नर्मदा के दर्शन मात्र से मिलता है मोक्ष, हर कंकर शंकर

382
नर्मदा के दर्शन मात्र से मिलता है मोक्ष, हर कंकर शंकर
नर्मदा के दर्शन मात्र से मिलता है मोक्ष, हर कंकर शंकर।

Every kankar of narmada is shankar : नर्मदा के दर्शन मात्र से मिलता है मोक्ष। इस नदी व इसके तट का हर कंकर है शंकर। मान्यता है कि सबसे शिव का अंश होता है। इससे निकले शिवलिंग को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इसे लेकर एक धार्मिक कथा भी है। उसके अनुसार नर्मदा ने भोलेनाथ की तपस्या की थी। तब स्वयं भोलेनाथ ने उन्हें वरदान दिया है। इसी कारण उस नदी को विशिष्ट माना जाता है।

पवित्र नदियों की कथा

गंगा, यमुना, नर्मदा व सरस्वती चार श्रेष्ठ नदियां हैं। इनमें भी गंगा को शुरू से सर्वश्रेष्ठ माना जाता रहा है। कहा जाता है कि कोई नदी गंगा की तरह नहीं हो सकती है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने सारे पाप खत्म हो जाते हैं। सरस्वती नदी में तीन दिन स्नान करने से पापों से छुटकारा मिलता है। यमुना में इसके लिए सात दिन स्नान करना पड़ता है। नर्मदा को यह अंतर स्वीकार नहीं था। वे खुद में भी गंगा वाली खूबी चाहती थीं। बहुत प्रयत्न करने पर भी उन्हें सफलता नहीं मिली। हारकर उन्होंने भीषण तपस्या करने का निश्चय किया।

नर्मदा ने की ब्रह्मा की तपस्या, वरदान का त्याग किया

तब नर्मदा जी ने बहुत वर्षों तक ब्रह्माजी की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए। उन्होंने नर्मदा को दर्शन दिया और वर मांगने को कहा। नर्मदाजी ने कहा– हे भगवन! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे गंगाजी के समान कर दीजिए। ब्रह्मा ने मुस्कराते हुए जवाब दिया। उन्होंने कहा– कोई दूसरा देवता भगवान शिव की बराबरी नहीं कर सकता है। कोई दूसरा पुरुष भगवान विष्णु के समान नहीं हो सकता है। कोई दूसरी नारी पार्वती जी की बराबरी नहीं कर सकती है। कोई दूसरी नगरी काशी की बराबरी नहीं कर सकती है। इसी तरह कोई दूसरी नदी भी गंगा के समान नहीं हो सकती है। ब्रह्मा की बात सुनकर नर्मदा निराश हो गई। उन्होंने वरदान का त्याग किया। फिर वे काशी चली गयीं।

शिव की कठोर तपस्या, मिला अनुपम वरदान

नर्मदा काशी के पिलपिला तीर्थ में पहुंचीं। वहां शिवलिंग की स्थापना करके तपस्या करने लगीं। उनके कठोर तप से भगवान शंकर उन पर बहुत प्रसन्न हुए। साक्षात दर्शन दिया और वर मांगने के लिए कहा। तब नर्मदा ने कहा– हे भोलेनाथ!  तुच्छ वर मांगने से क्या लाभ? मेरी तो बस बस आपके चरणकमलों में भक्ति बनी रहे। नर्मदा की बात सुनकर भोलेनाथ और प्रसन्न हो गए। उन्होंने पुनः कुछ भी वर मांगने का प्रस्ताव दिया। नर्मदा ने फिर भक्ति की बात की। भोलेनाथ उनके मन की बात समझ गए। साथ ही उनकी भक्ति से भी प्रसन्न थे। तब वे बोले–नर्मदे! तुम्हारा दर्शन ही अत्यंत पवित्र होगा। दर्शन मात्र से लोगों के सारे पाप नष्ट हो जाएंगे।

नर्मदा का हर कंकर है शंकर

भगवान शंकर इतने पर ही चुप नहीं हुए। उन्होंने और बड़ा वरदान दिया। कहा कि तुम्हारे तट पर जितने भी पत्थर हैं, वे सब शिवलिंग रूप हो जाएंगे। तुमने जिस शिवलिंग की स्थापना की है। जहां तुमने तपस्या की है। वह पुण्य और मोक्ष देने वाला होगा। भगवान शिव नर्मदा द्वारा स्थापित लिंग में विलीन हो गए। इतना महत्व पाकर नर्मदा भी प्रसन्न हो गयीं। इसलिए कहा जाता है–नर्मदा का हर कंकर है शंकर। इसी कारण नर्मदा के दर्शन मात्र से मोक्ष मिलता है।

यह भी पढ़ें – अधिमास : धार्मिक कार्य व आध्यात्मिक उत्थान का सुनहरा मौका

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here