महाशिवरात्रि विशेष : कृपा पाने वाला मंत्र व प्रयोग विधि

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संतान सुख और कर्ज मुक्ति के लिए करें प्रदोष व्रत
संतान सुख और कर्ज मुक्ति के लिए करें प्रदोष व्रत।

देवादिदेव महादेव सिर्फ औघड़दानी और भक्त वत्सल ही नहीं, योग, ध्यान, तंत्र, मंत्र, स्तोत्रों और आदि के केंद्र भी हैं। ये सब उन्हीं से निकलते हैं और उन्हीं में समाहित होते हैं। महाशिवरात्रि का मौका हो तो मंत्रों और उनके बताए रास्ते से उन्हें प्रसन्न करने की चर्चा न हो ऐसा संभव नहीं है। यह अवसर भोलेबाबा को उन्हीं के बताए रास्ते से प्रसन्न कर मनवांछित फल पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। अतः इस लेख में उनके सर्वाधिक प्रिय मंत्रों में से एक महामृत्युंजय मंत्र के बारे में जानकारी दे रही हूं। लोगों में धारणा प्रचलित है कि यह घोर संकट, खासकर स्वास्थ्य व आयु संबंधी समस्या में सर्वाधिक कारगर है। सच्चाई यह है कि इसके प्रयोग से आप जो चाहें पा सकते हैं। पिछले लेखों में इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे चुका हूं। अतः यहां भोलनाथ को इस मंत्र से प्रसन्न करने की कुछ नई और अत्यत प्रभावी जानकारी दे रहा हूं।


सबसे पहले तो यह स्पष्ट कर दूं कि स्वयं भगवान रूद्र ने महामृत्युंजय मंत्र की पंक्ति, गायत्री व अनुष्टुप छंद को कहा है। इसके देवता भी सदाशिव महामृत्युंजय रूद्र ही हैं।

मंत्र है- ऊं ह्रौं जूं सः भुर्भुवः स्वः त्रयंबंकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्द्धनम्। उर्वारिकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् भुर्भुवः स्वरों जूं सः ह्रौं ऊं।

इसका नियमिति रूप से जप तो अत्यंत कल्याणकारी है ही, महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसर पर 24 घंटे के दौरान भी इसका अनुष्ठान कर हवन करने मात्र से कई मनोवांछित फल की प्राप्ति संभव है। अपने जन्म नक्षत्र से 10वें या 21वें नक्षत्र काल में इस महामंत्र से गडूची की चार अंगुल वाली समिधाओं से आहूति देकर दस हजार हवन करने पर उपासक के रोग एवं शत्रुओं का नाश होता है और वह संपत्तिवान बनता है। उसके पुत्र-पौत्र भी लंबी आयु प्राप्त कर लंबी आयु बिताते हैं।


यदि संपत्ति की कमी ज्यादा महसूस हो रही हो तो श्रीफल या बरगद की समिधा से हवन करें। चेहरा निस्तेज हो रहा हो एवं व्यक्तित्व में आकर्षण की कमी महसूस हो रही हो तो खदिर की समिधा से हवन करें, निश्चय ही लाभ होगा। सिर्फ शत्रुनाश मकसद हो तो गडूची की समिधा से सरसो की आहुति डालें। हवन सामग्री में दही मिलाकर आहूति डालने से दूसरों द्वारा भेजी कृत्या का नाश होता है, अपमृत्यु का भय समाप्त होता है तथा वाद-विवाद एवं केस-मुकदमों में सफलता मिलती है। खीर की आहूति डालने से कांति बढ़ती है। लक्ष्मी की प्राप्ति होती है तथा चारों ओर कीर्ति फैलती है। ध्यान रहे कि उक्त सारी आहूतियां दस हजार बार डालने का विधान है। यदि अकेले करने में परेशानी हो तो चार-पांच लोगों का समूह बनाकर कर लें। इससे फायदा यह होगा कि जितने लोग भी आहूतियां डालेंगे, सब जुड़ता जाएगा। इससे आप एक ही दिन में आवश्यकता भर मंत्रों से आहूतियां डाल सकेंगे।


इस महामंत्र के कुछ अन्य प्रयोगों की भी जानकारी दे रहा हूं।

1- यदि आप अपनी वर्षगांठ पर घी, मधु और चीनी मिश्रित खीर से कम से कम 108, यदि 1008 हो तो अति उत्तम हवन कर लें तो साल भर आपके पास लक्ष्मी का वास रहेगा। आपकी कांति और कीर्ति और बढ़ेगी।

2-तीन पत्ती वाले तीन दुर्वाओं से 108 बार हवन करने से रोग नष्ट होते हैं। यदि आप लगातार रोग से पीड़ित हैं तो इसे कुछ दिन आजमा कर देख लें, निश्चय ही राहत मिलेगी। यदि इसे अधिक दिन तक कर सकें तो भारी कल्याण होगा। यदि लगातार ज्वर से परेशान हैं तो हवन में अपामार्ग की समिधा के प्रयोग करें।

3-दूध में डूबोये गए गिलोय के टुकड़ों से एक माह तक प्रतिदिन 1008 हवन करने से बड़े मनोवांछित लक्ष्य की भूी प्राप्ति संभव है। लक्ष्य छोटा हो तो संख्या कम कर प्रतिदिन 108 भी कर सकते हैं। इन प्रयोगों को आजमा कर देखें। ये आपके जीवन की दशा और दिशा बदलने में सक्षम हैं।


ऊं नमः शिवाय।

ऊं नमः शिवाय।

ऊं नमः शिवाय।

ऊं नमः शिवाय।

ऊं नमः शिवाय।

ऊं नमः शिवाय।



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