षोडषी भोग और मोक्ष देती हैं, नित्य करें पूजन

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षोडषी भोग और मोक्ष देती हैं, नित्य करें पूजन
षोडषी का नित्य करें पूजन। प्रसन्न होने पर भोग और मोक्ष देती हैं।

Third mahavidya shodshi : षोडषी भोग और मोक्ष देती हैं। नित्य करें इनका पूजन। षोडषी तीसरी महाविद्या हैं। इन्हें श्रीविद्या व त्रिपुर सुंदरी भी कहते हैं। ये काली की ही एक रूप हैं। काली के दो रूप है- कृष्णवर्णा और रक्तवर्णा। रक्तवर्णा काली ही त्रिपुर सुंदरी हैं। इनकी साधना बहुत ही गूढ़ है। पूर्व जन्म के अच्छे कर्मों व संस्कार होने पर ही इनकी दीक्षा का योग बनता है। यह देवी अत्यंत प्रभावी हैं। इनकी उपासना शीर्ष पर पहुंचा देती है। देवी को साधक की लापरवाही बर्दाश्त नहीं है। वे महसूस कराने वाले तरीके से साधक को दूर करती हैं। माता भक्तों पर शीघ्र कृपा बरसाती हैं।

माता के तीन रूप, क्रम का रखें ध्यान

श्रीविद्या के तीन रूप हैं। पहली आठ वर्षीय बाला त्रिपुर सुंदरी। दूसरी 16 वर्षीय षोडषी। तीसरी युवा स्वरूप ललिता त्रिपुर सुंदरी हैं। इनकी साधना में क्रम का ध्यान रखना जरूरी है। बाला त्रिपुर सुंदरी की उपासना शुरू में उपयुक्त है। क्रम से दूसरे व तीसरे रूप की उपासना करें। पहले ललिता त्रिपुर सुंदरी की उपासना से परेशानी होती है। हालांकि बाद में विकास अवश्य होता है। नीचे प्रमुख मंत्र व उपासना विधि दे रहा हूं।

बाला त्रिपुर मंत्र

ऐं क्लीं सौ:

विनियोग

ऊं अस्य श्रीत्रिपुरबाला मंत्रस्य दक्षिणामूर्ति्त: ऋषि:। पंक्तिश्छंद:। त्रिपुरबाला देवता। सौ: बीजं। क्लीं शक्ति:। ममाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोग:।

न्यास

दक्षिणामूर्ति्तये नमों मूर्घिन, पंक्तिश्छंदसे नमो मुखे, त्रिपुराबालादेवतायै नमो हृदि, सौ: बीजाय नमो गुह्ये, क्लीं शक्तये नम: पादयो:, विनियोगाय नम: सर्वांगे।

ध्यान

रक्तांबरां चंद्रकलावतंसा समुद्यादादित्यनिभां त्रिनेत्राम्।

विद्याक्षमालाभयदानहस्तां ध्यायामि बालामरुणाबुंजस्थाम्।।

पाशांकुशौ पुस्तकमक्ष सूत्रं करैर्दधाना सकला मराचर्या।

रक्तात्रिनेत्रा शशिशेखरेयं ध्येयाखिलद्धर्यै त्रिपुरात्रबाला।

जप विधि और फल

पहले तीन लाख जप करें। फिर दशांश (तीस हजार) हवन करें। तंत्रशास्त्र में इससे ही पुरश्चरण लिखा है। मेरे विचार से पूरी प्रक्रिया को दोहराना चाहिए। षोडषी धन, भोग और मोक्ष देती हैं। तगर, राजवृक्ष, गुलाब या चंपा के फूलों एवं बिल्व फलों से हवन करने पर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। लाल कमलों से वशीकरण होता है। सरसों से शत्रु का नाश होता है। साथ ही राजा (शीर्ष अधिकारी) वश में होते हैं। दूधवाली गुडुची के हवन से अपमृत्यु से बचाव होता है। दूर्वा से हवन करने पर दीर्घायु होती है। पलाश के फूलों से वाक् सिद्धि होती है। चावल (भात) से हवन करें तो अन्न प्रचूर रहेगा। दूध, दही एवं लाजा से रोग का नाश होता है।

