवाया था। वहां आज भी पेड़ के नीचे राधा-कृष्ण के साथ भगवान ब्रह्मा का विग्रह है। पेड़ के पास एक बोर्ड लगा है। उसमें इस विवाह का पूरा वृतांत दर्ज है। मान्यता है कि यहां तक पहुंचना हर किसी के वश में नहीं है। सिर्फ ईश्वरीय कृपा से ही पहुंचा जा सकता है। केवल प्रिय भक्त ही युगल जोड़ी के पास पहुंचते हैं। जो यहां उनका दर्शन कर लेता है उसका जीवन अत्यंत सुखमय होता है। मृत्यु के पश्चात स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।

उस स्थान पर जाने से पूरी होती है मनोकामना

इलाके के अनुसार राधा-कृष्ण यहां रोज एकांत में आते हैं। उनकी गुप्त लीलाएं होती हैं। यहां संभवतः विश्व का एकमात्र मंदिर है जहां ठाकुर जी राधारानी की मांग भर रहे हैं। एक विशाल प्राचीन वृक्ष भी है। मान्यता है कि यहीं पर राधा-कृष्ण का विवाह हुआ है। किसी भी दंपति के लिए इस वृक्ष के सात फेरे लेना अत्यंत शुभ माना जाता है। जो यहां पर अपनी पत्नी की मांग भरता, उन्हें राधा-कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है। कुंवारी कन्याएं चार फेरे लें तो मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। इस स्थान पर पहुंचते ही अलौकिक अहसास होता है। ऐसा लगता है मानो राधा-कृष्ण साक्षात मौजूद हैं। मांड गांव में उस पौराणिक स्थल के पास एक प्राचीन कुआं है। यहां आने वाले को कुंए के पानी का आचमन कर बृजवासियों से मदुकरी (भोजन और छाछ) मांगकर अवश्य ग्रहण करना चाहिए।

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