हमारी सोच तय करती है हमारा भविष्य

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हृदय रोग और स्पोंडलाइटिस में लाभदायक योग
हृदय रोग और स्पोंडलाइटिस में लाभदायक योग।

Our thinking determines our future : हमारी सोच तय करती है हमारा भविष्य। सोच हमारे व्यक्तित्व का आईना होती है। उससे हमारे कर्म निर्धारित होते हैं। जिससे हमारा वर्तमान और भविष्य बनता है। आमतौर पर लोग इस बारे में ज्यादा ध्यान नहीं देते। वे नकारात्मक सोच से घिरे रहते हैं। इससे असफलता, समस्याएं और बीमारियों को आमंत्रित करते हैं। पुरानी कहावत है बीती ताहि बीसारि दे आगे की सुध ले। मतलब यही है कि जो कुछ गुजर गया, उसे भूल जाएं। भविष्य को सुधारने के लिए सकारात्मक और ऊर्जावान बने रहें। धर्मशास्त्रों में भी परमात्मा पर विश्वास करने और सब कुछ ठीक होने का भाव रखने का संदेश है। साफ कहा गया है कि यदि आपका परमात्मा पर विश्वास है। आप लक्ष्य प्राप्ति के लिए विश्वास से भरे हैं तो जीवन में न कोई बाधा रहेगी और न समस्या।

खुद व परमात्मा पर विश्वास रखें, सकारात्मक रहें

सबसे पहले खुद व परमात्मा पर विश्वास रखें। इसके साथ ही उम्मीद से भरे व सकारात्मक रहें। यह सही है कि स्थितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं है। प्रतिकूल परिस्थितियां कई बार हमें विचलित कर देती हैं। लेकिन हमारा खुद पर तो नियंत्रण है। हम कब और क्या सोचें, ह तो तय कर सकते हैं। नकारात्मकता से शीघ्र निकलें। मन की दिशा बदल और आशा भर कर आप ऐसा कर सकते हैं। अपनी सोच को सकारात्मक बना सकते हैं। निश्चय जानें कि सकारात्मक होते ही आपमें नवीन उत्साह का संचार होगा। प्रकृति व ईश्वर का भी आपको साथ मिलेगा। यही हमारी सोच तय करती है कि हम कैसा जीवन जीएंगे।

सोच बदलें, दुख और शोक से जल्दी हों मुक्त

इसे स्टेस मैनेजमेंट के एक उदाहरण से समझें। एक मनोवैज्ञानिक अपने दर्शकों से मुखातिब था। उसने पानी से आधा भरा एक ग्लास उठाया। उसने पूछा, कितना वजन होगा ग्लास में भरे पानी का? सभी ने 300 से 400 ग्राम तक अंदाज बताया। मनोवैज्ञानिक ने कहा कि कुछ भी वजन मान लो। इससे फर्क नहीं पड़ता। फर्क इस बात का पड़ता है कि मैं कितनी देर इसे उठाए रखता हूँ। उसने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा। अगर मैं इस ग्लास को एक मिनट तक उठाए रखता हूँ… तो क्या होगा? शायद कुछ भी नहीं। अगर मैं इसे एक घंटे तक उठाए रखूं तो? मेरे हाथ में दर्द होने लगेगा। शायद अकड़ भी जाए। अगर मैं इस ग्लास को एक दिन तक उठाए रखता हूँ… तो? मेरे हाथ में यकीनऩ, बेहद दर्द होगा, हाथ पैरालाईज भी हो सकता है।

सुखी और सफल जीवन का रहस्य

तीनों स्थितियों में ग्लास के पानी का वजन न कम हुआ और न ज्यादा। यही स्थिति चिंता व दु:ख में हमारी सोच के साथ होती है। यही हमारी सोच तय करती है हमारे जीवन का परिणाम। यदि आप मन में चिंता व दु:ख मिनट भर रखेंगे। आप पर कोई दुष्परिणाम नहीं होगा। आप इन्हें एक घंटे के लिए रखेंगे। तब दर्द व परेशानी महसूस करने लगेंगे। इन्हें पूरा पूरा दिन रखेंगे तो जीना हराम हो जाएगा। पैरालाईज करके कुछ भी सोचने-समझने में असमर्थ कर देगा। याद रहे कि तीनों स्थितियों में चिंता व दु:ख जितना था, उतना ही रहा। इसलिए चिंता व दु:ख को शीघ्र नीचे रखना न भूलें। जैसे पानी के ग्लास को एक मिनट के बाद नीचे रखना न भूलें। इसे जीवन में आदत के रूप में शामिल कर लें। विश्वास रखें कि आपको सुखी व प्रसन्न रहने से कोई रोक नहीं सकेगा।

होनी को टालना संभव नहीं, सोचना हमारे वश में

अध्यात्म भी यही कहता है। जीवन में घटने वाली घटना से कोई बच नहीं सकता है। सभी अवतारों ने भी यही संदेश दिया है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसे कैसे स्वीकार करते हैं। स्वीकार करने का तरीका ही लोगों को आम से खास बनाता है। श्रीकृष्ण के समक्ष उनका पूरा कुनबा खत्म हो गया। और वह मूकदर्शक बने रहे। प्रकृति के खिलाफ जाकर कुछ नहीं किया या नहीं कर सके। इस सीख के बाद भी लोग भविष्य से डरे रहते हैं। वह तो अनिश्चित है। इस चक्कर में वर्तमान भी दुखी हो जाता है। लोगों के इसी भय का फायदा धर्मगुरु उठाते हैं। इसके नाम पर ठगों का बाजार गर्म हो गया है। सच यह है कि विश्वास व सकारात्मक सोच से ही स्थिति ठीक होती है। हमारी सोच तय करती हमारी जिंदगी। इसे ही लोग कथित गुरु की कृपा समझते हैं।

 

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