वाग्बीज मंत्र और उनके प्रयोग

ऐं

ध्यान

विद्याक्षमालासु कपालमुद्रा राजत्करां कुंदसमान कांतिम्।

मुक्ताफलालंकृति शोभितांगीं बालां स्मरेद् वांगमयसिद्धिहेतो:।

ऐसे करें जप 

संकल्प लेकर जप संख्या, स्थान व समय तय करें। फिर तीन लाख मंत्र जप करें। जप अवधि में श्वेत चंदन लगाकर मुक्तानिर्मित आभूषण धारण करें। दशांश (तीस हजार) हवन करें। हवन में मधुमिश्रित नवीन पलाश के फूलों का प्रयोग करें। इससे श्रेष्ठ कवि बनेंगे। ऐसा व्यक्ति महिलाओं में प्रिय होता है। 

कामबीज मंत्र

क्लीं

फल और जप विधि

रक्त चंदन लगाकर, लाल आभूषण एवं वस्त्र पहन कर तीन लाख जप करने के उपरांत कर्पूर व लाल चंदन मिश्रित मालती के फूलों से दशांश हवन करने पर समस्त जीवों का वशीकरण होता है।

तृतीय बीजं

सौ:

जप विधि

तीन लाख जप का विधान है। जप के समय ललाट पर श्वेत चंदन लगाएं। श्वेत वस्त्र पहनें। स्वयं को देवतामय मानते हुए जप करें। फिर दशांश हवन करें। श्वेत चंदन मिश्रित मालती के फूलों से हवन करने पर लक्ष्मीवान होंगे। साथ ही विद्यापति एवं कीर्तिमान भी होगें। षोडषी भोग और मोक्ष देती हैं। अतः सांसारिक सुख के बाद मोक्ष भी मिलेगा।

शापोद्धार

सभी मंत्र तेजी से फल देने वाले हैं। लेकिन कीलित होने से पहले शापोद्धार करें। तभी फल मिलेगा। शापोद्धार की प्रक्रिया सरल है। सौ बार निम्न मंत्र का जप करें।

1-ह्स्रौ हस्कलरीम् ह्स्रौ

2-ह्सौ हस्कलरीम् ह्सौ

3-ऐं ऐं सौ: क्लीं क्लीं ऐं सौ: सौ: क्लीं

4-हस्रौ हस्क्लरीं हस्रौ:

5-हसौं हस्क्ल्रीं ह्सौं

 

उत्कीलनम्

चेतनी एवं आह्लादिनी मंत्र के जप से उत्कीलन हो जाता है।

चेतनी मंत्र

ऊं ऐं ई औं

आह्लादिनी मंत्र

ऊं क्लीं नम:

उद्दीपनम् (जागृत करना)

उद्दीपन मंत्र करने से विद्या जागृत होती है। इससे बिना बाधा के शीघ्र फल प्राप्त होता है। बाला त्रिपुरा मंत्र के साथ निम्न मंत्रों का जप करें। सात-सात बार जप से विद्या जागृत होती है।

1-वद वद वाग्वादिनी ऐं।

शीघर 2-क्लिन्ने क्लेदिनि महाक्षोभं कुरू।

3-ऊं मोक्ष कुरू।

षोडषी के कामना मंत्र

षोडषी धन, भोग और मोक्ष देती हैं। इसके लिए मूल मंत्र ही पर्याप्त है। उसके पुरश्चरण के बाद ही अन्य मंत्रों में हाथ लगाएं। शीघ्र फल के लिए कुछ कामना मंत्र हैं। इनका आसानी से प्रयोग किया जा सकता है। नियमित जप से शीघ्र फल मिलेगा। जप के लिए पहले संकल्प लें। इसमें समय, स्थान और संख्या समान कर लें। अवधि कामना पूरी होने तक की होगी।

1-ऐं क्लीं सौ:

(शत्रुनाश के लिए)।

2-क्लीं ऐं सौ:

(सामूहिक वशीकरण के लिए)।

3-क्लीं सौ: ऐं

(मुक्ति प्राप्ति के लिए)।

4-ह्रीं क्लीं हसौ

(सर्वसिद्धि के लिए)।

 

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