जानें भैरव के किस स्वरूप की साधना का क्या मिलता है फल

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जानें भैरव के किस स्वरूप की साधना का क्या मिलता है फल
जानें भैरव के किस स्वरूप की साधना का क्या मिलता है फल।

know the result of worshipping bhairava : जानें भैरव के किस स्वरूप की साधना का क्या फल मिलता है। भैरव देवता भगवान शिव के रूद्र रूप हैं। हर तरह की साधना में उनका बहुत महत्व है। वे शिव के प्रमुख गणों में से हैं। साथ ही वे पार्वती के अनुचारी भी हैं। सभी शक्तिपीठ में माता के साथ वे बाहर तैनात रहते हैं। उन्हें रात्रि का देवता भी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों में शिव के दो रूपों का अधिक वर्णन मिलता है। एक में उनका रूप भक्तों को अभय देने वाला है। दूसरा रूप ठीक विपरीत है। इसमें वे कालभैरव के रूप में दुष्टों का संहार करते हैं। यह अति भयंकर व विकराल रूप है। उनकी पूजा व साधना कभी बेकार नहीं जाती है।

भैरव के आठ रूप, सबके पूजन का अलग फल

भगवान भैरव के मुख्यतः आठ रूप हैं। इन आठों रूपों में से किसी की भी पूजा से वे प्रसन्न होते हैं। इन रूपों की पूजा का अलग-अलग फल है। इनमें बटुक भैरव, महाकाल भैरव व स्वर्णाकर्षण भैरव प्रमुख हैं। इनमें बटुक भैरव उपासना का अधिक प्रचलन है। भैरव के जिस रूप की पूजा करें, उन्हीं के नाम का उच्चारण करें। तांत्रिक ग्रंथों में अष्ट भैरव के नामों की प्रसिद्धि है। वे इस प्रकार हैं। असितांग भैरव, चंड भैरव, रूरू भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, कपाल भैरव, भीषण भैरव और संहार भैरव। रविवार, बुधवार या भैरव अष्टमी पर इन आठ नामों के उच्चारण मात्र से मनचाहा फल मिलता है। भैरव देवता शीघ्र प्रसन्न होते हैं। प्रसन्न होकर हर तरह की सिद्धि प्रदान करते हैं। क्षेत्रपाल व दंडपाणि के नाम से भी इन्हें जाना जाता है।

जानें भैरव के किस रूप की साधना का क्या फल

जानें भैरव के किस रूप की साधना का क्या फल है। पहले हम उनके आठों रूप की बारी-बारी से चर्चा। फिर उनके स्वरूप को जानें। उनके कार्य को समझें। अंत में उनके पूजन व साधना का फल जानें।

क्रोध भैरव

भगवान भैरव के इस रूप का रंग नीला होता है। इनकी सवारी गरुड़ होती है। भगवान शिव की तरह क्रोध भैरव की भी तीन आंखें होती है। ये दक्षिण और पश्चिम दिशा के स्वामी हैं। काल भैरव के इस रूप की पूजा करने पर सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिलती है। व्यक्ति में समस्याओं से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

कपाल भैरव

भैरव का यह रूप चमकीला होता है। इस रूप में वे हाथी पर सवारी करते हैं। इस रूप में काल भैरव के चार हाथ हैं। दाएं दो हाथों में वे त्रिशूल और तलवार पकड़े हैं। उनके बाएं दोनों हाथों से एक में अस्त्र और एक में पात्र है। उनके इस रूप की पूजा करने पर सभी कानूनी विवादों से मुक्ति मिलती है। व्यक्ति के सारे अटके काम बनने लगते हैं।

असितांग भैरव

असितांग भैरव की तीन आंखें हैं। इनका पूरा शरीर काले रंग का है। असितांग भैरव की सवारी हंस है। ये अपने गले में कपाल की माला धारण किए हुए हैं। इनका अस्त्र भी कपाल है। उनके इस रूप की पूजा करने पर व्यक्ति की कलात्मक क्षमता बढ़ती है।

चंदा भैरव

भगवान भैरव के चंदा रूप का रंग सफेद है। वे तीन आंखों से सुशोभित हैं। इस रूप में वह मोर की सवारी करते हैं। उनके एक हाथ में तलवार है। दूसरे हाथ में पात्र, तीसरे में तीर व चौथे में धनुष धारण किए हुए हैं। इस रूप की पूजा करने वाला विजेता होता है। शत्रु उसके समक्ष टिक नहीं पाते हैं। हर कार्य में उसे सफलता प्राप्त होती है।

गुरु भैरव

जानें भैरव के किस रूप का क्या महत्व में भैरव के गुरु रूप को। यह रूप अत्यंत प्रभावी व आकर्षक है। वे बैल पर सवार हैं। उनके हाथों में कुल्हाड़ी, पात्र, तलवार और कपाल है। उनके कमर में सर्प लिपटा हुआ है। इनकी पूजा करने पर समस्त ज्ञान की प्राप्ति होती है।

संहार भैरव

संहार भैरव का रूप बहुत ही अद्भुत है। उनका पूरा शरीर लाल रंग का है। इस रूप में वे निर्वस्त्र हैं। उनके मस्तक में लाल रंग का कपाल स्थापित है। उनका वाहन कुत्ता है। उनकी भी तीन आंखें हैं। शरीर में सांप लिपटा हुआ है। इस रूप की पूजा करने वाले को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

उन्मत्त भैरव

उन्मत्त भैरव का शरीर पीले रंग का है। वे घोड़े पर सवार हैं। भैरव का यह रूप शांत स्वभाव का कहलाता है। इनकी पूजा करने से नकरात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। साधक को शांत एवं सुखद भावना की अनुभूति होती है।

भीषण भैरव

भीषण भैरव की सवारी शेर है। उनके एक हाथ में कमल का फूल है। दूसरे में तलवार, तीसरे में त्रिशूल व चौथे में पात्र है। उनकी पूजा करने से बुरी आत्माओं व भूतों से छुटकारा मिलता है। जानें भैरव के किस रूप की पूजा का क्या फल स्पष्ट हो गया होगा।

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